Friday, December 28, 2018

Pump Foundation method and installation

पंप की नींव विधि Foundation method and पंप के फिट करना installation of pumps


Pump foundation:- 

पंप की नींव ऐसी होनी चाहिए जो कि किसी भी प्रकार की वाइब्रेशन या हिल जुल को सहन करने तथा बेड प्लेट को एक सही स्थिति व कठोर सहारा बनाए रखें फाउंडेशन तैयार करने के लिए 1,3,5 का मिश्रण जैसे सीमेंट, रेत, बजरी की लगभग फाउंडेशन बनाने की ऊंचाई 7 सेंटीमीटर होनी चाहिए ।
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फाउंडेशन के हर एक बोल्ट को उसके चारों तरफ एक पाइप के सलिव लगातार बिठाना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर एडजस्टमेंट की जा सके स्लीव के अंदर का व्यास बोर्ड के व्यास से ढाई से 3 गुना होनी चाहिए बोल्ट को सतह पर निर्भर रखने के लिए बोलट हेड पर स्लीव के बीच एक वॉशर फिट करनी चाहिए ।फाउंडेशन बोल्ट व बेड प्लेट की 20 एमएम से 40 एमएम मोटी रोटींगं को ध्यान से रखते हुए बोल्ट की लंबाई ईतनी होनी चाहिए कि वह लगभग 6 एम एम नट से बाहर रहे।
Pump alignment


फाऊंडेशन को माउंटिंग के लिए तैयार करना है

पंप के यूनिट को सेट करने से पहले फाउंडेशन की ऊपरी सतह से कंक्रीट और दूसरे पदार्थों को हटा देना चाहिए ताकि ग्राउट सलीव व बोल्ट के बीच में घुस सके।

यूनिट को Foundation पर बिठाना
 पंप यूनिट को दिए हुए बेजिज के ऊपर जगह पर रखें बेजिज पॉइंट पर होनी चाहिए तो पंप के सेंटर के नीचे कई जगह बेजिज बेड प्लेट के मध्य वाले हिस्से पर भी वेजिज की आवश्यकता पड़ती है पंप व प्राईमूवर की कपलिंग को डिस्कनेकट  करें ।
Pump on the foundation


वेजिज की एडजस्टमेंट करते हुए यूनिट को सही लेबल पर लाएं या ग्राउट के लिए सही दूरी 20 एमएम से 40 एमएम सेक्शन व डिस्चार्ज फलो की लेवल को प्लंग करें। और एडजस्ट करते हुए कपलिंग के दोनों हिस्सों का समरेखण करें।
 वेजिज को एडजस्ट करते करने के बाद फाउंडेशन बोल्ट का अंतिम रूप से सभी नट टाइट करने चाहिए जबकि ग्राउट 48 घंटे तक सेट हो चुका है।
What is tap?

यूनिट को फाउंडेशन के ऊपर ग्राउट करना 

फाउंडेशन के चारों तरफ लकड़ी का बांध बनाए तथा कंक्रीट फाउंडेशन की ऊपरी सतह को गिला करें ।बेड प्लेट के ऊपरी हिस्से पर बने छेद को ग्राउट को डाले गा्उट इतना पतला होना चाहिए कि वह ग्राउट प्लेट से नीचे पहुंच सके परंतु इतना गिला भी ना करें की सीमेंट रेत से अलग होकर स्तह पर अलग हो जाए।
1. सीमेंट के एक हिस्से में तीन हिससे रेत होना चाहिए।
2. ग्राउट को डालते समय उसे लगातार हिलाते रहना चाहिए ताकि हवा को बाहर निकाला जा सके।
 3. लकड़ी के बांध को ऊपर से हथौड़े की सहायता से धीरे-धीरे चोट मारने चाहिए ताकि साफ फाउंडेशन बने।
 4. ग्राउट को 48 घंटे तक सूखने दें।
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समरेखण या Alignment 

एक पंप को बिठाते समय समरेखण एक ही महत्वपूर्ण पहलू है ।यदि प्राइम मूबर या पंप का फैक्ट्री से संरेखण किया जाता है फिर भी स्थानांतरित के समय  बेड प्लेट के फाउंडेशन बोल्ट को और समतल तरीके से टाइट करने से समरेखण हो सकता है इसलिए प्रयोग करने से पहले उसका संरेखण करना चाहिए अलाइनमेंट कप लिंग को पराया तीन स्थितियों के लिए चेक किया जाता है।
1. कपलिंग के हिससों की समानतंरित
 कोणीय समरेखण
 पंप शाफ्ट व प्राइम मूवर 
शाफ्ट का विस्थापन किसी भी सथिर में एक हीससे से कप लिंग के विस्थापन डी 125mm से ज्यादा नहीं होना चाहिए ।
2. कप लिंग के दोनों हिस्सों का गलोब लगभग 2 एमएम होना चाहिए ।
3. बेल्ट ड्राइव में पंप की शाफ्ट प्राइम मूवर की शाफ्ट समानांतर होनी चाहिए ।इनको चेक करने के लिए एक धागे का प्रयोग करना चाहिए जिससे ड्राइवर पुलियों  के फेस के चारों पॉइंट पर घुना चाहिए।
counter-sinking how to work with it.
समरेखण या Alignment
पंप वह प्राइम मूवर को आपस में एक समान समरेखण होना चाहिए यदि पंप व प्राइम मूवर का समरेखण ना हो तो उससे बहुत ज्यादा हानियां हो सकती है जैसे कि बियरिंग का टूटना बुश का खराब होना आदि मुख्य कारण है।

प्राईमूवर एक प्रकार का ऊर्जा देने वाला यंत्र होता है जिससे पंप को ऊर्जा दी जाती है। इन दोनों की शाफट के  के द्वारा आपस में  मिलाया जाता है और जैसे ही प्राइम मूवर  को गति दी जाती है  तो पंप  खुद ही  घूमने लगता है  उस स्थिति में पंप से किसी भी liquid पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए आसानी होती है प्राइम मूबर एक प्रकार की ऊर्जा देने वाला यंत्र है।

लेवल या समरेखण:- 
पंप व प्राईमूवर को आपस में है एक समान समय रेखा होना बहुत जरूरी है एक स्तर में लाया जाता है उसे लेवल कहते हैं किसी वस्तु को चारों किनारों की सत्ता में लाइन की प्रक्रिया को भी लेबलिंग के नाम से जाना जाता है चारों शवों को एक लेवल में लाने के लिए वाटर लेवल का प्रयोग किया जाता है लेबल भी पंप प्राइम मूवर के लिए महत्वपूर्ण पहलू है लेवल ठीक ना होने से पंप प्राइम ओवर को नुकसान हो सकता है इसलिए लेवलिंग बहुत जरूरी है।

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Wednesday, December 26, 2018

Seal and lubricant

सील क्या है what is seal? और  लुब्रिकेंट क्या है  what is lubricant?

