Friday, November 30, 2018

Looking Device

लाॅकिंग डीवाइस क्या है What is the Loking Device? इनके कार्य और प्रकार 


Screw:- अस्थाई बंधन के लिए नट एवं बोल्ट की ही तरह से ही स्क्रु का भी प्रयोग किया जाता है इनके सिरे पर हेड बना होता है और शीर्ष की पूरी देह पर चूड़ियां कटी होती है पराया हेड में कटे खांचे  पेशकश के प्रयोग से इन्हें उपयोग में लाए जाते हैं ।8 सोकेट हैंड स्क्रु  के द्वारा प्रयोग में लेते हैं स्क्रू प्राय  माइल्ड स्टील के बनाए जाते हैं परंतु कार्य के अनुसार कार्बन स्टील, पीतल एवं एलुमिनियम के स्क्रू भी पाए जाते हैं लकड़ी के कार्य में प्रयोग किए जाने वाले स्क्रु को डूड स्क्रु (dood screw) तथा फेरस मेटल तथा नॉन फेरस मेटल धातु में प्रयोग किए जाने जाने वाले पेचों को मशीन स्क्रु कहते हैं ।मशीन स्क्रु के हैड और चूड़ी वाले लाभ के बीच में थोड़ी सी बोरिंग सरफेस रखे जाते हैं जिस पर चूड़ियां नहीं बनी होती। इनका व्यास चूड़ियों के मेजर व्यास से पिच डायमीटर से अधिक होता है ऐसे स्क्रु का प्रयोग प्राय मशीन के पार्ट का अस्थाई रूप से मिलाने के लिए किया जाता है कार्य के अनुसार यह कई प्रकार के खांचे द्वारा शीर्ष में पाए जाते हैं screw मुख्यत निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-

  1. Cap screw 
  2. colours screw 
  3. shoulder screw
  4.  set screw

बोल्ट Bolt 

यह एक गोल छेद का बना होता है जिसकी एक सिरे पर स्थाई शीर्ष वह दूसरे सिरे पर चूड़ियां कटी होती है जिन पर नट को कस सकते हैं हेड व चूड़ी वाले भाग को शंक कहते हैं यह मुख्यतः माइल्ड स्टील के बने होते हैं परंतु कुछ विशेष कार्य के लिए पीतल तांबे व हल्के लोहे के बने होते हैं इनका साइज चूड़ी वाले भाग के व्यास एवं हैड को छोड़कर शेष लंबाई से प्रकट कर लिया जाता है हैड के विचार से बोल्ट कई प्रकार के होते हैं जैसे hacksaw nut head bolt, square head bolt, round head bolt, T head bolt, counter sunk bolt, hook bolt, I bolt. Etc.

Foundation Bolt

उपयोग किए जाने वाले कुछ और बोल्ट होते हैं जिन्हें फाउंडेशन बोल्ट कहते हैं इनके द्वारा मशीन को भूमि तान पर फिक्स किया जाता है यह फाउंडेशन बोल्ट कई प्रकार के होते हैं जैसे आई फाउंडेशन बोल्ट ,रेंज फाउंडेशन बोल्ट ,काउंटर बोल्ट।

नट क्या है What is Nut? नट के प्रकार Types of nuts :- 

यह चूड़ीदार छेद वाला धातुु का एक टुकड़ा होता हैै जिससे Bolt या stud चूड़ीदार वाले सिरे सेे कसा या चढ़ाया जाता है।नट और बोल्ट की सहायता से दो भागों को जोड़़ दिया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर बड़ी आसानी से अलग कर दिया जाता है। अलग करते समय न तो जुड़े हुए पार्ट खराब होते हैं और न ही नट व बोल्ट बना वट के अनुसार नट केइ प्रकार के होते हैं जैसे - haction nut, square nut,  cup nut, domo nut, castle nut, ring nut, big nut,.

What is lock nut ? Or check nut

इसका इस्तेमाल हमेशा साधारण स्टैंडर्ड नट के साथ किया जाता है स्टैंडर्ड नट को कस के ऊपर से लाॅक  नट कस देने पर स्टैंडर्ड नट ढीला नहीं होता है यह चेक नट भी हैक्सा गोल्ड नट ही होता है जिसकी ऊपर नीचे के दोनों साइड चैंफर  की हुई होती है। सर्वप्रथम standard नट को बोल्ट पर जितना टाइट हो सकता है उतना टाईट कर दिया जाता है  फिर चेक नट को उसके ऊपर से कसा जाता है कि चैक नट का निचला भाग स्टैंडर्ड नेट के ऊपरी भाग से सट जाए अंत में चेक नेट को एक स्पिनर से पकड़ कर दूसरे स्पिनर से स्टैंडर्ड नट को पीछे की ओर धक्का दिया जाता है इस तरह दोनों नट एक दूसरे के लिए या बोल्ट के लिए लॉक हो जाते हैं यह सटेन्डर नट को ढीला नहीं होने देते चेक नेट को नीचे एवं स्टैंडर्ड को ऊपर भी लगाया जा सकता है।
Castle nut:- नट के ऊपर कॉलर में स्लॉट्स खांंेच कटे होते हैंं अतः स्लॉटेड नट की अपेक्षा यह मजबूत होता हैैै ब्लॉकिंग अरेंजमेंटग के इसका  प्रयोग भी स्लाइटेड के समान ही समान ही पीन के साथ किया जाता है।
Split Pin :- यह अर्ध गोलाकााार क्रॉस सेक्शन के स्टील  के तार को मुड़ कर बनाई जाती है यह बोल्ट में इस प्रकार के छेद करके फिट की जाती हैै कि नट की उपरी  सतह  पर  इस तरह से सटी रे। इस तरह यह नेट को घूमने और ढीलाा होने नहीं देेीत।
Spring washer:-  spring washer या lock washer लगाकर नट को कस देने पर भी वह ढीला नहीं होता है।
स्टड (stud) :- यह गोलाकार धातु के 30 से बनाए जाते हैं जिनके दोनों सिरों पर चूड़ियां बनी होती है और बीच का भाग कार्य के लिए किया जाता है बीच का भाग गोलिया चकोर होता है। stud का  प्रयोग प्राय टेंम्परेरी  Fasting करने के लिए किया जाता है।
स्टड दो प्रकार के होते हैं:-

  1.  प्लेन स्टड :- यह stud  गोलाकार  धातु की छड से बनाया जाता है जिसके दोनों सिरों पर चूड़ियां बनाई जाती है और बीच का भाग प्लेन रखा जाता है इसका प्रयोग प्राय साधारण कार्य के लिए किया जाता है।
  2. सोडर स्टड :- यह प्लेन स्टड की तरह होता है अंतर केवल इतना होता है कि इसमें एक कंघा बना होता है इसके दांतों पर पर चुडीयां बनी होती है इसी कारण यह स्टड पार्ट की सरफेस पर अच्छी तरह से बैठ जाता है।

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Wednesday, November 28, 2018

Spanner

स्पैनर क्या है What is Spannar? इसके करता कार्य है what is its work? And स्पैनर के प्रकार types of spanners :-

दो या दो से अधिक बालों को अस्थाई रूप से जोड़ने के लिए हराया नट और बोल्ट का प्रयोग किया जाता है जो ट्यून इन नट और बोल्ट कसने या खोलने के लिए प्रयोग किया जाता है उसे स्पिनर या रिंच कहते हैं आम भाषा में इन्हें पन्ना या चाबी भी कहते हैं यह कार्बन स्टील के कोर्स करके बनाए जाते हैं इन्हें हार्ड एवं टेंपर कर लिया जाता है नटवा बोल्ट के आकार व साइज विभिन्न विभिन्न होने के कारण स्पिनर या रेंज कई प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित प्रकार के हैं:-
https://www.bloggeryash.co.in/2018/10/calipers.html
  1. Spanner set (single ended spanner double ended spanner)
  2. close ended spanner 
  3. ring spanner
  4.  adjustable spanner
  5.  monkey spanner
  6.  wrench lever jaw
  7.  pin hook spanner 
  8. adjustable hook spanner 
  9. adjustable pin phase spanner 
  10.  T stock wrench
  11.  offset socket spanner
  12.  ratchet wrench 
  13. combination spanner 
  14. align key
  15.  tool post spaannr
  16.  tubler box spanner
  17. Pipe wrench spanner
  18. Chain wrench spanner
  19. Strap wrench spanner

limitfits-tollerance


कार्य करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां Precautions to be used with working

