Thursday, November 15, 2018

Interchangeability (limit,fits, tollerance)

अतंरविमयता क्या है?

What is interchangeability?

लिमीट क्या है what is limit? टाॅलरेन्स क्या है what is tolerance? और फिट्ज करता है what is fits?


कोई भी करण और मशीन बनाने के लिए भिन्न भिन्न आकार के पुर्जों की आवश्यकता पड़ती है जिन्हें विभिन्न प्रकार की विधियों द्वारा बनाकर एवं आपस में जोड़कर उपकरण या मशीन का रूप दिया जाता है इन पार्टस को जोड़ने वाली विधि को assembling कहते हैं परंतु कभी-कभी ये पुर्जे आपस में फिट नहीं होते जिससे उन्हें दोबारा मशीन करने या रेती  लगाने की आवश्यकता पड़ती है जिसके फलस्वरूप पुर्जों को असेंबल (assemble) करने में अधिक समय लगता है इसलिए यह अति आवश्यक है कि प्रत्येक पूरजो को अधिक परी शुद्धता से बनाया जाए ताकि जब कभी मशीन के किसी खराब या घीसे पार्ट को बदलना पड़े तो उसके स्थान पर दूसरा प्रयोग किया जाने वाला किसी कंपनी से मंगवाया जाए तो नए पार्ट बिना किसी मशीनिंग  क्रिया के आसानी से फिट किए जा सके और मशीन पहले की तरह कार्य  करने लगे। पार्ट के फिट होने के इस गुण को अंतरवीमयता कहते हैं  टूटे या खराब पूर्जे के स्थान पर नए पूरजो की अदला-बदली को पार्ट कि आपसी बदल कहा जाता है।

अंर्तविमयता क्या है?(what is interchangeability?)

जब कभी एक ही तरह के पार्ट अधिक मात्रा में बनाने हो  जो कि बिल्कुल एक ही साइज कितना आकार और परिशुद्ध था में एक दूसरे की जगह पर फिट हो जाए तो उसे अंर्तविमयता कहते हैं। इसके बहुत ज्यादा लाभ है
  1. असेंबलिंग में कम समय लगता है।
  2. इसमें rejection कम होता है।
  3. उत्पादन औरउपयोग के क्षेत्र में बढ़ोतरी होती है।
  4. घीसे पार्ट या टूटे मशीनी पार्ट को बदलने मैं सुविधा होती है क्योंकि बाजार में मिलने वाले स्पेयर पार्ट मूल पूरजो के विवरण के अनुसार बने होते हैं।
        अंतरविमयत्ता प्राप्त करने के लिए पार्ट पर कुछ निश्चित सीमा निर्धारित की जाती है यह सीमा पार्ट की कार्य पद्धति तथा फिट पर निर्भर करती है इसलिए कारीगर को सदा सीमा पद्धति में ही पार्ट को बनाना चाहिए।
सीमा पध्दति के लाभ निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:-
  • पार्ट का उत्पादन अधिक मात्रा में हो सकता है।
  • इससे परिशुद्ध का उत्पादन प्राप्त होता है।
  •  Rejection कम होता है।
  • interchangeability parts बनते है।
  • Assembling में कम समय लगता है।
  • वांछित फिट प्राप्त कर सकते हैं।

लिमीट क्या है? What is limit?

    वर्कशॉप में जब पार्ट्स का उत्पादन किया जाता है तो कारीगर को पारट के बेसिक साइज को थोड़ा बड़ा या छोटा बनाने की छूट दी जाती है।इससे पारट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि कहीं कोई उपकरण है ऐसे होते हैं जिससे पारट को बिल्कुल परिशुद्धता साइज में नहीं बनाया जा सकता जैसे सूक्ष्म माफी औजार की गलती मशीन सेटिंग की गलती टूल की खराबी आदि के कारण पार्ट को बनाते समय साइज में कुछ अंतर आ सकता है इसके अतिरिक्त यदि पार्ट को सही परी शुद्धता माप में बना भी लिया जाए तो उसमें अधिक समय लगता है इसलिए पार्ट को बनाने के लिए सीमा निर्धारित कर दी जाती है कि पार्ट को बेसिक साइज में कितनी सीमा अधिक या कम साइज में बनाया जा सकता है उसे लिमिट कहते हैं जैसे किसी जॉब के साइज 50mm में +_    0.05 एम एम की छूट दे रखी है लिमिट निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

Tolerance Fit, limit shaft

1. High limit:- किसी भाग के basic size पर स्वीकृत अधिक  से अधिक जिस सीमा में साइज को बनाया जाता है उसे high limitकहते है।जैसे 25.00 mm size. पर High limit= 25.02mm .
2. Low limit:- किसी पार्ट के बेसिक साइज पर स्वीकृत कम से कम जिस सीमा में साइज को बनाया जा सकता है उसे low limit कहते हैं। जेसे : 25.00 mm पर low limit= 24.98 mm .
अतः part का साइज = 25 +- 0.02 mm 

टाॅलरेन्स क्या है? What  is Tolerance?