Seal:-जब दो पार्ट्स को आपस में मिलाकर फिट किया जाता है उन दोनों भागों के बीच में सील का प्रयोग किया जाता है ताकि वहां से तरल पदार्थ बाहर की तरफ लिक ना करें सील का प्रयोग गति और तापमान तथा भार के अनुसार किया जाता है सील दोनों पार्ट्स के बीच में एक अच्छे जॉइंट का काम भी करती है और लीकेज को रोकने में सहायक भी होती है।

सील के प्रकार types of seals

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  1. Synthetic seal
  2.  rubber seal 
  3.  gasket cement
  4.  plastic washer type seal
  5.  joint seal
1. Synthetic scene:- यह एक लिक्विड टाइप लोशन की तरह होती है।इस ट्यूब को दोनों भागों की स्तहो के ऊपर लगाया जाता है और भागों को फिट किया जाता है फिट करने के बाद यह सिंथेटिक सील सूख कर एक टाइट जॉइंट बना देती है।
2. रबर सील :- यह सील लेदर की बनी होती है यह पार्ट्स के डिजाइन के अनुसार कटी हुई होती है दोनों पार्ट्स को जब आपस में फिट किया जाता है तब उन पार्ट्स के बीच में रबड़ सील का प्रयोग किया जाता है।
3. गस्केट सील :- गैस किट सील का प्रयोग दोनों पार्ट्स के बीच में किया जाता है ताकि वहां से द्रव्य लीक न करें गैसकिट शीट  को भी पार्ट्स के डिजाइन के अनुसार काटकर के फिट किया जाता है।
4. Plastic washer type seal:- इस सील का प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है जैसे वहां पंप में शाफ्ट केसिंग से बाहर निकलती है उस स्थान पर शाफ्ट और केसिंग के बीच में जो गैप रहता है उसे पूरा करने के लिए प्लास्टिक वाटर टाइप सील का प्रयोग किया जाता है इसका प्रयोग  इसलिए किया जाता है ताकि अंदर से द्रव्य बाहर ना निकले और बाहर से हवा पंप के अंदर ना जाए।
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5. जैन सील:- जैन सील का प्रयोग ज्यादातर इंजन के सिलेंडर हेड के ऊपर किया जाता है क्योंकि वहां पर पार्ट्स के बीच में तापमान बढ़ जाता है तापमान बढ़ने के कारण वहां पर दूसरी सिले पिघल कर खराब हो जाती है जैन सील धातु की चादर की बनाई जाती है तापमान बढ़ने के कारण उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है उसे जेन  सील कहते है।
6. Gasket cement:- गैस किट सीमेंट का प्रयोग उस स्थान पर किया जाता है जहां पर बड़ी मात्रा में लीकेज को रोकने के लिए सीमेंट का एक लेप लगाया जाता है ताकि द्रव्य लिक न करें।

लुब्रिकेशन क्या होता है what is lubricant?

जब दो स्तह  एक दूसरे के संपर्क में रहकर अपेक्षित गति करती है तो घर्षण उत्पन्न होता है यह घर्षण  मिलने वाले अंगों की गति को प्रतिरोधी बल प्रदान करता है जिसके कारण शक्ति की हानि होती है विभिन्न विभिन्न प्रकार की मशीनें तथा उपकरण में कुछ अवयव एक दूसरे के संपर्क में रहकर भिन्न-भिन्न प्रकार की गति करते हैं जैसे बियरिंग,वाल्व, पिस्टल आदि इस आपसी गति के कारण उनमें टूट-फूट की संभावना हो सकती है इनको टूट-फूट से रोकने के लिए इन स्थानों के बीच स्नेहन या लुब्रिकेंट की एक पतली परत बना दी जाती है जिन्हें लुब्रिकेशन करना कहते हैं।
           जब दो मेंटिंग सरफेस लुब्रिकेंट की पतली सतह फिल्म में पूर्णतया अलग रहती है तब यह फिल्म लुब्रिकेशन कहलाता है जब मैटिंग्स सतह  के बीच उनको अलग करने के लिए लुब्रिकेंट काफी नहीं होता तब यह बाउंड्री लुब्रिकेशन कहलाता है बाउंड्री लुब्रिकेशन में मेंटिंग स त ह कभी-कभी ही संपर्क में आती है।

लुब्रिकेशन के उद्देश्य main objective of lubrication

  1. घर्षण को कम करना शक्ति की हानि तथा टूट-फूट आदि को कम करना।
  2. घर्षण के द्वारा उत्पन्न ऊष्मा को दूर कर कूलिंग इफेक्ट प्रदान करना।
  3. piston ring or cylinder दीवार के बीच इफेक्टिव सील बनाना तथा गैसों के पलायन को रोकना।
  4. बियरिंग तथा अन्य मशीनी अंगों के बीच शौक एवं वाइब्रेशन को अवशोषित करना तथा शोर कम करने में सहायता करना।
  5. गतिशील अंगो का जहां तक संभव हो सके घिसा ब कम करना।
  6. मशीनी अंगों को क्लीनिंग एजेंट के रूप में कार्य करना।
  7. बियरिंग के सरंक्षण को रोकने में सहायता करना।
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लुब्रिकेशन का वर्गीकरण classification of lubrication

  1. Solid lubrication:- hard lubricant, grafied, lead sulphide ,माइका, टलका ,मॉम आदि प्रमुख है।ठोस बियरिंग तथा मशीन के अंगों जो निमन दाब एवं गति पर कार्य करते हैं पर प्रयुक्त किए जाते है।
  2. Semi solid lubricant:- इसमें वे लुब्रिकेंट आते हैं जो साधारण रुप तापमान पर नहीं बहते यह लुब्रिकेंट मिनरल ऑयल तथा फैटी ऑयल से बनाए जाते हैं इन्हें ग्रीस के नाम से भी जाना जाता है इसका प्रयोग वहां होता है जहां तेल का प्रयोग नहीं कर सकते या नहीं हो सकता।
  3. Liquid lubricants:- द्रव लुब्रिकेंट में सभी प्रकार के मिनरल ऑयल पशु एवं वेजिटेबल ऑयल आते हैं यह सस्ते होते हैं ऑयल में लॉर्ड ऑयल तथा स्पर्म ऑयल मुख्य है। वेजिटेबल ऑयल, ऑलिव ऑयल ,कॉटन सीड ऑयल तथा लाइन सैड ऑयल आदि आते हैं इसके अतिरिक्त सिंथेटिक ऑयल पानी तथा सिलिकॉन आदि भी द्रव लुब्रिकेंट के रुप में प्रयोग किए जाते हैं।
  4. Gas lubricants:- इसके अंतर्गत वायु ,हाइड्रोजन ,नाइट्रोजन आदि गैसों का प्रयोग किया जाता है दो या अधिक लुब्रिकेंट को मिलाकर आवश्यकता अनुसार वांछित गुण वाला लुब्रिकेंट तैयार कर प्रयुक्त किया जाता है।

लुब्रिकेंट के आवश्यक गुण

  1. श्यानता किसी तरल की श्यानता उसके बहने की योग्यता की माप है।
  2. इसमें ऊष्मा अवशोषित करने तथा दूर करने की अधिकतम क्षमता होनी चाहिए।
  3. लुब्रिकेंट ऑयल का चिकना पन अधिक होना चाहिए ताकि घर्षण तथा अंगों की गिसावट कम हो।
  4. इसमें उच्च फिल्म सामर्थ्य होना चाहिए।
  5. इसे सरंक्षण प्रतिरोधी होना चाहिए ताकि पार्ट्स  संक्षारण से बचा सके।
  6. एक लुब्रिकेंट को अधिक ताप पर वाष्प कृत नहीं होना चाहिए इस की वाष्प शीलता कम होनी चाहिए।
  7. लुब्रिकेंट में आमलिय गुण नहीं होना चाहिए अन्यथा बियरिंग आदि में क्ष रन करेगा।
  8. सुरक्षा की दृष्टि से प्रज्वलन शिल और जहरीला नहीं होना चाहिए।
  9. उसमें स सतहों को साफ करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए।
  10. उसे कम कीमत का होना चाहिए।
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Monday, December 24, 2018

