Wednesday, November 21, 2018

Pliers

प्लायर क्या है  What is Pleirs ? प्लायर कैसे कार्य करता है। How it work and और प्लायर के प्रकार types of pliers

प्लास वह  औजार है जो छोटे-छोटे जॉब या वस्तु को पकड़ने, काटने एवं मोड़ने के काम आता है यह मुख्यतः माइल्ड स्टील से बनाया जाता है हत्था, रिबेट एवं जबड़ा इसके मुख्य भाग होते हैं इसके जबड़े कठोर एवं टैंपर  किए होते हैं प्लायर का साइज इसकी लंबाई से प्रकट किया जाता है काम एवं आकार के अनुसार प्लास कई प्रकार के होते हैं।

Types of Pleirs

What is file

How is the work with try square

प्लास के प्रकार Types Typ of Pleirs

  1. Side cutting Pleirs:- इसे चपटी नाक प्लास या लाइनमैन का साइड कटिंग  प्लायर भी कहते हैं इसके दो     जबड़ों के बीच में कटिंग ऐज बनी होती है जिससे तार को काटा जा सकता है इससे पहले तार को पकड़ा मोड़ा व काटा जा सकता है बिजली विभाग में प्रयोग होने वाले प्लास के हाथे पर रबड़ का कवर चढ़ा रहता है लाइनमैन इसका प्रयोग करते हैं।
  2. Long nose Pliers:- इस प्रकार के प्लास के जबड़े लंबे और आगे नुकीले होते हैं इसका प्रयोग प्राय उन तंग स्थानों में छोटे हिस्सों को पकड़ने निकालने व फिट करने के लिए किया जाता है जहां पर दूसरे प्लायर का जबड़ा घुम नहीं सकता बिजली एवं रेडियो मेकेनिक  इसे अधिक प्रयोग करते हैं इसके जबड़ों में भी करतन धार होती है जिससे तार को काटा जा सकता है।
  3. विकरणीय  प्रवास Diagonal Pleirs:- इस प्रकार के प्लायर का प्रयोग प्राय बिजली के मैकेनिक द्वारा बिजली के तारों को काटने और सिलने के लिए किया जाता है इसमें पकड़ने वाला जबड़ा नहीं होता है इसे वायर कटिंग प्लायर भी कहते हैं।
  4. Slip Joint Pleirs:- इस प्रकार प्लास के जबड़े के स्लीप ज्वाइंड की सहायता से अधिक चौड़ाई में खोला जा सकता है और एक या एक से अधिक साइज के लिए सेट कर के छोटे और बड़े साइज के कार्य को पकड़ा जा सकता है। इसके जबड़ों में कर्तनधार भी बनी होती है जिसमें तार को काटा जा सकता है इस प्लायर का मुख्  चपटा होता है और इसका प्रयोग चपटे जॉब को पकड़ने के लिए किया जाता है इस के जबड़े की स्तह  बीच में गोल आकार की होती है जिस पर दांत बने होते हैं अतः हिस्से में गोल जॉब को मजबूती से पकड़ा जा सकता है।
  5. Pincers Pleirs :- इसके दोनों जौ गोलाई में थोड़े से अंदर की ओर मुड़े होते हैं इनकी एक टांग पीछे से चपटी होती है और खांचा रखती है जिसमें कील के एक सिरे को ऊपर उठाते हैं इसका प्रयोग लकड़ी से कील निकालने के लिए किया जाता है इसे जंबूर भी कहते हैं।
  6. Multi Group Pleirs :- इस प्लायर को पानी के बीच का प्रदार्थ भी कहते हैं जिसे 0 से 50 एमएम के बीच 7 साइज में सेट कर सकते हैं।

Why want any job tolerance

प्लायर का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां precautions to be used during the work with Pleirs

  1. प्लायर को कभी भी स्पेनर या रीन्च की तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  2. तार को काटते समय तार का शीरा नीचे की ओर होना चाहिए सिरा अपनी ओर होने से तार का कटा भाग कारीगर को चोट पहुंचा सकता है।
  3. कार्य के अनुसार प्लास का प्रयोग करना चाहिए अन्यथा इसके जौ खराब हो सकते हैं।
  4. प्लायर का प्रयोग कभी भी हैमर की जगह नहीं करना चाहिए।
  5. बिजली का कार्य करते समय बिना इंसुलेशन के प्लायर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  6. कार्य करते समय प्लायर के ऊपर तेल, ग्रीस आदि नहीं लगी होनी चाहिए नहीं तो स्लीप करके चोट पहुंच सकती है।

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