  1. नट और बोल्ट के शीर्ष पर रेंच्च या स्पेनर ठीक से फिट होना चाहिए।
  2. कार्य करते समय रेंच्च के फिसलने के कारण चोट भी लग सकती है।
  3. स्पेनर या रेंच्च पर आवश्यकता से अधिक ताकत नहीं लगानी चाहिए।
  4.  अधिक कसे हुए नट व बोल्ट को रेंच्च का झटका देकर खोला जा सकता है अधिक लीवर क्षमता प्राप्त करने के लिए हत्थे में पाइप लगा दिया जाता है इससे कम बल लगाने से ही काम हो जाता है ‌।
  5. रिच्च  का प्रयोग कभी भी हैमर की तरह से नहीं करना चाहिए।
  6. समयोजक स्पिनर का प्रयोग करते समय समायोजन जबड़े को उस तरफ रखना चाहिए कि धरबल  लगाया जा रहा हो।
  7.  समायोजक स्पैनर तथा बंदर रेंच को इस प्रकार से सेट करना चाहिए कि नट एंड बोल्ट के शीर्ष पर ठीक से फिट हो सके।
  8. नट व बोल्ट को खोलते समय यदि स्पैनर बड़े साइज का हो तो कभी भी हेक्सा ब्लेड के टुकड़े या दूसरी पति की पैकिंग नहीं करनी चाहिए।
  9. जंग लगे हुए पुराने नट बोल्ट को खोलने से पहले इन्हें मिट्टी के तेल पर इन्हें तर कर लेना चाहिए।
  10.  स्पैनर के मुंह और हत्थे पर चिकनाई नहीं लगनी चाहिए।


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Monday, November 26, 2018

Screw driver

पेचकस क्या है What is Screw driver? और यह केसे कार्य करता है ।And how to work with it. स्क्रु ड्राइवर के प्रकार  Types of screw driver.

वर्कशॉप में कार्य करते समय कारीगर को कई प्रकार के जॉब बनाने पड़ते हैं कई ऐसे कार्य होते हैं जिनको विभिन्न विभिन्न साधनों द्वारा आपस में जोड़ा जाता है जैसे कभी कभी किसी नट बोल्ट को कसना या ढीला करना पड़ता है तो कभी किसी पेच के कसने वह खोलने की आवश्यकता पड़ती है इस प्रकार जीस टूल  से किसी पेच को कसा या ढीला किया जाता है उसे पेचकस या स्क्रुड्राइवर कहते हैं।
Screw drivers
https://www.bloggeryash.co.in/p/iti-students.html

 हत्था  सेंक तथा ब्लेड इसके मुख्य भाग होते हैं इसका साइज इसकी लंबाई से प्रकट किया जाता है वह कार्य के अनुसार 75mm से 300mm तथा और भी अधिक साइज में मिलते हैं स्क्रू ड्राइवर की सेंक हाई कार्बन स्टील की बनी होती है तथा इसके ब्लेड को हारड एवं टेंपर कर लिया जाता है ऑफसेट स्क्रू ड्राइवर को छोड़कर प्राय स्क्रू ड्राइवर के हत्थे कठोर लकड़ी या प्लास्टिक के बनाए जाते हैं।

स्क्रु ड्राइवर के प्रकार  (Types of screw driver )

  1. मानक पेचकस:- इस प्रकार का स्क्रू ड्राइवर गोलाकार के छड से चपटा करके बनाया जाता है व इसकी दूसरी सिरे पर आवश्यकतानुसार हत्था फिट किया जाता है इसका प्रयोग सामान्यतः सभी कार्यों के लिए किया जाता है यह विभिन्न साइज का होता है इसका ब्लेड स्क्रू के स्लाट में ठीक से बैठना चाहिए यह भी दो प्रकार के होते हैं हल्के एवं भारी कार्यों के अनुसार भारी कार्य स्क्रुड्राइवर की सेंक प्राय मोटे  चकोर के प्रकार की होती है जिसे आगे से चपटा कर दिया जाता है यह पेचकश दूसरे प्रकार के पेचकसों की  अपेक्षा बड़े साइज का होता है इसका प्रयोग बड़े कार्यों के लिए किया जाता है।
  2. Phillips screw driver:- इस प्रकार के स्क्रू ड्राइवर के बुलेट पर चार नालियां कटी होती है जोकि फिलीप वाले स्क्रु साइज के अनुसार फिट हो जाता है इसलिए स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग प्रायर फिलिप्स हेड वाले स्क्रु को खोलने कसने के लिए किया जाता है इनका साइज संख्या से बताया जाता है जैसे 0,1,1 1/2,2,3 है।
  3. off set screw driver:- दोनों सिरों के एक दूसरे एक  विपरीत के कोण पर मोड़ कर बनाया जाता है इसका प्रयोग तंग स्थानों या अन्य स्थानों में किया जाता है जहां मानक या स्क्रुड्राइवर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  4. ratchet screwdriver :- इसमें रैचेट गति करता है एक बटन के द्वारा जिसे विस्थापन कहते हैं इसे इसकी चाल को बदला जा सकता है विस्थापितों को ऊपर खींच लेने पर बुलेट सिर्फ बाएं तरफ घूम सकता है इसका प्रयोग स्क्रु को जल्दी खोलने तथा चढ़ाने के लिए किया जाता है।
  5. managing screw driver:- यह पेचकश पॉकेट पेचकश भी कहलाता है।
  6. watch size screw driver:- ये स्क्रु ड्राइवर घड़ियां और दूसरे इंस्ट्रूमेंट की मरम्मत करने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं इनका साइज जीरो नंबर से पांच नंबर होता है 0 बहुत कम तथा 5 सबसे मोटा होता है।

स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. screwdriver  की नोंक की चौड़ाई स्क्रु हैड में कटे खांचे से थोड़ी सी कम होनी चाहिए।
  2. नोंक को कभी भी चाकू की तरह तेज धार वाले ग्रैंड नहीं करनी चाहिए कि से सीधा टेपर ग्राइंड करना चाहिए।
  3. टूटे व फटे हुए हत्थे तथा मुड़े हुए सेंक के स्क्रू ड्राइवर को प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  4. screwdriver पर कभी भी हैमर की चोट नहीं मारनी चाहिए।
  5. किसी भी जॉब को हाथ में पकड़ कर उसमें लगे स्क्रू को स्क्रुड्राइवर से खोलना या कसना नहीं चाहिए क्योंकि स्क्रुड्राइवर फिसलकर हाथों में लग सकता है।
  6. स्क्रुड्राइवर का इस्तेमाल कभी भी छीनी या पंच की तरह नहीं करना चाहिए।
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Wednesday, November 21, 2018

Pliers

प्लायर क्या है  What is Pleirs ? प्लायर कैसे कार्य करता है। How it work and और प्लायर के प्रकार types of pliers

प्लास वह  औजार है जो छोटे-छोटे जॉब या वस्तु को पकड़ने, काटने एवं मोड़ने के काम आता है यह मुख्यतः माइल्ड स्टील से बनाया जाता है हत्था, रिबेट एवं जबड़ा इसके मुख्य भाग होते हैं इसके जबड़े कठोर एवं टैंपर  किए होते हैं प्लायर का साइज इसकी लंबाई से प्रकट किया जाता है काम एवं आकार के अनुसार प्लास कई प्रकार के होते हैं।

Types of Pleirs

What is file

How is the work with try square

प्लास के प्रकार Types Typ of Pleirs

  1. Side cutting Pleirs:- इसे चपटी नाक प्लास या लाइनमैन का साइड कटिंग  प्लायर भी कहते हैं इसके दो     जबड़ों के बीच में कटिंग ऐज बनी होती है जिससे तार को काटा जा सकता है इससे पहले तार को पकड़ा मोड़ा व काटा जा सकता है बिजली विभाग में प्रयोग होने वाले प्लास के हाथे पर रबड़ का कवर चढ़ा रहता है लाइनमैन इसका प्रयोग करते हैं।
  2. Long nose Pliers:- इस प्रकार के प्लास के जबड़े लंबे और आगे नुकीले होते हैं इसका प्रयोग प्राय उन तंग स्थानों में छोटे हिस्सों को पकड़ने निकालने व फिट करने के लिए किया जाता है जहां पर दूसरे प्लायर का जबड़ा घुम नहीं सकता बिजली एवं रेडियो मेकेनिक  इसे अधिक प्रयोग करते हैं इसके जबड़ों में भी करतन धार होती है जिससे तार को काटा जा सकता है।
  3. विकरणीय  प्रवास Diagonal Pleirs:- इस प्रकार के प्लायर का प्रयोग प्राय बिजली के मैकेनिक द्वारा बिजली के तारों को काटने और सिलने के लिए किया जाता है इसमें पकड़ने वाला जबड़ा नहीं होता है इसे वायर कटिंग प्लायर भी कहते हैं।
  4. Slip Joint Pleirs:- इस प्रकार प्लास के जबड़े के स्लीप ज्वाइंड की सहायता से अधिक चौड़ाई में खोला जा सकता है और एक या एक से अधिक साइज के लिए सेट कर के छोटे और बड़े साइज के कार्य को पकड़ा जा सकता है। इसके जबड़ों में कर्तनधार भी बनी होती है जिसमें तार को काटा जा सकता है इस प्लायर का मुख्  चपटा होता है और इसका प्रयोग चपटे जॉब को पकड़ने के लिए किया जाता है इस के जबड़े की स्तह  बीच में गोल आकार की होती है जिस पर दांत बने होते हैं अतः हिस्से में गोल जॉब को मजबूती से पकड़ा जा सकता है।
  5. Pincers Pleirs :- इसके दोनों जौ गोलाई में थोड़े से अंदर की ओर मुड़े होते हैं इनकी एक टांग पीछे से चपटी होती है और खांचा रखती है जिसमें कील के एक सिरे को ऊपर उठाते हैं इसका प्रयोग लकड़ी से कील निकालने के लिए किया जाता है इसे जंबूर भी कहते हैं।
  6. Multi Group Pleirs :- इस प्लायर को पानी के बीच का प्रदार्थ भी कहते हैं जिसे 0 से 50 एमएम के बीच 7 साइज में सेट कर सकते हैं।