Valve

वाल्व  क्या है what is valve? वाल्व के प्रकार types of valve 


Q.1 वालव किसे कहते हैं?
यह पाइप सिस्टम या मशीनरी में प्रयोग किए जाने वाला यंत्र है यह पाइप सिस्टम के दो हिस्सो को जोड़ने के लिए या आइसोलेट करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
Q.2 वाल्व कितने प्रकार के होते हैं?
बालव निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
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  1. स्टार्ट flow valve
  2. Back flow valve
  3. दवाव  को रेगुलेटर करने वाला वाल्व
  4. Pressure relief valve

1. Start flow valve:- 

इस वाल्व की मुख्य विशेषता यह है कि जब यह खुल जाता है तो तरल प्राय बहने में कम से कम बाधा डालता है यह दबाव में भी कम हानि करता है।

2. Back flow को रोकने वाला वॉलव:-

इस प्रकार के वॉलव तरल द्रव्य के बहाव से खुल जाता है और तरल द्रव्य को उल्टी दिशा की ओर बहने की स्थिति में बंद हो जाता है इस प्रकार के वाल्व को चेक वाल्व कहते है।

3. बहाव को रोकने वाला वाल्व :-

इस प्रकार के वॉल्व में बहाव को रेगुलेटर करने के लिए इस तरह बाधा उत्पन्न की जाती है या तो तरल द्रव्य  जैसे बहाव की दिशा को बढ़ाकर  या बदल कर उत्पन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

4. दबाव को रेगुलेटर करने वाला वाल्व:-

यह वाल्व दवाब या लाइन के दबाव को कम करके उनको ऊर्जा दवाब पर रखने के लिए प्रयोग किया जाता है यदि लाइन का दबाव कम या ज्यादा हो तो वाल्व सर्विस दबाव को उतना ही रखते हैं।

5. Pressure relief valve:-

इसका प्रयोग जहां पर सिस्टम में है बहुत ज्यादा प्रेशर या दबाव नुकसान कर सकता है इस प्रकार के वॉलव प्रायः   स्प्रिंग लेटिड होते हैं यह तभी खुलता है जब दबाव उसकी दिशा में घूमता है जिस पर वाल्व को फिट किया जाता है।

प्रयोग के आधार पर वालव के प्रकार

  1. Gate valve:- इस प्रकार के वाल्वो को या तो पूरा खुला रखा जाता है जिससे यह कम से कम बाधा उत्पन्न कर सके या इसे पूरी तरह से बंद करना चाहिए इस तरह से इन न्वॉल्व का प्रयोग पंपिंग प्रेक्टिस के लिए किया जाता है।
  2. ग्लोब वाल्व:- यह स्क्रु turn वालव होता है इसकी बॉडी गोलाकार होती है इसका प्रयोग बहाव को रोकने के लिए किया जाता है जहां सिस्टम पूरी तरह से आइसोलेट की आवश्यकता होती है इसकी जाली में ग्राइंड रहता है जिस पर एक गोल शीट बैठती है।
  3. बॉल वाल्व :- इसका प्रयोग वहां होता है जहां तरल द्रव्य को स्वतंत्र रूप सेे बहने की आवश्यकता होती हैै इसमें  वाल्व एक जालि में  ग्राइंडर रहते हैं और एक वर्गाकार शीट पर बैठते हैं।
  4. प्लग वाल्व:- यह बालव बहुत ही साधारण प्रकार के होते हैं इसे cock भी कहा जाता  है interchangeability-limitfits-tollerance इस प्रकार के वॉलव में टेपर या समानअंतर प्रकार की शीट होती है प्राय पानी, गैस ,रासायनिक तरल द्रव्य सिस्टम में होता है इस प्रकार के वाल्व का मुख्य का भाग बॉडी प्लग व ऊपर की clemp होते हैं।
  5. डॉया फ्रेम :- इसका तरल प्राय मिलने में तरल द्रव्य को सफलता देता है इसमेंं daya फ्रेम होती है जो शीट पर बैठकर  तरल द्रव्य के बाहव को रोकती हैै इसका प्रयोग वहां  पर करते हैं जहां पर जंग व लीकेज वाल्व की maintenance के काबू मेंं लाने की आवश्यकता होती है।
  6.  वॉटर फ्लाई वॉलब:- इस प्रकार के वाल्व को 90° के flow को पूरी तरह खोलने व बंद करने के लिए प्रयोग किया जाता ।है।
  7. Needle valve:- इसमें स्टैंन नीडल के आकार की  तरह होती है कम प्रयास से बंद हो जाते हैं ते नोकदार निडल एकदम सही फिट हो जाती है इनका प्रयोग साधारणतया instruments guage मोटर लाइन में किया जाता है।
  8. Chek वाल्व :- यह बालव non-return बालव होते हैं इसे फुटबॉल में भी कहते हैं इसमें तरल द्रव्य का बहाव एक ही दिशा में होता है इसका प्रयोग वहां किया जाता है जहां तरल द्रव्य का बहाव उलटी दिशा में ना हो इसे सेफ्टी वाल्व भी कहा जाता है फुटबॉल का प्रयोग Steiner के साथ पंप की सक्शन पाइप के ऊपर किया जाता है जिससे पंप ki suction साइड में खाली होने से बचाया जाता है यदि फुटबॉलव का प्रयोग ना किया जाए तो पंप को स्टार्ट करते समय प्राईमिंग की आवश्यकता पड़ती है इस प्रकार के वाल्व में डिस्क लगी होती है जो तरल द्रव्य  के बहाव को रोकती है।

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Saturday, December 22, 2018

Lovh Roter pump

लोव रोटर पंप और टरबाइन पंप lovh Roter pump and  turbine pump

Lovh  pumps की क्षमता गति के समानुपाती होती है तथा हेड का इनकी क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता यह पंप सेल्फ प्राईमिंग नहीं होता है इनका ज्यादातर प्रयोग उद्योगों में किया जाता है जहां पर सप्लाई की आवश्यकता होती है जैसे जूस बनाने वाली तथा दवाइयां बनाने वाली है और खाने की कुछ वस्तुएं बनाने वाले कारखानों में इनकी ज्यादा
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आवश्यकता होती है और इनका प्रयोग जंग लगने वाले हैं रोटर पंप एक अंत आंतरिक गियर पंप की तरह कार्य करते हैं अंतर केवल इतना होता है कि पंप के अंदर गियर के बजाय लोव रोटर लगा होता है लोव पंप रोटर के केंद्र में से एक फ्लूड टाइट ज्वाइंट बनाते हैं तरल द्रव्य की पेरा फेरी के साथ बाहर की तरफ को डिस्चार्ज की साइट से बाहर फेंकता है यह पंप दो तीन चार या पांच लोव वाले होते हैं इस प्रकार के पंपों को लोव रोटर पंप कहा जाता है ।
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टर्बाइन पंप Turbine Pump:-