पार्ट के किसी साइज की हाई लिमिट और लो लिमिट के अन्तर को टाॅलरेस कहते हैं। tolerance के  कई लाभ है जैसे समय की बचत और उत्पादन बढ़ता है कम कुशल कारीगर से काम लिया जा सकता है उत्पादन की लागत कम होती है और पारट कम रद्द होते हैं टॉलरेंस प्रत्येक कार्ट पर अलग-अलग होती है जैसे: 25.00 mm size पर high limit size पर high limit=25.03 mm 
Low limit=24.98 mm 
अतः tolerance =25.03 - 24.98= 0.05 mm है।
Tolerance दो प्रकार से दी जाती है


  • Unilateral tolerance
  • Bilateral Tolerances
Hole Basis tolerance:- इस प्रणाली में है छेद का साइज स्थिर रखा जाता है और टॉलरेंस केवल शाफ्ट के साइज पर दी जाती है आजकल अधिकतर होल बेसिस प्रणाली अपनाई जाती है क्योंकि किसी भी स्टैंडर्ड साइज के छेद को आसानी से बनाया जा सकता है।
Shaft Basis tolerance:- इस प्रणाली में शाफ्ट का साइज स्थिर रखा जाता है और tolerance केवल छेद के साइज पर दी जाती है। यह प्रणाली होल बेसीज से कम अपनाई जाती है।
What is allowance?
 जब किसी निर्धारित फिट के अनुसार 2 पार्ट को बनाकर आपस में मिलाया जाता है तो इन दोनों पारट की मापों  में जानबूझकर जो अंतर रखा जाता है उसे अलाउंस Allowance कहते हैं अलाउंस का सम्बंध फिट होने वाले दोनों ही पार्ट से होता है ना की किसी एक पार्ट से किसी फीट के अनुसार अलाउंस धनात्मक या ऋणात्मक (+-) हो सकता है। Maximum Allowance and minimum Allowance

Limit,fits Allowance

दोनों के बीच में अन्तर Differen between Tolerance and Allowance?

  1. tolerance बेसिक साइज पर आधारित होती है जबकि Allowance Fit के प्रकार पर आधारित होती है।
  2. Tolerance एक ही जॉब के विभिन्न विभिन्न साइज पर अलगअलग हो सकती है जबकि Allowance दो matching पार्ट पर दिया जाता है।
  3. tolerance blueprint या drawing के आदेशानुसार रखी जाती है जबकि Allowance इच्छित fit प्राप्त करने के लिए जानबूझकर रखी जाती है।

फिट क्या है?  What is Fit?

किसी भी मशीन के अलग-अलग प्रकार के कई parts से असेंबल करके बनाया जाता है इसमें कुछ ऐसे विशेष पार्ट होते हैं जिनके साइज को सूक्षमता से बनाया जाता है और वह आपस में स्लाइड करते हैं या घूमते हैं इन असेंबल किए जाने वाले parts के बीच क्लीयरेंस की मात्रा से बनने वाले सम्बध को फिट कहते हैं इसे तीन ग्रुप में बांटा जाता है:-
  1. Clearance:- जब शाफ्ट सुराख के अंदर स्वतंत्र घूमे उनमें किसी किस्म की कोई रुकावट ना हो तो उसे क्लीयरेंस कहते हैं ताकि फिट होने के बाद कुछ क्लीयरेंस रनिंग और पुश आदि इस में आते हैं।
  2. Trasition Fit :- इसमें छेद और शाफ्ट के बीच में अलाउंस इतना रखा जाता है कि यह ना ही उसमें उतना अधिक क्लीयरेंस न अधिक इंटरफेरेंस रह सके इसमें पुश फिट आते हैं।
  3. Interfearance Fit :- इसमें छेद का साइज शाफ्ट के साइज से कम होता है इसमें पार्ट्स को हाथ के दबाव से स्लाइड कर सकते हैं इसमें  निम्नलिखित आते हैं:-        force Fit , Drawing Fit , Shrinkage Fit etc.

लिमीट और फिट की विभिन्न प्रणालियां :-

     वेसे तो दुनिया में limit और फिट्ज की बहुत प्रणालियां है परन्तु इनकी सबसे अधिक प्रचलित प्रणाली निम्नलिखित तीन ही है:-
  1. न्यूल प्रणाली:- Engineering Company ने संसार के बड़े बड़े कारखानों में विभिन्न प्रकार की फिट पर दिए जानेवाले tolerance के उपर विस्रीत खोज करने के बाद एक  तिहाई(1/3) दो 1/2,से 6 ब्यास के छेदों के ा लिए tolerance निश्चित की यह प्रणाली hole basis द्वारा जिसमें किसी प्रकार की फिटिंग प्राप्त करने के लिए व्यास व्यास को स्थिर रखा जाता है। परिशुद्धता  के आधार पर छेदों को  A और B श्रेणी में रखा जाता है। इस प्रणाली में force Fit,  ड्राइविंग fit, push fit, तथा रनिंग फिट आती है।
  2. British Standard :-  इस प्रणाली में 21 प्रकार के भिन्न-भिन्न फिट प्राप्त करने के लिए होल साइज एकतरफा और दो तरफा 16 ग्रेड में Tolerance दी जाती है यदि किसी छेद या shaft  में टॉलरेंस दी जाती है तो छेद या शाफ्ट के निशान के साथ Tolerance का नंबर भी लिया जाता है जैसे एच 7 और जी6 आदि ।
  3. भारतीय मानक पध्दति :- भारत में ब्रिटिश पध्दति के आधार  पर पहले यह पद्धति इन्चों inches में थी जिस समय  16 लिमीट और फिट की पद्धतियां थी जिन्हें ID 1 से आई डी 16 तक व्यक्त किया जाता है तथा मौलिक जिन्हे ब्रिटिश पद्धति के अनुसार व्यक्त किया जाता है।




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