Why want any job tolerance

प्लायर का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां precautions to be used during the work with Pleirs

  1. प्लायर को कभी भी स्पेनर या रीन्च की तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  2. तार को काटते समय तार का शीरा नीचे की ओर होना चाहिए सिरा अपनी ओर होने से तार का कटा भाग कारीगर को चोट पहुंचा सकता है।
  3. कार्य के अनुसार प्लास का प्रयोग करना चाहिए अन्यथा इसके जौ खराब हो सकते हैं।
  4. प्लायर का प्रयोग कभी भी हैमर की जगह नहीं करना चाहिए।
  5. बिजली का कार्य करते समय बिना इंसुलेशन के प्लायर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  6. कार्य करते समय प्लायर के ऊपर तेल, ग्रीस आदि नहीं लगी होनी चाहिए नहीं तो स्लीप करके चोट पहुंच सकती है।

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Monday, November 19, 2018

Scrapers and keyway

स्क्रेपर क्या है What is scraper? स्क्रेपर के प्रकार  Types of scraper? विधी Mathod of scraping and सुरक्षा सावधानियां precautions to be used

कीवे क्या है What is key or keyway?


मशीन के कुछ पार्ट  ऐसे होते हैं जिनकी सरफेस को अधिक शुद्धता में बनाना पड़ता है चाहे वह सरफेस भीतरी हो या बाहरी इन पार्ट को जब फिलिंग, मशीनिंग, ग्राइंडिंग क्रियाओं के द्वारा बनाया जाता है तो इनकी सरफेस पर कुछ नीचे दबे रह जाते हैं जो कि साधारण से आंखों से दिखाई नहीं पड़ते यदि इन ऊंचे धब्बों को ना हटाया जाए तो यह मशीन की चाल में कुछ रुकावट डाल सकते हैं इसलिए पार्ट्स को व मशीन को खराब  होने से बचाने के लिए स्क्रैपर के द्वारा उन दोनों को निकाला जाता है स्क्रैपर प्राय  टूल स्टील से बनाए जाते हैं और इनकी कर्तन धार को हार्ड एवं टेंपर कर दिया जाता है प्रयोग की आवश्यकता के अनुसार इन्हें विभिन्न आकृतियों एवं आकारों में बनाया जाता है तथा इनकी कुछ प्रमुख किस्में निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

Scrapers


  1. Flate scraper
  2. Hook scraper
  3. Traingular scraper
  4. Half round scraper
  5. Double Handle scraper

स्क्रेपींग करने की विधि (Mathod of scraping)

स्क्रैपर का प्रयोग बहुत ही बारीक कमियों को दूर करने के लिए किया जाता है जबकि अर्थात चौरस सतहों  कि स्क्रैपर करते समय  उस सतह के ऊंचे धब्बों को प्राप्त करने के लिए सरफेस प्लेट की सहायता ली जाती है पहले सरफेस प्लेट पर सिंदुर या नील की बहुत पतली परत उंगलियों के सहारे चढ़ा देनी चाहिए फिर जॉब की स्क्रेपर की जाने वाली सतह को सरफेस प्लेट को ही उस पर रखना चाहिए यदि जॉब बहुत भारी हो तो सरफेस प्लेट को ही उस पर रखना चाहिए। रगडने  के बाद जॉब की सतह पर जहां-जहां रंग लगे वह सतह का ऊंचा स्थान समझना चाहिए और चपटे स्क्रेपर से खुर्च  देना चाहिए स्क्रैपर करने के लिए छोटे जॉब को वॉइस से मजबूती से पकड़ना चाहिए स्क्रैपर करने के लिए दाहिने हाथ से स्क्रैपर का हत्था पकड़ना तथा बाएं हाथ को स्क्रैपर पर उसकी कर कंधार से कुछ ऊपर रखना चाहिए स्क्रेपिंग करते इसमें स्क्रैपर को जॉब किस सतह के साथ 30 डिग्री के कोण पर रखना चाहिए।

फ्लेट स्क्रेपर से धार लगाना

लगातार प्रयोग करने के बाद स्क्रैपर की कर्तन धार कुछ घीस जाती है तो उसके खुरचने की क्षमता कम हो जाती है जिससे स्क्रैपर अपना कार्य ठीक से नहीं कर पाता इसी कारण से स्क्रैपर को कर्तन किनारे पर धार लगाने की आवश्यकता पड़ती है धार लगाने के लिए फ्लैट स्क्रैपर की कर्तन धार सिरे को थोड़ा गोलाई में घीस  दिया जाता है। इसके बाद कर्तन सिरे को ऑयल स्टोन पर रगड़ कर धार को फिनिश कर दिया जाता है इस प्रकार धार लगाने के बाद स्क्रैपर द्वारा कार्य करने  के योग्य हो जाता है।
hack-saw-frame

स्क्रैपर का प्रयोग करने पर बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. सरफेस प्लेट को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए फिर उस पर सिंदुर या नील की पतली परत लगानी चाहिए।
  2. स्क्रेपिंग प्रारंभ करने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए हाथ पर तेल या ग्रीस नहीं लगाना चाहिए।
  3. सर फेसिंग करते समय जॉब की तरह को हाथ से पोंछना या रगडना नहीं चाहिए।
  4. स्क्रेपिंग करते समय हाथ को जॉब किस सतह के ऊपर रखना चाहिए।
  5. सर्फिंग करते समय स्क्रैपर पर अधिक दबाव नहीं लगाना चाहिए।
  6. साधारणतः 0.1 2mm से अधिक धातु को स्क्रेपिंग नहीं करनी चाहिए।

की या की वे  Key or keyway

एक पार्ट से दूसरे की पार्ट को पावर संचारित करने के लिए अर्थात गति देने के लिए हब या शाफ्ट के ऊपर पुली गियर इंपैलर व दूसरे पार्टस कों लगाने के लिए इनके बीच में चाबी फिट की जाती है जिससे दोनों पार्ट जुड़कर  एक हो जाते हैं यह स्टील की बनी होती है और शाफ्ट की अक्षिय रेखा के  समान अंतर फिट की जाती है इसका साइज शाफ्ट के साइज पर आधारित होता है यह जिस ग्रुव में फिट की जाती है उसे कि वे (keyway) कहते हैं प्राय खांचे की आधी गहराई हब में और शेष आधि गहराई शाफ्ट में काटी जाती है इस प्रकार चाबी फिट करने से शाफ्ट और पुली, गियर एक साथ घूम सकते हैं चाबियां भी एक स्थाई फास्टनेस है इन्हें मुख्यतः निम्नलिखित दो भागों में बांटा जाता है:-
1 संक की (sunk key)
2 सेडल की (saddle key)
1 Sunk key:-  इस प्रकार की चाबी को फिट करने के लिए शाफ्ट और हब में  कि वे बनाने की आवश्यकता होती है।
2 Saddle key:-  इस प्रकार की की को फिट करने के लिए केवल हब में चाबी खांचा बनाया जाता है शाफ्ट पर कोई खांचा नहीं काटते।

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What is keyway?