Turbine pump  सेंट्रीफ्यूगल पंप का सुधरा हुआ  रूप है इन पंपों में पानी को रोकने के लिए अपकेंद्रीय बल  का प्रयोग किया जाता है reamers. परंतु हाउसिंग केसिंग का डिजाइन ऐसा होता है कि यह पंप उसी साइज के सेंट्रीफ्यूगल पंप से ज्यादा सक्शन हेड  से डिस्चार्ज दे सकता है टरबाइन पंप में पानी दबाव के साथ इंपेलार के बाहरी रिम के बीच बाहरी किनारों के पास छोटी मोटी पैकेट होती है
scrapers-keyway टरबाइन पंप का प्रयोग द्रवित पेट्रोलियम गैस को पंप करने के लिए किया जाता है इसका प्रयोग एसिड अल्कोहल को खींचने के लिए किया जाता है।

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Thursday, December 20, 2018

Gear pump

गियर पंप  Gear pump गियर पंप की बनावट shap of gear pump   गियर पंप का कार्य working mathod of gear pump

गियर पंप दो प्रकार के होते हैं इंटरनल गियर पंप एंड एक्सटर्नल गियर पंप।
यह पंप 300 पीएसआई तक दवाब दे सकते हैं तथा तेल को पंप करने के लिए बहुत उपयोगी होता है यह साधारण तया धातुओं के बने होते हैं अतः तरल द्रव्यों के लिए इन पंपों का प्रयोग नहीं होता है क्योंकि इन पंपों के अंदर जंग लगने की आशंका होती है इन पंपों की क्षमता 90% से अधिक होती है।

What is counter sinking?

गियर पंप के बनावट

एक साधारण गियर पंप में एक ही साइज के व्यास के आपस में मेल खाकर चलने वाले दो स्पर्श गियर होते हैं यह गियर दोनों अलग-अलग स्पैंडल पर फिट किए जाते हैं जैसा कि बताया गया है 1 गियर को ड्राईवर गियर तथा दूसरे को ड्रिवन गियर कहा जाता है इन गियर को हाउसिंग या केसिंग के अंदर फिट किया जाता है इन पंपों को सीधे ही प्राइम मूवर के द्वारा या गियर के द्वारा शक्ति दी जाती है स्पर्श गियर की गति 600 आर पी एम तथा  डिस्चार्ज पेसर 1500 पी एस आई तक होती है।
How to work with tap?

गियर पंप के कार्य working method of gear pump

जब ड्राईवर गीयर को पावर देख कर घुमाया जाता है तो ड्रिवन गीयर भी ड्राइवर गीयर की विपरीत दिशा में घूमता है जिसकी वजह से पंपिंग एक्शन पैदा होता है दोनों की हाउसिंग के अंदर बिल्कुल साथ-साथ फिट किया जाता है तथा तेल को पेरा फेरी के साथ ले जाकर डिस्चार्ज कर देते हैं जैसा कि सवशन  साइड में गियर के दांतों का प्रत्येक जोड़ा आपस में मिलता है तो इस साइड का आयतन दोनों की दूरी के बराबर आयतन से घट जाता है जिसकी एक वजह से सक्शन का प्रवाह पैदा होता है जहां गियर के दांत आपस में मिलते हैं उस जगह पर फ्लूड फाइल ज्वाइंट बन जाता है
What is interchangeability ,limit,fits and tollerance?
सक्शन  साइड से आने वाला तेल दांतों के कट्स  के द्वारा बनाया जाता है तथा पेरा फेरी के साथ होता हुआ डिस्चार्ज से बाहर होता है गियर का प्रत्येक दांत एक रिसिप्रोकेटिंग पंप के plunger की तरह कार्य करता है जिसकी वजह से तरल द्रव्य का दवाब अंदर बहार भेजना शुरू कर देता है इस पंप के डिस्चार्ज साइड में एक स्प्रिंग लोडिंग स्लीव वॉल्व लगा होता है यह वाल्व पंप को क्षति से बचाता है यदि किसी वजह से डिस्चार्ज साइड में ब्लॉक आ जाती है तो सक्शन स्प्रिंग के विरुद्ध वाल्व खुल जाता है तथा तरल द्रव्य को दोबारा सक्शन  साइड में भेज देता है जिससे दबाव बढ़ने का पता चलता है तो उसे ठीक करने पर दबाव कम हो जाता है।और फिर वाल्व अपने आप बंद हो जाता है तथा तरल द्रव  फिर से सिस्टम मैं जाना शुरू कर देता है।


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Tuesday, December 18, 2018

Rotary pump

रोटरी पंप Rotary pump रोटरी पंप का पंपिंग एक्शन pumping action रोटरी पंप के प्रकार types of rotary  PUMP

रोटरी पंप एक पॉजिटिव डिस्प्लेसमेंट पंप होता है जिसमें   पंपिंग एक्शन पंप को घूमने वाले और स्थिर हीसों के द्वारा पैदा किया जाता है इस पंप की यह विशेषता है कि डिस्चार्ज किए हुए तरह द्रव्य की मात्रा पंप की गति पर निर्भर करती है रोटरी पंप में रेसिप प्रोकेटिंग पंप की भांति इनलेट आउटलेट वाल्व नहीं लगे होते हैं रोटरी पंप का डिस्चार्ज स्थिर होता है जबकि रेसिपी प्रोटिंग हीलने वाला होता है रोटरी पंप का प्रयोग तरल द्रव्य के अनुसार किया जाता है रोटरी पंप का प्रयोग इंडस्ट्रियल प्लांट ,पावर स्टेशन में तेल, पानी इत्यादि तरल द्रव्य को उठाने तथा सर्कुलेट करने के लिए किया जाता है रोटरी पंप में सेंट्रीफ्यूगल पंप से कम फाल्ट पड़ते हैं क्योंकि जिस त्रल द्रव्य को पंप करना होता है वह तरल द्रव्य उसके सभी हीस्सो की लुब्रिकेशन करता रहता है।
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रोटरी पंप का पंपिंग एक्शन pumping action of rotary pump

सभी रोटरी पंप ओं का पंपिंग एक्शन पॉजिटिव डिस्प्लेसमेंट होता है रोटरी पंप में दो पार्ट होते हैं इनलेट और आउटलेट।
रोटरी पंप का पंपिंग एक्शन निम्नलिखित तीन प्रक्रियाओं में होता है:-
  1. आउटलेट के लिए बांध इनलेट के लिए खुला। Close for outlet and open for inlet
  2. आउटलेट के लिए खुला और इंग्लैंड के लिए बंद। Open for outlet and close for inlet
  3. आउटलेट के लिए बंद और इंग्लैंड के लिए बंद। Cloes for outlet and cloes for inlet.
रोटरी पंप का सही पंपिंग एक्शन इनलेट के लिए खुला होने के कारण यह स्मूथ डिस्चार्ज पैदा करता है स्मूथ डिस्चार्ज गति के आधार पर होता है और बंद इन लेट पंप की गति पर निर्भर करता है।
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रोटरी पंप के प्रकार types of rotary Pump:-

