Wednesday, December 26, 2018

Seal and lubricant

सील क्या है what is seal? और  लुब्रिकेंट क्या है  what is lubricant?

Seal:-जब दो पार्ट्स को आपस में मिलाकर फिट किया जाता है उन दोनों भागों के बीच में सील का प्रयोग किया जाता है ताकि वहां से तरल पदार्थ बाहर की तरफ लिक ना करें सील का प्रयोग गति और तापमान तथा भार के अनुसार किया जाता है सील दोनों पार्ट्स के बीच में एक अच्छे जॉइंट का काम भी करती है और लीकेज को रोकने में सहायक भी होती है।

सील के प्रकार types of seals

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  1. Synthetic seal
  2.  rubber seal 
  3.  gasket cement
  4.  plastic washer type seal
  5.  joint seal
1. Synthetic scene:- यह एक लिक्विड टाइप लोशन की तरह होती है।इस ट्यूब को दोनों भागों की स्तहो के ऊपर लगाया जाता है और भागों को फिट किया जाता है फिट करने के बाद यह सिंथेटिक सील सूख कर एक टाइट जॉइंट बना देती है।
2. रबर सील :- यह सील लेदर की बनी होती है यह पार्ट्स के डिजाइन के अनुसार कटी हुई होती है दोनों पार्ट्स को जब आपस में फिट किया जाता है तब उन पार्ट्स के बीच में रबड़ सील का प्रयोग किया जाता है।
3. गस्केट सील :- गैस किट सील का प्रयोग दोनों पार्ट्स के बीच में किया जाता है ताकि वहां से द्रव्य लीक न करें गैसकिट शीट  को भी पार्ट्स के डिजाइन के अनुसार काटकर के फिट किया जाता है।
4. Plastic washer type seal:- इस सील का प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है जैसे वहां पंप में शाफ्ट केसिंग से बाहर निकलती है उस स्थान पर शाफ्ट और केसिंग के बीच में जो गैप रहता है उसे पूरा करने के लिए प्लास्टिक वाटर टाइप सील का प्रयोग किया जाता है इसका प्रयोग  इसलिए किया जाता है ताकि अंदर से द्रव्य बाहर ना निकले और बाहर से हवा पंप के अंदर ना जाए।
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5. जैन सील:- जैन सील का प्रयोग ज्यादातर इंजन के सिलेंडर हेड के ऊपर किया जाता है क्योंकि वहां पर पार्ट्स के बीच में तापमान बढ़ जाता है तापमान बढ़ने के कारण वहां पर दूसरी सिले पिघल कर खराब हो जाती है जैन सील धातु की चादर की बनाई जाती है तापमान बढ़ने के कारण उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है उसे जेन  सील कहते है।
6. Gasket cement:- गैस किट सीमेंट का प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है जहां पर बड़ी मात्रा में लीकेज को रोकने के लिए सीमेंट का एक लेप लगाया जाता है ताकि द्रव्य लिक न करें।

लुब्रिकेशन क्या होता है what is lubricant?

जब दो स्तह  एक दूसरे के संपर्क में रहकर अपेक्षित गति करती है तो घर्षण उत्पन्न होता है यह घर्षण  मिलने वाले अंगों की गति को प्रतिरोधी बल प्रदान करता है जिसके कारण शक्ति की हानि होती है विभिन्न विभिन्न प्रकार की मशीनें तथा उपकरण में कुछ अवयव एक दूसरे के संपर्क में रहकर भिन्न-भिन्न प्रकार की गति करते हैं जैसे बियरिंग,वाल्व, पिस्टल आदि इस आपसी गति के कारण उनमें टूट-फूट की संभावना हो सकती है इनको टूट-फूट से रोकने के लिए इन स्थानों के बीच स्नेहन या लुब्रिकेंट की एक पतली परत बना दी जाती है जिन्हें लुब्रिकेशन करना कहते हैं।
           जब दो मेंटिंग सरफेस लुब्रिकेंट की पतली सतह फिल्म में पूर्णतया अलग रहती है तब यह फिल्म लुब्रिकेशन कहलाता है जब मैटिंग्स सतह  के बीच उनको अलग करने के लिए लुब्रिकेंट काफी नहीं होता तब यह बाउंड्री लुब्रिकेशन कहलाता है बाउंड्री लुब्रिकेशन में मेंटिंग स त ह कभी-कभी ही संपर्क में आती है।