चाबी खांचा शाफ्ट पर और हब के बीच के अक्ष के एक समानांतर चाबी को फिट करने के लिए जो ग्रुव बनाया जाता है उसे चाबी खांचा कहते हैं चाबी खांचा बनाने के लिए साइज के अनुसार मार्किंग की जाती है मार्किंग करने के लिए किसी रुल या बॉक्स स्क्वेअर का प्रयोग किया जाता है।
चाबी खांचा  हैंड और मशीन विधि से बनाए जाते हैं।
File रेती

कि को फिट करना या रिमूव करना

शाफ्ट और पुलि या गियर आदि पर सही साइज का चाबी खांचा बनाने के बाद चाबी को फिट किया जाता है चाबी को हाथ से दबाव लगाकर या हथोड़े की हल्की चोट लगा कर फिट करना चाहिए कभी-कभी शाफ्ट से पूली गियर या भील आदि को बदलने की आवश्यकता पड़ती है जिससे चाबी को भी निकालना पड़ता है इसलिए चाबी को निकालने के लिए की ड्रिफ्ट का प्रयोग किया जाता है यदि चाबी अपने चाबी खांचे में ही जाम हो जाए तो शाफ्ट से पुली गीयर या भील और इंपैलर आदि को अलग करने के लिए ब्हीलपुलर का प्रयोग किया जाता है।

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Saturday, November 17, 2018

Dail test indicator

डायल टेस्ट इंन्डीकेटर करता है What is dial test indicator? डायल टेस्ट इंन्डीकेटर के सिध्दांत करता है What is the principles of dial test indicator? और यह केसे कार्य करता है And how to use dial test indicator and रीडीगं कैसे लेते हैं reading with dial test indicator.

dial test indicator  सतह की जांच करने वाला एक सूक्ष्म मापी यंत्र है जिसका प्रयोग अधिकतर उत्पादन में है जॉब की परी शुद्धता को जांचने या किसी जॉब के पृष्ठों की समतलता  समानतंर  टेपरों छडो की ओवरनेस या सीधा पन का निरीक्षण करने के लिए किया जाता है इसके अतिरिक्त किसी जॉब को सही बांधने या सेट करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है यह इंग्लिश प्रणाली में 0. 00 1 इंच और अधिक परिशुध्ता  जांचने के लिए  0.0001 इंच तथा मीट्रिक प्रणाली में 0.0 1mm और इससे भी अधिक एक माइक्रोन अर्थात 0.001एम एम तक की परिशुद्धता में मीलते है। dial gauge या dial indicator gauge भी कहते हैं।

Dail test indicator

डायल टेस्ट इंन्डीकेटर के सिध्दांत principle of dial test indicator

इसमें रेखा और पिनिंग द्वारा साइज के अंतर को यांत्रिक विधि से बढ़ा करके डायल पर दिखाया जाता है साधारणतः यह निम्न प्रकार से दिखाया जाता है :-
  1. Universal junior indicator
  2. universal test indicator
  3. last word indicator
  4. dial indicator 
डायल टेस्ट इंन्डीकेटर के मुख्य भाग:-
  • case or housing
  • Cover or brick
  • Needle or indicator 
  • Brazil
  •  Revolution counter
  • Dust cap 
  • reck or plunger
  • dial
  • steam
  • crystal
  • contact. Or know 
 Dail test indicator
डायल के 100 निशान = 1mm
डायल का एक निशान = 1/100 =0.01mm

Mitric प्रणाली :- डायल टेस्ट इंन्डीकेटर अल्पतमांक =
Main खाने के एक खाने का मान   =1/100 mm
बड़े Dail पर खानों की संख्या
= 0.01 mm =0.001 inch

ब्रिटिश प्रणाली:- indicator का न्यूनतम माप क्यों कि
डायल के 100 निशान =0.1"
इसलिए डायल का एक निशान =0.1÷100 = 1/10×1/100 =1/1000 =0.001"

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1  Vernier caliper.ruler
For ITI students
Surface plate


डायल टेस्ट इंन्डीकेटर का प्रयोग the use of dail test indicator

dial test indicator का प्रयोग प्राय: निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाता है:-
  1. किसी फ्लैट जॉब की समांतर भुजाओं को चेक करने के लिए किया जाता है।
  2. गोल जॉब की गोलाई चेक करने के लिए।
  3. मास प्रोडक्शन में एक ही साइज के कार्य की लंबाई चौड़ाई ऊंचाई आदि को चेक करने के लिए।
  4. लेथ मशीन पर केंद्रों की लाइनमैंट में सेट करने के लिए।
  5. machine tool के alignment को सेट करने के लिए।

डायल टेस्ट इंन्डीकेटर से रीडींग कैसे लेते हैं:-

रीडिंग लेने के लिए डायल टेस्ट इंडिकेटर को स्टैंड पर फिट किया जाता है स्टैंड साधारणतः base वाला या चुंबकीय आधार वाला हो सकता है प्लनजर  को नीचे और जॉब के ऊपर की दूरी को सेट कर लेना चाहिए जॉब को पल्नजरन  के नीचे सेट करते समय ध्यान रखना चाहिए कि सुई द्वारा डायल पर एक या दो चक्र लग जाए चेकिंग करते समय यदि सूई 0 से पीछे रह जाए तो समझना चाहिए कि जॉब - (minus)में है। और यदि सूई डायल पर जीरो से आगे बढ़े तो समझ लेना चाहिए कि जॉब प्लस में है।

डायल टेस्ट इंडिकेटर का प्रयोग करते समय काम आने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. dial test indicator को कटिंगकटिंग टूल के साथ नहीं रखना चाहिए।
  2. dial test indicator को हवा के साथ प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।
  3. इसका प्रयोग रफ़ सरफेस पर नहीं करना चाहिए।
  4. कार्य करने के बाद इसे अच्छी तरह से साफ करके उचित स्थान पर रखना चाहिए।
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Thursday, November 15, 2018

Interchangeability (limit,fits, tollerance)

अतंरविमयता क्या है?

What is interchangeability?

लिमीट क्या है what is limit? टाॅलरेन्स क्या है what is tolerance? और फिट्ज करता है what is fits?


कोई भी करण और मशीन बनाने के लिए भिन्न भिन्न आकार के पुर्जों की आवश्यकता पड़ती है जिन्हें विभिन्न प्रकार की विधियों द्वारा बनाकर एवं आपस में जोड़कर उपकरण या मशीन का रूप दिया जाता है इन पार्टस को जोड़ने वाली विधि को assembling कहते हैं परंतु कभी-कभी ये पुर्जे आपस में फिट नहीं होते जिससे उन्हें दोबारा मशीन करने या रेती  लगाने की आवश्यकता पड़ती है जिसके फलस्वरूप पुर्जों को असेंबल (assemble) करने में अधिक समय लगता है इसलिए यह अति आवश्यक है कि प्रत्येक पूरजो को अधिक परी शुद्धता से बनाया जाए ताकि जब कभी मशीन के किसी खराब या घीसे पार्ट को बदलना पड़े तो उसके स्थान पर दूसरा प्रयोग किया जाने वाला किसी कंपनी से मंगवाया जाए तो नए पार्ट बिना किसी मशीनिंग  क्रिया के आसानी से फिट किए जा सके और मशीन पहले की तरह कार्य  करने लगे। पार्ट के फिट होने के इस गुण को अंतरवीमयता कहते हैं  टूटे या खराब पूर्जे के स्थान पर नए पूरजो की अदला-बदली को पार्ट कि आपसी बदल कहा जाता है।

अंर्तविमयता क्या है?(what is interchangeability?)

जब कभी एक ही तरह के पार्ट अधिक मात्रा में बनाने हो  जो कि बिल्कुल एक ही साइज कितना आकार और परिशुद्ध था में एक दूसरे की जगह पर फिट हो जाए तो उसे अंर्तविमयता कहते हैं। इसके बहुत ज्यादा लाभ है
  1. असेंबलिंग में कम समय लगता है।
  2. इसमें rejection कम होता है।
  3. उत्पादन औरउपयोग के क्षेत्र में बढ़ोतरी होती है।
  4. घीसे पार्ट या टूटे मशीनी पार्ट को बदलने मैं सुविधा होती है क्योंकि बाजार में मिलने वाले स्पेयर पार्ट मूल पूरजो के विवरण के अनुसार बने होते हैं।
        अंतरविमयत्ता प्राप्त करने के लिए पार्ट पर कुछ निश्चित सीमा निर्धारित की जाती है यह सीमा पार्ट की कार्य पद्धति तथा फिट पर निर्भर करती है इसलिए कारीगर को सदा सीमा पद्धति में ही पार्ट को बनाना चाहिए।
सीमा पध्दति के लाभ निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:-
  • पार्ट का उत्पादन अधिक मात्रा में हो सकता है।
  • इससे परिशुद्ध का उत्पादन प्राप्त होता है।
  •  Rejection कम होता है।
  • interchangeability parts बनते है।
  • Assembling में कम समय लगता है।
  • वांछित फिट प्राप्त कर सकते हैं।

लिमीट क्या है? What is limit?