  1. simple impeller pump
  2.  flexible impeller pump
  3.  gear pump
  4.  lobe rotor pump 
  5. vane pump
  6.  screw pump
  7.  liquid ring pump
  8.  roots pump
1. Simple impeller pump:- . यह पंप छोटे आकार में बनाए जाते हैं तथा इनकी क्षमता सीमित होती है यह एक सिंगल स्टेज अपकेंद्रीय पंप होते हैं एक विशेष गति पर कार्य करते हैं यह सस्ता व साधारण पंप होता है तथा साफ तरल   द्रव्य को एक मात्रा में एक जगह से बड़े हुए दबाव के अंदर भेजने का कार्य करता है यह पंप सेल्फ प्राईमिंग नहीं होता है तथा छोटे आकार के काम की लिफ्ट 1 मीटर से कम होती है।
2. Flexible impeller pump:- यह पंप मजबूत माने जाते हैं इसके इंपैलर की वजह से इसका दबाव सीमित है साधारण दया यह पर आया और 40 डिग्री से 50 डिग्री पीएसआई दबाव तक काम करते हैं इसमें 5 मीटर की सक्शन लाइट लिफ्ट संभव है इन पंपों में एक फ्लैक्सिबल व्हेन इंपैलर लगा होता है जिसे की सेटिंग सक्शन की गोलाई के सिंह के बीच मध्य में फिट किया जाता है शेट्टी सचिन के किनारों पर इनलेट आउटलेट पार्ट बने होते हैं।

फ्लैक्सिबल पंप की कार्यविधि :-
जब इंपैलर unsetric सक्शन से आते जाते हैं तो निर्वात पैदा होता है चेंबर के अंदर आयतन बढ़ता है जिसकी वजह से पंप के अंदर तक द्रव्य खींचा जाता है अतः यह पंप सेल्फ प्राईमिंग पंप होता है इसके इंपैलर प्राय न्यू पिन रबड़ के बने होते हैं।।
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Friday, December 14, 2018

Parts of reciprocating pump

रिसिप्रोकेटिंग पंप के भाग  Describe the construction of power pump with its parts liquid end and power end

रिसिप्रोकेटिंग पंप के भाग निम्नलिखित होते हैं
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  1. Liquid end
  2. Power end

1 Liquid end

लिक्विड एंड में निम्नलिखित पार्ट होते हैं जिसमें सिलेंडर ,इंजन ,वाल्व, स्टाफिंग बॉक्स ,मैनीफोल्ड, सिलेंडर हैड
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  1. Silender:- सिलेंडर पंप कि वह बॉडी होती है जिसके अंदर प्रेशर पैदा होता है वह पिस्टन या  प्लूंजर की सहायता से प्रेशर पैदा करता है।
  2. Plunger:- plunger प्रेशर उत्पन्न करता है यह निकल स्टील का बना होता है प्लूंजर टाइप रिसिप्रोकेटिंग पंप वॉटर ऑयल , एसिड के पंप करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  3. Piston:- 200 पीएसआई तक पीसटन का प्रयोग किया जाता है तथा इसे अधिक प्रेशर के लिए प्लेनजर का प्रयोग किया जाता है पिस्टन सिलेंडर के अंदर मूव करता है।
  4. Stufing box :- स्टाफिंग बॉक्स में बॉक्स बुशिंग तथा ग्लैंड पैकिंग की जाती है जिससे तरल डब्बे की लीकेज को रोकने के लिए बनाया जाता है।
  5. Sylander Head or Liner:- सिलेंडर या लाइनर प्राय निकल बृष्टि धातुओं का बना होता है इसकी लंबाई पंप के स्ट्रोक से थोड़ी ज्यादा होती है।
  6. Valve:- वालु के मुख्य भाग शिट और प्लेट होते हैं वह स्प्रिंग के द्वारा चलते है।
  7. Manifold:- मैनीफोल्ड वह चेंबर होता है जिसका प्रयोग सिलेंडर से पहले या बाद में तरल द्रव्य को इकट्ठा करने को डिलीवरी करने में प्रयोग किया जाता है।

2. Power end 

Power एंड में भी निम्न लिखित पार्ट होते हैं क्रैंक शाफ्ट कनेक्टिंग रोड, बियरिंग,main bearing crank pin bearing ,lubrication

  1. Crank shaft:- crank Shaft पराया कास्ट आयरन स्टील कास्ट स्टील की बनी होती है इसका प्रयोग घूमने वाली गति को आगे पीछे वाली गति में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
  2. Connecting road:-  कनेक्टिंग रोड, क्रैंक पीन की घूमने वाली को एस्लेटिंग फोर्स में बदलती हैं। कनेक्टिंग रोड forge steel or cast steel होती है।
  3. Bearing:- पावर पंप में स्लीव एंटी फ्रिक्शन बेयरिंग का प्रयोग किया जाता है इसलिए बियरिंग का प्रयोग केवल 40 आर पी एम तक किया जाता है इसे ज्यादा स्पीड होने के कारण इसके बीच में लुब्रिकेशन परत नहीं बन पाती इसलिए ज्यादा स्पीड होने के कारण स्लीव बेयरिंग का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  4. Main bearing:- यह प्राय दो टुकड़ों में होते हैं यह पिस्टन वह plunger को बैलेंस कर लेते हैं यह बियरिंग ब्राउजर बैक्ड धातु के स्प्लिट बेयरिंग होते हैं।
  5. Crank pin Bearing:-  यह क्रैंक स्प्लिट टाइप के होते हैं क्रैंक पिन बियरिंग में रोलर बेयरिंग का भी प्रयोग किया जाता है गति वह भार के अनुसार ही क्रैंक पिन बियरिंग का प्रयोग किया जाता है।
  6. Lubrication:- साधारण लुब्रिकेशन सिंपलेक्स सिस्टम से की जाती है लुब्रिकेशन करने के लिए पंप भी लगा होता है इन सभी पार्ट्स को लुब्रिकेट करने के लिए इसमें पावर एंड में एक sunk बना होता है जिसके अंदर लुब्रिकेशन तेल डाला जाता है जिसे पावर एंड में लुब्रिकेशन की जाती है जब क्रैंक शाफ्ट चलती है तो वह लुब्रिकेशन को साथ में उठाती है और सभी पार्टस में स्नेहक पहुंच जाता है और स्नेहन होना शुरू हो जाता है स्नेहन को मापने के लिए पावर एंड में एक डिपस्टिक लगी होती है जिससे स्नेहन को कम ज्यादा माप लिया जाता है।


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Wednesday, December 12, 2018

Reciprocating pump

रिसिप्रोकेटिंग पंप (Reciprocating pump)रिसिप्रोकेटिंग पंप के सिद्धांत (principles of reciprocating pump) रिसिप्रोकेटिंग पंप का वर्गीकरण classification of reciprocating pump


साधारण प्रकार की रेसि procating  पंप में एक ही piston लगा होता है जो कि सिलेंडर के अंदर ऊपर नीचे या आगे पीछे हो कर चलता है पिस्टन को कनेक्टिंग रोड़ के द्वारा मोटर से दी हुई पावर power से चलाया जाता है इसमें dail-test-indicator सक्शन वह डिस्चार्ज वाल्व लगे होते हैं रिसिप्रोकेटिंग पंप को suction साइड से तरल द्रव को खींचने के लिए सिलेंडर के अंदर पिस्टन की reversing गति को प्रयोग किया जाता है तथा तरल द्रव दबाब  के अंदर डिस्चार्ज साइड में जाता है इस पंप को पॉजिटिव डिस्प्लेसमेंट पंप कहते हैं।