लुब्रिकेशन के उद्देश्य main objective of lubrication

  1. घर्षण को कम करना शक्ति की हानि तथा टूट-फूट आदि को कम करना।
  2. घर्षण के द्वारा उत्पन्न ऊष्मा को दूर कर कूलिंग इफेक्ट प्रदान करना।
  3. piston ring or cylinder दीवार के बीच इफेक्टिव सील बनाना तथा गैसों के पलायन को रोकना।
  4. बियरिंग तथा अन्य मशीनी अंगों के बीच शौक एवं वाइब्रेशन को अवशोषित करना तथा शोर कम करने में सहायता करना।
  5. गतिशील अंगो का जहां तक संभव हो सके घिसा ब कम करना।
  6. मशीनी अंगों को क्लीनिंग एजेंट के रूप में कार्य करना।
  7. बियरिंग के सरंक्षण को रोकने में सहायता करना।
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लुब्रिकेशन का वर्गीकरण classification of lubrication

  1. Solid lubrication:- hard lubricant, grafied, lead sulphide ,माइका, टलका ,मॉम आदि प्रमुख है।ठोस बियरिंग तथा मशीन के अंगों जो निमन दाब एवं गति पर कार्य करते हैं पर प्रयुक्त किए जाते है।
  2. Semi solid lubricant:- इसमें वे लुब्रिकेंट आते हैं जो साधारण रुप तापमान पर नहीं बहते यह लुब्रिकेंट मिनरल ऑयल तथा फैटी ऑयल से बनाए जाते हैं इन्हें ग्रीस के नाम से भी जाना जाता है इसका प्रयोग वहां होता है जहां तेल का प्रयोग नहीं कर सकते या नहीं हो सकता।
  3. Liquid lubricants:- द्रव लुब्रिकेंट में सभी प्रकार के मिनरल ऑयल पशु एवं वेजिटेबल ऑयल आते हैं यह सस्ते होते हैं ऑयल में लॉर्ड ऑयल तथा स्पर्म ऑयल मुख्य है। वेजिटेबल ऑयल, ऑलिव ऑयल ,कॉटन सीड ऑयल तथा लाइन सैड ऑयल आदि आते हैं इसके अतिरिक्त सिंथेटिक ऑयल पानी तथा सिलिकॉन आदि भी द्रव लुब्रिकेंट के रुप में प्रयोग किए जाते हैं।
  4. Gas lubricants:- इसके अंतर्गत वायु ,हाइड्रोजन ,नाइट्रोजन आदि गैसों का प्रयोग किया जाता है दो या अधिक लुब्रिकेंट को मिलाकर आवश्यकता अनुसार वांछित गुण वाला लुब्रिकेंट तैयार कर प्रयुक्त किया जाता है।

लुब्रिकेंट के आवश्यक गुण

  1. श्यानता किसी तरल की श्यानता उसके बहने की योग्यता की माप है।
  2. इसमें ऊष्मा अवशोषित करने तथा दूर करने की अधिकतम क्षमता होनी चाहिए।
  3. लुब्रिकेंट ऑयल का चिकना पन अधिक होना चाहिए ताकि घर्षण तथा अंगों की गिसावट कम हो।
  4. इसमें उच्च फिल्म सामर्थ्य होना चाहिए।
  5. इसे सरंक्षण प्रतिरोधी होना चाहिए ताकि पार्ट्स  संक्षारण से बचा सके।
  6. एक लुब्रिकेंट को अधिक ताप पर वाष्प कृत नहीं होना चाहिए इस की वाष्प शीलता कम होनी चाहिए।
  7. लुब्रिकेंट में आमलिय गुण नहीं होना चाहिए अन्यथा बियरिंग आदि में क्ष रन करेगा।
  8. सुरक्षा की दृष्टि से प्रज्वलन शिल और जहरीला नहीं होना चाहिए।
  9. उसमें स सतहों को साफ करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए।
  10. उसे कम कीमत का होना चाहिए।
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