    वर्कशॉप में जब पार्ट्स का उत्पादन किया जाता है तो कारीगर को पारट के बेसिक साइज को थोड़ा बड़ा या छोटा बनाने की छूट दी जाती है।इससे पारट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि कहीं कोई उपकरण है ऐसे होते हैं जिससे पारट को बिल्कुल परिशुद्धता साइज में नहीं बनाया जा सकता जैसे सूक्ष्म माफी औजार की गलती मशीन सेटिंग की गलती टूल की खराबी आदि के कारण पार्ट को बनाते समय साइज में कुछ अंतर आ सकता है इसके अतिरिक्त यदि पार्ट को सही परी शुद्धता माप में बना भी लिया जाए तो उसमें अधिक समय लगता है इसलिए पार्ट को बनाने के लिए सीमा निर्धारित कर दी जाती है कि पार्ट को बेसिक साइज में कितनी सीमा अधिक या कम साइज में बनाया जा सकता है उसे लिमिट कहते हैं जैसे किसी जॉब के साइज 50mm में +_    0.05 एम एम की छूट दे रखी है लिमिट निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

Tolerance Fit, limit shaft

1. High limit:- किसी भाग के basic size पर स्वीकृत अधिक  से अधिक जिस सीमा में साइज को बनाया जाता है उसे high limitकहते है।जैसे 25.00 mm size. पर High limit= 25.02mm .
2. Low limit:- किसी पार्ट के बेसिक साइज पर स्वीकृत कम से कम जिस सीमा में साइज को बनाया जा सकता है उसे low limit कहते हैं। जेसे : 25.00 mm पर low limit= 24.98 mm .
अतः part का साइज = 25 +- 0.02 mm 

टाॅलरेन्स क्या है? What  is Tolerance?

पार्ट के किसी साइज की हाई लिमिट और लो लिमिट के अन्तर को टाॅलरेस कहते हैं। tolerance के  कई लाभ है जैसे समय की बचत और उत्पादन बढ़ता है कम कुशल कारीगर से काम लिया जा सकता है उत्पादन की लागत कम होती है और पारट कम रद्द होते हैं टॉलरेंस प्रत्येक कार्ट पर अलग-अलग होती है जैसे: 25.00 mm size पर high limit size पर high limit=25.03 mm 
Low limit=24.98 mm 
अतः tolerance =25.03 - 24.98= 0.05 mm है।
Tolerance दो प्रकार से दी जाती है


  • Unilateral tolerance
  • Bilateral Tolerances
Hole Basis tolerance:- इस प्रणाली में है छेद का साइज स्थिर रखा जाता है और टॉलरेंस केवल शाफ्ट के साइज पर दी जाती है आजकल अधिकतर होल बेसिस प्रणाली अपनाई जाती है क्योंकि किसी भी स्टैंडर्ड साइज के छेद को आसानी से बनाया जा सकता है।
Shaft Basis tolerance:- इस प्रणाली में शाफ्ट का साइज स्थिर रखा जाता है और tolerance केवल छेद के साइज पर दी जाती है। यह प्रणाली होल बेसीज से कम अपनाई जाती है।
What is allowance?
 जब किसी निर्धारित फिट के अनुसार 2 पार्ट को बनाकर आपस में मिलाया जाता है तो इन दोनों पारट की मापों  में जानबूझकर जो अंतर रखा जाता है उसे अलाउंस Allowance कहते हैं अलाउंस का सम्बंध फिट होने वाले दोनों ही पार्ट से होता है ना की किसी एक पार्ट से किसी फीट के अनुसार अलाउंस धनात्मक या ऋणात्मक (+-) हो सकता है। Maximum Allowance and minimum Allowance

Limit,fits Allowance

दोनों के बीच में अन्तर Differen between Tolerance and Allowance?

  1. tolerance बेसिक साइज पर आधारित होती है जबकि Allowance Fit के प्रकार पर आधारित होती है।
  2. Tolerance एक ही जॉब के विभिन्न विभिन्न साइज पर अलगअलग हो सकती है जबकि Allowance दो matching पार्ट पर दिया जाता है।
  3. tolerance blueprint या drawing के आदेशानुसार रखी जाती है जबकि Allowance इच्छित fit प्राप्त करने के लिए जानबूझकर रखी जाती है।

फिट क्या है?  What is Fit?

किसी भी मशीन के अलग-अलग प्रकार के कई parts से असेंबल करके बनाया जाता है इसमें कुछ ऐसे विशेष पार्ट होते हैं जिनके साइज को सूक्षमता से बनाया जाता है और वह आपस में स्लाइड करते हैं या घूमते हैं इन असेंबल किए जाने वाले parts के बीच क्लीयरेंस की मात्रा से बनने वाले सम्बध को फिट कहते हैं इसे तीन ग्रुप में बांटा जाता है:-
  1. Clearance:- जब शाफ्ट सुराख के अंदर स्वतंत्र घूमे उनमें किसी किस्म की कोई रुकावट ना हो तो उसे क्लीयरेंस कहते हैं ताकि फिट होने के बाद कुछ क्लीयरेंस रनिंग और पुश आदि इस में आते हैं।
  2. Trasition Fit :- इसमें छेद और शाफ्ट के बीच में अलाउंस इतना रखा जाता है कि यह ना ही उसमें उतना अधिक क्लीयरेंस न अधिक इंटरफेरेंस रह सके इसमें पुश फिट आते हैं।
  3. Interfearance Fit :- इसमें छेद का साइज शाफ्ट के साइज से कम होता है इसमें पार्ट्स को हाथ के दबाव से स्लाइड कर सकते हैं इसमें  निम्नलिखित आते हैं:-        force Fit , Drawing Fit , Shrinkage Fit etc.

लिमीट और फिट की विभिन्न प्रणालियां :-

     वेसे तो दुनिया में limit और फिट्ज की बहुत प्रणालियां है परन्तु इनकी सबसे अधिक प्रचलित प्रणाली निम्नलिखित तीन ही है:-
  1. न्यूल प्रणाली:- Engineering Company ने संसार के बड़े बड़े कारखानों में विभिन्न प्रकार की फिट पर दिए जानेवाले tolerance के उपर विस्रीत खोज करने के बाद एक  तिहाई(1/3) दो 1/2,से 6 ब्यास के छेदों के ा लिए tolerance निश्चित की यह प्रणाली hole basis द्वारा जिसमें किसी प्रकार की फिटिंग प्राप्त करने के लिए व्यास व्यास को स्थिर रखा जाता है। परिशुद्धता  के आधार पर छेदों को  A और B श्रेणी में रखा जाता है। इस प्रणाली में force Fit,  ड्राइविंग fit, push fit, तथा रनिंग फिट आती है।
  2. British Standard :-  इस प्रणाली में 21 प्रकार के भिन्न-भिन्न फिट प्राप्त करने के लिए होल साइज एकतरफा और दो तरफा 16 ग्रेड में Tolerance दी जाती है यदि किसी छेद या shaft  में टॉलरेंस दी जाती है तो छेद या शाफ्ट के निशान के साथ Tolerance का नंबर भी लिया जाता है जैसे एच 7 और जी6 आदि ।
  3. भारतीय मानक पध्दति :- भारत में ब्रिटिश पध्दति के आधार  पर पहले यह पद्धति इन्चों inches में थी जिस समय  16 लिमीट और फिट की पद्धतियां थी जिन्हें ID 1 से आई डी 16 तक व्यक्त किया जाता है तथा मौलिक जिन्हे ब्रिटिश पद्धति के अनुसार व्यक्त किया जाता है।




Tuesday, November 13, 2018

Die

डाई क्या है?  What is die? डाइ स्टाॅक करता है? What is die stock? और डाइ स्टाक से चुडीयां निकालने की विधि।

जिस प्रकार भीतरी चूड़ियां काटने के लिए Tap and tap wrench टेप का प्रयोग किया जाता है उसी प्रकार से बाहरी चूड़िया काटने के लिए डाई का प्रयोग किया जाता है इस प्रकार की बाहरी चूड़ियां वाले भागों के कुछ सामान्य उदाहरण बोल्ट स्टैंड व पाइप है डाई में वी आकार की स्टैंडर्ड चूड़ियां कटी होती है और कटिंग एज बनाने के लिए कुछ फ्लूट भी बनाए जाते हैं डाई प्राय हाई कार्बन स्टील  से बनाई जाती है और इसे हार्ड एवं टेंपर किया जाता है इसके अतिरिक्त डाई टूल स्टील की बनाई जाती है डाई गोल या चौरस होती है जिसके अंदर चूड़ियां कटी होती है चूड़ियों में कर्तन धार एज बनाने के लिए फ्लूट भी कटी होती है डाई के एक तरफ की शुरू चूड़ियां चैंम्फर की होती है ताकि वह अपने साइज की छड़ सुविधा पूर्वक प्राप्त कर सके कार्य के अनुसार वे प्रायः निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

Die 

  1. ठोस डाई 
  2. spindle die
  3.  adjustable die 
  4. die  nut
  5. Die plate
  6. Single for

डाई स्टाॅक क्या है What is die stock?