रिसिप्रोकेटिंग पंप के सिद्धांत तथा कार्य:- 

तरल द्रव्य को हटाना तथा डिस्चार्ज करना तरल द्रव्य को ऊपर उठाना तथा एक तरल द्रव्य को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना।
Principles of reciprocating pump


रिसिप्रोकेटिंग पंप वह पंप होता है जिसमें एक तरफ piston या प्लजर दिए हुए तरल द्रव्य के आयतन को  हटाता है। रिसिप्रोकेटिंग पंप का सिदांत यह होता है कि एक ठोस पदार्थ तरल द्रव्य को हटाता है जैसे कि पलजर ए से दूसरे बर्तन में अपने डूबे हुए आयतन को बराबर b बर्तन में तरल द्रव्य को पहुंचा देता है दूसरे शब्दों में हटाए गए तरह द्रव्य का आयतन तरल द्रव्य में ठोस पदार्थ जितनी गहराई तक डूबा हुआ होता है वह उसके आयतन के बराबर होता है।
combination-protractor
surface-plate

Classification of reciprocating pump:-

रिसिप्रोकेटिंग पंप का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जाता है
1. Steam driven reciprocating pump
2. Power driven reciprocating pump

1. Explain  Steam driven reciprocating pump:-

यह पंप निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
  1. Direct acting pump
  2. Central or duplex pump
  3. Heavy duty pump
/calipers
1. Direct acting pump - 
इस पंप में एक स्टीम पिस्टन को पिस्टन रोड के साथ सीधे तरल द्रव्य पिस्टन से जोड़ दिया जाता है स्टीम सॉलि़ed वालव के द्वारा प्रवेश करती है हेवी पिस्टन को आगे मूव करती है जब सिस्टम अपना स्ट्रोक पूरा कर लेता है तो प्रयोग की हुई स्टीम एडजेस्ट वाल्व के द्वारा बाहर निकल जाती है तथा piston rivers ho जाता है इस प्रकार की यह प्रक्रिया चलाई जाती है।
2. Simple or duplex pump
Simplex टाइम में एक सटीम व पानी का सिलेंडर होता है और डुप्लेक्स पंप में दो स्टीम व दो पानी की सिलेंडर होते हैं।
3. Heavy duty reciprocating pump:-
यह पंप दो प्रकार के होते हैं पिस्टन टाइप स्टीम पंप और plunger ड्रिवन रेसि प्रोकेटिंग पंप 
पिस्टन टाइप स्टीम पंप में एक पीस टन में चार रिंग कास्ट आयरन के बने होते हैं इसे पैकेट पिस्टन के नाम से भी जाना जाता है किसी जगह पर पिस्टन ब्राउज़र धातु से भी बनाता है।
तथा 
plunger driven type reciprocating pump :-
इस पंप में एक ब्लेंडर सिलेंडर स्टेशनरी में मूव करता है और तरह डब्बे का दबाव बढ़ाने का कार्य करता है।

2. Power driven reciprocating pump

यह वह रेसीप्रोके टिंग पंप जो मोटर या इंजन द्वारा चलते हैं उन्हें पावर पंप या पावर ड्रिवन कहते हैं यह पंप लंबवत या होरिजेंटल दो प्रकार के होते हैं यह पंप क्रैंक शाफ्ट द्वारा चलाए जाते हैं क्रैंक शाफ्ट को मोटर या इंजन द्वारा ड्राइव मिलता है इस ड्राइव हुई गति के कम करने के लिए प्राय क्रैंक शाफ्ट व ड्राइव के बीच में गियर व पुली का प्रयोग किया जाता है पावर पंप अधिकतर होरिजेंटल एक्टिव पिस्टन या प्लाजर टाइप होते हैं वर्टिकल पंप सिंगल एक्टिंग टाइप होते हैं।

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पावर ड्रिवन रिसिप्रोकेटिंग पंप के कार्य working of power driven reciprocating pump

जब किसी भी पंप को पहली बार स्टार्ट किया जाता है तो सबसे पहले उस पंप के तरल द्रव्य से प्राइम कर लेना चाहिए गियर व बियरिंग की लुब्रिकेंट अच्छी तरह से चेक कर लेनी चाहिए पंप की शिट अच्छी तरह से सुनिश्चित कर लेनी चाहिए कि पंप का डिस्चार्ज वलव  खुला है यदि ऐसा नहीं किया जाए तो पिस्टन बढ़ने के कारण नुकसान हो सकता है इस कठिनाई को दूर करने के लिए डिस्चार्ज लाइन में ऑटोमेटिक रिलीफ वाल्व का प्रयोग किया जाता है जब पंप स्टार्ट होता है तो पिस्टन मूव करता है तथा सिलेंडर में वैक्यूम बनाता है और वैक्यूम की वजह से तरल द्रव्य सक्शन साइड से चेंबर में आ जाता है फिर उसके बाद पिस्टन जब आगे की ओर मूव करता है उस समय पिस्टन तरल द्रव्य को  डिस्चार्ज वालव  के द्वारा बाहर धकेलता है रिवर्स स्टॉक में वही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और तरल द्रव्य सिलेंडर शक्शन चेंबर में आता रहता है और पिस्टन द्वारा आगे के स्ट्रोक को जब मुव करता है तो डिस्चार्ज बालव खुलकर द्रव्य को डिस्चार्ज करता रहता है।

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Saturday, December 8, 2018

Prime movers ,head and Priming

प्राइम मुवर क्या होता है what is prime mover?सक्शन हेड क्या है suction head, डिस्चार्ज हेड discharge head,स्टैटिक हेड static head, टोटल total head, प्राईमिंग what is priming?


प्राइम मूवर वह साधन है जिसके द्वारा किसी मशीनरी को चलाने के लिए ऊर्जा दी जाती है उसे प्राइम मूवर कहते हैं या प्राइम मूवर वह साधन है जिसके द्वारा पंप को चलाने के लिए ऊर्जा या शक्ति दी जाती है उसे प्राइम मूवर कहते हैं प्राइम मूवर के प्रकार:-
डीजल इंजन, पेट्रोल इंजन ,टरबाइन ,बिजली की मात्रा आदि।

Calipers

सेक्शन हैड या स्टेटिक हैड क्या है? What is section head or static head?

पंप की केंद्र लाइन से लेकर सक्शन टैंक में तरल द्रव्य की लेबल के बीच की लंबवत दूरी को सक्शन हेड और स्टैटिक हेड कहते हैं।

डिस्चार्ज हैड या स्टैटिक डिस्चार्ज हेड क्या है? What is discharge head or static discharge head?

पंप की केंद्र लाइन से लेकर डिस्चार्ज टैंक में तरल द्रव्य की लेवल या स्तह के बीच की लंबवत दूरी को डिस्चार्ज हेड या स्टैटिक डिस्चार्ज हैड कहते हैं।
Surface plate

टोटल हेड क्या है What is total head?