बाहरी चूड़िया काटते समय जिस साधन के द्वारा डाई को पकड़कर प्रयोग किया जाता है उसे डाइ स्टोक  कहते हैं इसकी बॉडी छेद पर डाई के पकड़ने और समायोजित करने के लिए सेट स्क्रु लगे होते हैं कार्य के अनुसार डाई स्टाॅक भिन्न भिन्न प्रकार के प्रयोग में लाए जाते हैं जो निम्नलिखित प्रकार से है  ््   
1 solid die stock and
2  adjustable die stock

Die and die stocks


डाई स्टाॅक से चुडीयां निकालने की विधि Method of threading in die stock?

डाई से  बाहरी चूड़ियां काटते समय निकालने के लिए कार्य कार्य विधि प्रयोग में लाते है जो निम्नलिखित प्रकार से है:-

  1. जिस जॉब पर चूड़ी काटनी हो उसके व्यास का साइज चेक कर लेना चाहिए।
  2. राॅड के जिस सीरे पर चूड़ियां काटनी हो उस पर रेती धार बॉडी से चेक कर लेना चाहिए।
  3. डाई स्टाॅक में डाई को पकड़ लेना चाहिए।
  4. डाई पर अधिक दबाव नहीं डालना चाहिए2।
  5. चुडीयां काटते समय आधा चक्कर आगे और आधा पीछे लगाना चाहिए।
  6. जॉब को धातु के अनुसार सही लुब्रिकेंट का प्रयोग करना चाहिए।
  7. कटी हुई चिप्स को साफ करने के लिए ब्रश का प्रयोग करना चाहिए।
  8. क्रिया समाप्त होने के बाद डाई और डाई स्टॉक को अच्छी तरह से तेल या ग्रीस लगाकर रखना चाहिए।

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डाई का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां precaution to be used with the work with die 

  1. डाई से चूड़ियां काटने की क्रिया शुरू करने से पहले डाई और जॉब को साफ कर लेना चाहिए।
  2. जिस राॅड पर चूड़ियां काटनी हो  उसका साइज चेक कर लेना चाहिए।
  3. राॅड के जिस भाग पर चूड़ियां काटनी हो  उसे थोड़ा सा चैमफर  कर लेना चाहिए।
  4. जाॅब को अच्छी  तरह से बीच वाइस  में पकड़ना चाहिए।
  5. डाई का आधा चक्र आगे और आधा पीछे रखना चाहिए। 
  6. चूड़ियां काटते समय लुब्रिकेंट का प्रयोग करना चाहिए।
  7. एक ही तार में पूरी गहराई की चूड़ियां काटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
  8. स्प्लिट तथा स्पीसल  ड्रेस को दो या तीन समायोजित करके पूरी गहराई की चूड़ियां काटने चाहिए।
  9. चूड़ियां काटते समय डाई स्टॉक पर दोनों तरफ सामने दवाब देना चाहिए अन्यथा चूड़ी दूर जाएगी।
  10. कार्य समाप्त करने के बाद डाई को ग्रीस या तेल लगा कर रखना चाहिए।
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Sunday, November 11, 2018

Tap wrench

टेप रेन्च क्या है? What is Tap wrench?

यह एक प्रकार का टूल है जिसका प्रयोग हेंड टेपिंग करते समय टेप को पकडने के लिए किया जाता है निम्नलिखित टेप ड्रिल  प्रयोग में लाए जाते हैं:-
  1. Solid tap wrench
  2. Adustable tap wrench
  3. T handle Tap wrench
Tap wrench

 Tap wrench के द्वारा हस्त टेपींग विधि

  1. जॉब को टेप के साइज के अनुसार सही साइज का drill  होल कर लेना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि drill hole  और बिल्कुल सीधा है।
  2. ड्रिंल करते समय सूराख के मुंह पर आए बाबरी को हटाकर हल्का सा चेम्फर कर लेना चाहिए।
  3. टेंपर टेप को टेप रिन्च मैं अच्छी तरह से पकड़ लेना चाहिए।
  4. टेप को ड्रिल होल में रख कर दो या तीन चक्र घुमाने चाहिए फिर टेप रिन्च  को निकालकर try square से चेक कर लेना चाहिए चेकिंग करने के बाद टेप को पुनः टेप रिन्च में पकड लेना चाहिए।
  5. यदि टेप जॉब की सरफेस से 90 डिग्री में टेपिंग ना कर रही हो तो टेप को सीधा करके टेपिंग करनी चाहिए।
  6. टेपिंग करते समय टैप का आधा चक्र आगे और आधा पीछे चलाना चाहिए ताकि चिप्स टूटकर बाहर निकल जाए।
  7. टेपींग करते समय  जॉब की धातु के अनुसार सही लुब्रिकेंट का प्रयोग करना चाहिए।
धातु steel, aluminium, cast iron, brass आदि हो सकते हैं।
तथा लुब्रिकेंट oil,water,parrapine, आदि हो सकते है।

बंद छेद टेपिंग विधी Blind Hole Taping Mathod

बंद छेद में टेपिंग करते समय बहुत सावधानी रखनी पड़ती है

  1. बंद छेद में टेपिंग करते समय टेप को बार-बार निकालते रहना चाहिए ताकि कटी हुई चिप्स बाहर निकल सके।
  2. बंद छेद में टेपिंग करते समय फिनिशिंग टेप का प्रयोग करना चाहिए ताकि सुराग की तली तक पूरी चुडीयां काटी जा सके।

टेप टूटने के कारण the cause of tap brocken

  1. टेप के साइज के अनुसार किया हुआ सुराग छोटा होना।
  2. टेपिंग करने के लिए किया हुआ सुराग टेपर में होना।
  3. टेपिंग करते समय टेप पर अधिक दबाव देना।
  4. टेप के कटिंग  thred का घीस जाना।
  5. job को bench vice में ठीक से नहीं बांधना।
  6. Tapping करते समय lubricant का प्रयोग न करना।

Tap wrench

टुटे हुए टेप को निकालने की विधि

  1. यदि टेप जॉब की सरफेस से कुछ ऊपर से टूटी है तो कुटी हुई टेप को round nose plier से पकड़कर निकाल देना चाहिए।
  2. यदि टेप जॉब की सरफेस में से ही टूट गई है तो टूटी हुई टेप को पंच व हथौड़े की चोट लगा कर निकाल दिया जा सकता है।
  3. जाॅब में टूटी हुई टेप को बाहर निकालने के लिए एक विशेष प्रकार के टूल का प्रयोग करना चाहिए जिसे टेप एक्स ट्रेक्टर कहते हैं।
  4. Tap Extractor के न होने पर या जिस समय टेप के कई टुकड़े हो जाए उस अवस्था में नाइट्रिक एसिड की बुंदे डालनी चाहिए।
  5. यदि टेप जॉब की सरफेस से नीचे टूट गया हो तो टूटी हुई टेप को जॉब के साथ गर्म करके एनालिंग विधि (aniling mathod) प्रयोग करनी चाहिए।

स्टड extractor क्या है? What Is Stid Extractor?

      यह टेप जैसा ही होता है परंतु अंतर केवल इतना है कि यह टेपर  में बना होता हैै और उस पर दो या तीन स्टार्ट की left hand चुडीयां बनीबनी हुई होती है। टूटे हुए टेप या स्टड को निकालने के लिए इनको सुराख में डालकर उल्टी दिशा में घुमाते हैं जिससे यह  सुराख तच्छी तरह से ग्रीप  कर देता है या आसानी से बाहर कर लेता है।

टेप का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां (precautions to be used at the time of taping)

  1. Tapping करने से पहले टेप और जॉब को अच्छी  साफ कर लेना चाहिए।
  2. टेपिंग करने के लिए सही साइज के ड्रिल से छेद करना चाहिए।
  3. टेपिंग करने के लिए सही साइज के drill से छेद करना चाहिए।
  4. टेपिंग करते समय टेप का आधार चक्र आगे आधा पीछे लगाना चाहिए। 
  5. टेपिंग करते समय सही साइज के टेप रीन्च  का प्रयोग करना चाहिए।
  6.  टेपिंग करते समय टेप रिन्च पर ना तो अधिक दबाव लगाना चाहिए ना ही अधिक झटका लगाना चाहिए।
  7. टेपिंग करते समय धातु के अनुसार उचित लुब्रिकेंट का प्रयोग करना चाहिए।
  8. काम करने के बाद टेप की चूड़ियों को साफ करके उचित स्थान पर रख देना चाहिए।

Friday, November 9, 2018

Tap

टेप क्या है और यह कैसे कार्य करता है?(What is tap ? How it work)

टेप एक कटिंग टूल है जिसके द्वारा बेलनाकार छेद के अंदर
चुड़ियां काटी जाती है टेप के द्वारा चूड़ियां काटने के लिए पहले टेप को साइज के अनुसार ड्रिल द्वारा छेद करके उसका रिमिंग प्रोसेस द्वारा फिनिश किया जाता है बिना फिनिश किए किसी भी छेद में टेप को नहीं चलाना चाहिए। टेप के द्वारा  किसी छेद के अंदर चुडी काटने की क्रिया को टेपिंग कहते हैं टेप प्राय: हाई कार्बन स्टील या हाई स्पीड स्टील के बनाए जाते हैं जिनकी देह को हार्ड एवं टेंम्पर  कर लिया जाता है टेप की बेलनाकार way की चारों तरफ चूड़ियां बनी होती है और कटिंग एज के लिए इन चूड़ियों को काटते हुए टेप की लंबाई में कुछ खांचे  या फ्लूट भी कटे होते हैं टेप के मुख्य भागों का विवरण इस प्रकार हैं:-

Hand Tap

  1. बाॅडी  :- टेप को चूड़ी काटते हुए भाग कि पूरी लंबाई देह कहलाती है।
  2. शेंक (shank):- बॉडी के बाद स्टॉप बेलनाकार भाग को शेंक कहते हैं।
  3. टेंग (tang):- शेंक के किनारे पर कि बेलनाकार भाग को टेंग कहते है।
  4. खांचे (flutes):- टेप की बॉडी में लंबाई की तरफ  चूड़ियों के काटते हुए कुछ खांचे  कटे रहते हैं जिन्हें flutesया खांचे कहते हैं खांचे से कटिंग एज  बनते हैं कटी हुई चिप बाहर निकलती है साथ में लुब्रिकेंट दिया जाता है।
  5. Hand:- दो फ्लूट के बीच वाली मेटल की चौड़ी सतह को जिस पर चूड़ियां कटी रहती है को हैंड कहते हैं।
  6. Cutting face :- hand के चुड़ीदार भाग के अगले अंग को कटिंग फेस कहते हैं।
  7. Heal :- हैंड के चूड़ीदार भाग के पिछले अंग को  हिल कहते हैं।
  8. Champher:- बॉडी के निचले वाला वह भाग जहां पर कुछ चूड़ियों को टेपर में ग्राइंड किया होता है उसे चैंफर कहते हैं।
  9. Point:- प्रथम tap के चेंम्फर किए हुए अगले वाले सीरे के बाहरी व्यास को point व्यास कहते हैं या रुट व्यास कहते हैं।

हैंड टेप के प्रकार (types of hand tap)

 यह हाथ से चलाई जाने वाली टेप है इसके सेंक के सीरे पर बनी वर्माकार टेंग पर टेप रीन्च  फिट किया जाता है अलग-अलग स्टैंडर्ड की चूड़ियों के लिए टेप को सेट में बनाया जाता है जैसे वी, वी एस डब्ल्यू , वी एस एफ,   टेप के सेट में तीन टेप होते हैं

Tap types

pepper tap ,intermediate tap, finishing,।
हेंड टेप निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-
  1. मशीन टेप
  2. Extention tap
  3. Master tap
  4. Machine screw tap
  5. Nut tap

The size of tap drill

  जब किसी जॉब में टेपिंग की जाती है तो उसमें टेप के साइज के अनुसार कुछ छोटे साइज के ड्रिल होल करने पड़ते हैं यह ड्रिंल होल  टेप पर काटी हुई चुडीयों के कोर डायमीटर के बराबर अवश्य होना चाहिए यदि drill  टेप  के साइज के अनुसार साइज बड़ा हो गया है तो चूड़ी पूरी गहराई कि नहीं बनेगी इस प्रकार यदि ड्रिल होल छोटे साइज का बना है तो टेपर करते समय टेप के टूटने का खतरा बना रहता है इस प्रकार टेप के  साइज के अनुसार सही साइज का होल ड्रिल करना अति आवश्यक है ।


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Wednesday, November 7, 2018

Counter sinking

काउंटर  सींकींग क्या है ( What is counter sinking) ? तथा counter Boaring क्या है? Spot facing से क्या अभिप्राय है?

counter sinking वह क्रिया है जिसके द्वारा पहले से बने छेद  के किनारों को शंकु आकार में बड़ा किया जाता है जिससे कि रिबेट तथा स्क्रु आदि का शंकु के आकार वाला भाग इस में समा सकें इस क्रिया में प्रयोग किए जाने वाले टूल्स को काउंटर सिंकिंग कटर कहते हैं जिसमें सेंक तथा कटर होते है। कटर पर करतधार होती है जो एक निश्चित कोण पर बनी होती है कटर के बिंदु कोण 30 डिग्री ,60 डिग्री, 90  तथा 120 डिग्री के हो सकते हैं इन औजारों पर पाईलट नहीं होता।

काउंटर बोरिंग क्या है?Counter Boring 

यह क्रिया ड्रिल मशीन के द्वारा किए गए छेद के सीरे को बड़ा करने के लिए भी की जाती है जिससे कि बोल्ट, हेड, स्क्रु तथा रीबेट शीर्ष समा सके इसमें काउंटर बोरिंग टूल का प्रयोग किया जाता है इस टूल के तीन भाग सेंक, वाटर तथा पायलट होते हैं सैंक से टूल को स्पाईंडल में पकड़ा जाता है व कटर करने की क्रिया करता है तथा पायलट बने हुए थे में उनको ग्राइंड करता है सामान्यतः पाइलेट को सेट स्क्रु द्वारा कटर पर लगाया जाता है इस प्रकार के बने हुए छेद के अनुसार एक ही कटर  पर  कई प्रकार के साइज के पाईलेट फिट किए जा सकते हैं।

What is Spot facing?

इस क्रिया के द्वारा किसी छेद के चारों तरफ की ऊपर सतह  समतल या चिकनी की जाती है जिससे कि नट, वाशर,  बोल्ट, या स्क्रु के सीरे के लिए शीट प्राप्त हो सके इस क्रिया की आवश्यकता रफ या ढीली हुई सतहों पर पड़ती है इस क्रिया में प्रयोग होने वाले औजार को स्थानिक फलकन  औजार कहते हैं कभी-कभी काउंटर बोरिंग टूल को भी सपोर्ट फेसींग क्रिया के  लिए प्रयोग किया जाता है।

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Monday, November 5, 2018

Reamers

रीमर क्या है? Wh is Reemers? यह कैसे कार्य करता है  how it works? रीमर कितने प्रकार के होते हैं? How many types of reamers?

रीमर एक बेलनाकार बहू फ्लूडीड कटिंग टूल है जिसका प्रयोग पहले से ड्रिलिंग प्रोसेस द्वारा किए गए छेद को फिनिश करने के लिए किया जाता है ड्रिलिंग द्वारा जब कोई सुराग किया जाता है तो वह खुरदरा होता है अतः जहां फिनिश किए हुए छेद की आवश्यकता होती है वहां पर रीमर उपयोग किया जाता है। रीमर द्वारा किसी भी छेद को फिनिश करने या उसकी साइज से थोड़ा सा बढ़ाने के प्रोसेस को रिमींग कहते हैं इस विधि द्वारा छेद को + -  0.005 की यथार्थ  मैं बनाया जा सकता है रिमिंग द्वारा 0.02 से 0.15 एम एम तक धातु को काटा जा सकता है इसे रिमिंग एलाउंस भी कहते हैं।
Reamers 


                 Reamers प्राय: high carbon steel या high speed steel से बनाए जाते हैं। और  hard एंड temper किए हुए होते हैं। इनकी body पर सीधे घुमावदार वाले खांचे होते है इनकी अधिक मात्रा में उत्पादन के लिए कारबोकार्बोहाइ टीप वाले रिमर प्रयोग में लाए जाते हैं चैम्फर का कोण बॉडी तथा सैंक  रीमर के मुख्य तीन कोण होते हैं।

रीमर के प्रकार types of Reemar?

रियर प्राय: दो प्रकार के होते हैं:-
  • hand reamer
  • machine reamer
  1. hand reamer:-        इस प्रकार के रीमर रेंन्च या हत्थे की सहायता से प्रयोग में लाए जाते हैं इनकी सैंक सिधी व समान अंतर होती है इन के ऊपरी सिरे पर चकोर टैंग लगी होती है ऐसे रीमर को हाथ  की ताकत से घुमाया जाता हैं। वर्कशॉप में प्राय निम्नलिखित प्रकार के ऋमर प्रयोग में लाए जाते हैं:- समानांतर रीमर, टेपर रीमर, एडजेस्टेबल रीमर,एक्सपेंशन रीमर्स ,पाईलेट रीमर।
  2. मशीन रीयर:-     मशीन रीमर को चैकींग रीमर भी कहते है। इस प्रकार के रीमर पर टेपर सैंक बनी हुई होती है।जिस पर फ्लेट टेंग होती है इस रीयर को मशीन के स्पाइनल में पकड़कर प्रयोग में लाया जाता है पराया निम्नलिखित प्रकार के रीमर प्रयोग में लाए जाते हैं:- रोज reamers,shell reamers,mashine bridge reamers, mashine jinge reamers.