Suction tank में तरल द्रव्य की लेवल से लेकर डिस्चार्ज टैंक में तरल द्रव्य की लेबल के बीच की लंबवत दूरी व घर्षण द्वारा हानियों के योग को स्टैटिक हैड या टोटल हेड कहते हैं।

प्राईमिंग क्या है? प्राईमिंग कैसे की जाती है what is priming and method of priming

पंप केसिंग तथा सक्शन सिस्टम में से उपस्थित हवा को बाहर निकालने की प्रक्रिया को प्राईमिंग कहते हैं।
प्राईमिंग के मेथड: तरल द्रव या भरकर के ट्रेनिंग करना
Vacuum pump के द्वारा प्राईमिंग करना।
फुटबॉल व द्वारा ट्रेनिंग करना।
पंप का सेल्फ प्राईमिंग होना।

Combination set, protector

प्राईमिंग कैसे की जाती है method of priming

  1. तरल द्रव्य द्वारा प्राईमिंग करना:- तरल द्रव्य को पंप केसिंग तथा सक्शन पाइप में उस समय तक करते हैं जब तक पंप के अंदर तथा सक्शन  सिस्टम के उपस्थित हवा भी भरी हुई है वह एयर पुली से बाहर निकल जाए हवा बाहर से केंद्र के बाद तरल द्रव्य वहां से स्मूथ रूप से बाहर निकलना शुरू ना हो।
  2. वेक्यूम पंप द्वारा प्राईमिंग करना:- इस प्रकार की सक्शन पाइप में वेक्यूम पंप के द्वारा सक्शन पाइप व के सींग के बीच से हवा को बाहर निकालना चाहिए।
  3. फुटबॉलब द्वारा प्राईमिंग करना:- फुटबॉल सक्शन पाइप के मुंह के ऊपर फिट किया जाता है जब पंप को बंद कर दिया जाता है तो फुटबॉल फ्लैप अपने स्थान पर बैठ जाती है और तरल द्रव्य के बैकफ्लो को रोक देती है और सक्शन पाइप तथा पंप केसिंग के बीच में तरल द्रव्य भरा हुआ रह जाता है और हवा अंदर नहीं आ सकती इस प्रकार के कार्य के लिए फुटबॉलब को फिट किया जाता है जिसे बार-बार प्राईमिंग की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  4. पंप का सेल्फ प्राईमिंग होना:- इस प्रकार के पंप को जब फिट किया जाता है तो उसी समय है उसे प्राईमिंग की जाती है बार-बार प्राईमिंग की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि यह पंप पानी को पूरी तरह से बाहर डिस्चार्ज नहीं करता जब पंप को बंद किया जाता है तब यह पंप अपने अंदर तरल द्रव्य को छोड़ देता है द्रव्य होने के कारण हवा अंदर नहीं आती और प्राईमिंग की आवश्यकता नहीं पड़ती इसलिए इस प्रकार के पंप को सेल्फ प्राईमिंग पंप कहते हैं।
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Thursday, December 6, 2018

Pumps

पंप का परिचय (Introduction of pump)   पंप के प्रकार  (types of pump)                    पंप के उद्देश्य (motive of pump )               पंप के कार्य (working of pump)


पंप का प्रयोग कारखानों में बहुत ही महत्वपूर्ण है पंप से विभिन्न विभिन्न प्रकार के तरल द्रव्य को दबाव के अंदर पहुंचाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है पंप का प्रयोग निम्नलिखित जगह पर किया जाता है पावर प्लांट ,केमिकल इंडस्ट्री एंड ऑयल वेल एंड वाटर सप्लाई ।पंप का प्रयोग अलग-अलग जगहों पर डिस्चार्ज कर के तरल द्रव्य को बड़े हुए दबाव के अंदर पहुंचाने के लिए किया जाता है तथा विभिन्न स्थानों से द्रव्य को को उठाने के लिए किया जाता है।

Centrifugal pump

पंप क्या हैWhat is pump ?or पंप की परिभाषा definition of pump:-

पंप वह साधन है जो कि तरल द्रव्य को विभिन्न विभिन्न ऊंचाइयों तक बढ़े हुए दबाव के अंदर पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होता है।
                        या     Or
पंप एक यांत्रिक साधन है जो एक पाइपलाइन सिस्टम में फिट किया जाता है तो यह किसी बाहरी स्त्रोत से ली हुई ऊर्जा से अपने अंदर रहने वाले द्रव्य को दबाव के अंदर स्थानांतरित करता है उसे पंप कहते हैं।

पंप के कार्य working of pumps :- 
  1. तरल द्रव्य को उठाना।
  2.  तरल द्रव्य को सर्कुलेट करना।
  3.  तरल द्रव्य का दबाव उठाना ।
  4. तरल  द्रव्य को गतिज ऊर्जा देना।
  5.  तरल द्रव्य को फेंकना।
पंप का वर्गीकरण classification of pumps
पंप का वर्गीकरण डिजाइन के अनुसार दो प्रकार से होता है
1. Dynamic pump 
2. displacement pump

1. Dynamic pump:- 
                                  डायनामिक पंप वे पंप होते हैं जिसमें की तरल पदार्थ की गति बढ़ाने के लिए लगातार ऊर्जा दी जाती है जैसे सेंट्रीफ्यूगल पंप।
2. Displacement pump :-
                                    Displacement pump वह पंप होते हैं जिसमें की तरल द्रव्य को उठाने के लिए कभी-कभी ऊर्जा दी जाती है जैसे रेसिप्रोकेटिंग पंप।

पंप के उद्देश्य main motive of pumps

पंप की आवश्यकता को निम्नलिखित परिस्थितियों में सप्लाई करने के लिए पड़ती है:-
  1. जहां तरल द्रव्य चाहिए वहां पर ऊंचा स्थान होने के कारण पंप की आवश्यकता पड़ती है।
  2. जहां पर सप्लाई या सिस्टम में दबाव की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है वहां पर पंप लगाए जाते हैं।
  3. जिस स्थान पर तरल द्रव्य की लेवल को एक जगह से दूसरी जगह तक उठाया जाता है।
  4. गांव और शहरों में पीने का पानी, सिंचाई का पानी ले जाने के लिए हवाई जहाज समुद्री जहाज में विभिन्न उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकार के पंपों को बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है।

पंप के प्रकार types of pump

पंपू के प्रकार प्रयोग के अनुसार अलग-अलग जगहों पर किए जाते हैं जो कि निम्नलिखित प्रकार से है:-
  1. Centrifugal pump 
  2. submersible pump
  3.  gear pump
  4.  reciprocating pump
  5.  screw pump 
  6. piston pump 
  7. helical pump 
  8. air lift pump 
  9. propeller pump 
  10. defreshial pump 
  11. jet pump 
  12. lov rotor pump 
  13. hand pump 
  14. turbine pump 
  15. hydrum pump
  16.  gas pump 
  17. vane pump 
  18. single and double acting pump
  19.  special pump etc..



Tuesday, December 4, 2018

Bearing

वीयरिंग का परिचय Introduction of Bearing वीयरींग के प्रकार Types of Bearing  अच्छे वीयरींग की विशेषता Quality of good bearing वीयरींग फिट करना Method of Fitting वीयरींग लुब्रिकेंट Bearing Lubricant सुरक्षा सावधानियां Precautions

वर्कशॉप में पावर को परेशीत या ट्रासमीट करने के लिए मुख्य माध्यम शाफ्ट है। शाफ्ट के ऊपर ही कार्य के अनुसार पुली ,गियर ,कपलिंग और कैम आदि को फिट करके पावर को ट्रांसमीट कर दिया जाता है शाफ्ट को प्रयोग में लाते समय जिस माध्यम के द्वारा इसे पकड़ा जाता है या सहारा दिया जाता है उसे बियरिंग कहते हैं अतः मशीन या किसी उपकरण के घूमते हुए भाग को सहारा देने की अवस्था को बियरिंग कहते हैं इनके उपयोग से शाफ्ट एवं अन्य उपकरणों के घूमने वाले भाग सुगमता से स्वतंत्रता पूर्वक घूमते हैं बियरिंग के मुख्य उपयोग निम्न लिखित है:-

  1. शाफ्ट को सहारा देना।
  2. शाफ्ट को पकड़ना और गाइड करना ।
  3. गति के समय शाफ्ट की रगड़ से उत्पन्न हुई गर्मी को कम करना।
  4. स्मूथ एवं स्वतंत्र गति देते हुए पावर की बचत करना।

अच्छी बियरिंग की विशेषता quality of good bearing

  1. शाफ्ट के लिए आधार देने योग्य होनी चाहिए।
  2. घर्षण को कम करने वाली होनी चाहिए।
  3. शाफ्ट को सही स्थिति में है रखते हुए भार के विपरीत करने वाली होनी चाहिए।
  4. गति अधिक होने पर पार्ट को स्मूथ से घुमाने वाली होनी चाहिए।
  5. झटके व कंपन आदि को सहन करने वाली होनी चाहिए।
  6. अधिक गति पर घूमते हुए कम पावर वीयर करने वाली होनी चाहिए।
  7. कार्य की गति के लिए अवरोध ना करने वाली होनी चाहिए।

वीयरींग के प्रकार types of bearing

बियरिंग आकार, भार तथा डिजाइन के अनुसार कई प्रकार की होती है जिनमें मुख्यतः निम्न लिखित होते हैं:-
  1. आकार के अनुसार:- आकार केेे अनुसार वीयरींग को दो भागों में बांटा जाता है     1. चपटी वीयरींग ।                   2.   बेलनाकार वीयरींग
  2. भार के अनुसार:-            1.  अभिव्यक्त वीयरींग ।             2. पाद वीयरींग                3.  प्रणोद वीयरींग
  3. घर्षण के अनुसार:- घर्षण के अनुसार बियरिंग को दो भागों में बांटा जाता है
    1.घर्षण वीयरींग
    2. घर्षण रोधी वीयरींग 

वीयरींग किस धातु से बनाए जाते हैं

घर्षण bearing प्राय nonferrous धातु से बनाया जाता है जिनमें मुख्यतः निम्न लिखित है:-
पीतल, गन मेटल, कांसा, फास्फर, मैगनिज, श्वेत धातू, वेबिट धातु।

वियरींग को फिट करने की विधि 

  1. बियरिंग फिट करने से पहले शाफ्ट के व्यास में अलाउंस रखना चाहिए।
  2. छोटी माप वाली बियरिंग को शाफ्ट पर ड्राइव फिट करने के बाद फिर हाउसिंग को फोरस फिट करें।
  3. बड़ी माप वाली बियरिंग को सबसे पहले हाउसिंग में फिट करके फिर शाफ्ट के अलाइनमेंट में रखना चाहिए।
  4. bearing को फिट करते समय मुलायम हैमर का प्रयोग या रबड़ हैमर का प्रयोग करना चाहिए।
  5. लंबी और पतली शाफ्ट में तीन बियरिंग लगाएं बड़े साइज की शाफ्ट में दो बीयरींग  लगाने चाहिए।
  6. स्पीड व भार के अनुसार बेयरींग  का चुनाव करना चाहिए।

बियरिंग का लुब्रिकेशन lubrication of bearing

lubrication वीयरींग के भार व स्पीड पर निर्भर करते हैं अर्थात अधिक स्पीड पर मोटर लुब्रिकेंट जैसे ग्रीस और कम स्पीड पर पहला लुब्रिकेंट मुवलेल  का प्रयोग करते हैं लाभ यह है कि इस तरह के लुब्रिकेंट होने से घर्षण कम उत्पन्न होती है तथा गति में बढ़ावा  मिलता है तथा भाग आपस में कम घीसते हैं प्राय बियरिंग में ऑयल रिंग सिस्टम (oil ring system)तथा ग्रुव फोरस सिस्टम(grove force system) प्रयोग किए जाते हैं।

बियरिंग को लगाते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. जहां बियरिंग फिट करनी हो वह स्थान लेवल में जांच लेना चाहिए।
  2. बियरिंग को फिट करते समय उचित अलाइनमेंट व  परीशुद्धता से जांच लेनी चाहिए।
  3. बियरिंग का लुब्रिकेंट समय समय पर जांचते रहना चाहिए।
  4. बियरिंग को फिट करते समय नरम धातु के हैमर का प्रयोग करना चाहिए।
  5. बियरिंग को फिट करने से पहले शाफ्ट व हाउसिंग के नाप की जांच करनी चाहिए।

Sunday, December 2, 2018

विद्युत का संचालन power transmission

विद्युत संचारण का परिचय Introduction of power transmission

लगभग सभी कारखानों  में चाहे वह बड़े हो या छोटे मशीन प्रयोग की जाती है इन्हें चलाने के लिए पावर की आवश्यकता होती है मशीन को चलाने अर्थात उन्हें वांछित गति देने के लिए पावर  अलग अलग ढंग से दिया जाता है और मशीन या उसके भाग के चलाने के ढंग चाहे जैसे भी हो परंतु प्रारंभ में पावर घुरण ऊर्जा रोटरीन उर्जा के रूप में ही दी जाती है मशीन को यह प्रारंभिक पावर विद्युत मोटर से मिलती है इस मोटर का यह कार्य होता है कि विद्युत ऊर्जा को प्राप्त करके उसे घुरण ऊर्जा में बदल देती है जो कि घीर्णीयों व पट्टा चालन चेन चालन द्वारा मशीन तक प्रेषित कर दी जाती है।

संचारण के साधन

पूरी पट्टा ,रही,चेन ड्राइव,गीयर ड्राइव, तथा  घर्षण चालन,क्लच चालन आदि।

You can read my another blogs:-
Micrometers
Surface plate

Pulley Bolt rope and chain drive:- कारखानों में पावर या  घूर्णन गति रोटरी मूवमेंट का एक  शाफट दूसरे  शाफट तक संचालन रस्सी ,पट्टटा,  चेन या गीयर द्वारा किया जाता है पट्टा,रस्सी , चेन या गियर एक शाफट को दूसरे शाफट से जोड़ते हैं अतः इन्हेंं संयोजक  कहतेे हैं।रस्सी ,पट्टा द्वाार  पावर का  संचााााणर संयोजक व पुली के मध्य घर्ष्ष्ष्ष्षण के कारण होता है।
विद्युत या गति उपलब्ध होने वाले स्थान पर अलग-अलग तरह से चांदन के लिए एक अलग अलग तरीके हैं जिसमें विद्युत को संचालन किया जाता है। चालन दो प्रकार के होते हैं
1 सीधा पट्टा चालन
2 तिरछा पट्टा चालन

Vernier Calipers

Types of Belts:- 
  1. चमड़े की बेल्ट 
  2. कपड़े की बेल्ट
  3.  रबड़ का पट्टा 
  4. नायलॉन पट्टा 
  5. V पट्टा
पुली के प्रकार:- 
  • ठोस पुली
  •  स्प्लिट पुली
  • step Pulley 
  • V groove Pulley
  •  Chian or rope pulley
  •  loose and fast pulley
  • Jack pulley

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