रीमर का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. रीमर  प्रयोग करते समय रीमर को ड्रिल होल जॉब कि सतह के समकोण में रखना चाहिए।
  2. बंद छेद में रिमिंग करते समय है रीमर को बार-बार बाहर निकालते रहना बाहर निकालते रहना चाहिए।
  3. रीमिंग करते समय उचित लुब्रिकेंट का प्रयोग करना चाहिए।
  4. रीमर को कभी भी मशीन स्पिंडल में  फिट करके रीमिंग नहीं करनी चाहिए।
  5. यदि रिमर का प्रयोग ना करना हो तो उसे तेल लगाकर निजी स्थान पर रख देना चाहिए।

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Saturday, November 3, 2018

Drill machine

What is Drill machine And drilling? वर्मा क्या है ? How it work carefully? And types of Drill


  Drill and drilling बर्मा मशीन पर कार्य खंड पकड़ने की क्रिया वर्क हैंडलिंग डिवाइस ऑन ड्रिलिंग मशीन ड्रिलिंग क्रिया के समय कार्य खंड पर ड्रिल को घुमाने वाले बल कार्य करते हैं इन बलों का मान उस समय होता है  जब की ड्रिल का बिंदु किए जा रहे क्षेत्र से बाहर आने को होता है अतः इन बलों को निष्प्रभावी करने के लिए कार्य खंडों को डरील मशीन को गैस पर ड्रिलिंग को बांधने की आवश्यकता पड़ती है जॉब को ढीला बांधने या हाथ से पकने पर बहुत खतरनाक परिणाम होते हैं क्योंकि टार्क के कारण जॉब घूमकर गंभीर चोट पहुंचा सकता है जॉब को ड्रिलिंग मशीन को मजबूती से बांधने के लिए अधिकतर निम्नलिखित युक्तियां  प्रयोग की जाती है:-
Drill machine


  1. वाईस
  2. कोण प्लेट
  3. वी ब्लॉक
  4. टी कार्बन 
  5. क्लेंम्प
  6. पौडीदार ब्लाॅक
  7. टूल डीवाईस 

Drill डीॄल या वर्मा

Drill कटिंग टूल है जिसके प्रयोग से गोला कार के छेद बनाए जाते हैं जिसका प्रयोग ड्रिल मशीन की सहायता से किया जाता है जिस क्रिया के द्वारा  डीरल और ड्रिलिंग मशीन से गोल सुराग बनाए जाते हैं उसे ड्रिलिंग कहते हैं। ड्रिलिंग वह मशीनिंग प्रक्रिया है जिसके द्वारा जिस ठोस पदार्थ में टुल तथा कार्य में से किसी एक को घुमाव गति तथा कटिंग टूल के अक्षिय गति देते हुए drilling क्रिया ड्रिलिंग मशीन पर की जाती है जिसके विपरीत कार्य खंडों के घुमाव गति और कटिंग टूल को अरक्षित गति देते हुए drilling क्रिया लेथ मशीन पर की जाती है ड्रिलिंग ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले कटिंग टूल को ड्रिल वर्मा कहते हैं।
Drill high carbon steel or high speed carbon से बनाए जाते हैं हाई कार्बन स्टील के drill मुलायम धातु के लिए और हाई स्पीड स्टील के drill कठोर धातु के लिए  कारबन टिप वाले बर्मे  प्रयोग किए जाते हैं कार्य के अनुसार निम्नलिखित प्रकार के ड्रिल प्रयोग में लाए जाते हैं:-
  1. चपटा  बर्मा
  2. सीधा नालीदार वर्मा
  3. टेपर सीके का बर्मा
  4. तेल छेद वर्मा
  5. केन्द्र छेद वर्मा

Drilling machine

Drilling operation अर्थात drill से छेद करने के लिए ड्रिल मशीन के spindel में पकड़कर तेज गति से घुमाया जाता है व इस कार्य के लिए प्रयोग की जाने वाली मशीन को ड्रिलिंग मशीन कहते हैं।

करतन चाल एवं प्रभरण (cutting speed and feed)

करतन चाल ड्रिंल की परिधि की चाल से होती है जिसे ब्रिटिश पद्धति में फूट / मिनट और मीट्रिक प्रणाली में मीटर/मिनट में मापा जा सकता है इस प्रकार 1 मिनट में drill  के द्वारा काटी गई धातु की चिप को यदि एक सीधी रेखा में रखकर फुट या मीटर में माप लिया जाए तो वह उसकी कर्तन चाल के बराबर होगी विभिन्न धातुओं के लिए करतन चाल अलग अलग होती है इस करतन चाल को निम्नलिखित सूत्रों द्वारा निकालते  है:-
  • इंच size ki drill (C's) कर्तन चाल= πdn/12 foot per/main.
  • Mitric size drill C's = πdn/1000

प्रभरण (Feed)

ड्रिंल धातु को काटते हुए प्रत्येक चक्र में जॉब की जितनी गहराई तक प्रवेश कर जाती है उसे प्रभरण कहते हैं ।
प्रभरण feed = छेद की गहराई/समय ×RPM =L/TN

शीतलक (coolent)

शितलक का प्रयोग ड्रिलिंग करते समय बहुत महत्वपूर्ण है यदि कुलेंट का प्रयोग ना  किया जाए तो ड्रिल खराब हो सकता है या टूट सकता है जब ड्रिलिंग कर रहे होते हैं तो ड्रिल जॉब के ऊपर रगड़ कर चलता है तब गर्मी उत्पन्न होती है उस गर्मी को दूर करने के लिए कुलेंट का प्रयोग किया जाता है कुलेंट प्राय  तेल या पानी इत्यादि हो सकते हैं। 

ड्रिलिंग के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. ड्रिलिंग ऑपरेशन करते समय जॉब व ड्रिल को मजबूती से पकड़ना चाहिए।
  2. बड़े साइज का छेद करने से पहले छोटे छेद करने चाहिए।
  3. ड्रिल  का कर्तन कोण अच्छी तरह से ग्राइंड किया हुआ होना चाहिए।
  4. जॉब तो धातु के अनुसार उचित पोलैंड का उपयोग उचित मात्रा में करना चाहिए।
  5. कटिंग चिप्स को कभी भी हाथ से साफ नहीं करना चाहिए।
  6. चलती हुई मशीन की चाल को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
  7. गहराई में ड्रिलिंग करते समय Drill को थोड़ी थोड़ी देर में बाहर निकालते रहना चाहिए ताकि चिप्स पूरी तरह से बाहर निकलती रहे।
  8. ड्रिलिंग ऑपरेशन करने के बाद ड्रिल या ड्रिल चैक को मशीन के स्पिंडल से बाहर निकालते के लिए ड्रिल ड्रिफ्ट का प्रयोग करना चाहिए।



Thursday, November 1, 2018

Gauges and template

गेजे क्या है ? और टेंपलेट क्या है? Wh is Gauges and what is template?

                        कारखाने में  जहां अधिक मात्रा में उत्पादन होता है वहां अनेक प्रकार के मापक औजार  इस्तेमाल किए जाते हैं उनमें कुछ ऐसे औजार भी होते हैं जिसमें एक निश्चित साइज ही मापी जा सकती है जिस साइज की माप लेने के लिए वह बनाया जाता है उनके साइज या माप को माइक्रोमीटर (Micrometers) या केलिपर (Calipers)  के समान घटाया बढ़ाया नहीं जा सकता लेकिन ऐसे औजारों से एक कुशल कारीगर ही नहीं बल्कि कोई भी कार्य को सही माप ले सकता है ऐसे मापक को औजारों को गेज कहते हैं।
Filler gauge


गेंजो को मुख्यत तीन भागों में बांटा जा सकता है:-
1 वर्कशॉप गेज
2 इन्सपेक्शन गेज
3 रिफरेन्स गेज
                       गेज अलग-अलग तरह के जॉब बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार की गेज  इस्तेमाल में लाई जाती है जो निम्नलिखित प्रकार की है:-


  •  रेडियस गेज और फिलेट गेज
  • फिलर गेज
  • स्क्रु पीच गेज
  • वायर एवं शीट गेज
  • लिमीट गेज

Wire gauge

लिमिट गैज के प्रकार (Types of limit Gauges)

  1. प्लग गेज
  2. रिंग गेज
  3. स्नेप गेज
  4. केलिपर गेज
  5. गेप गेज
बेवल गेज

  1. यूनिवर्सल बेवल गेज
  2. काॅम्बिनेशन बेवर गेज

6. डेप्थ गेज
7. सेंटर गेज
8. स्लिप गेज इत्यादि।

Filler gauge and snap gauge


गेज का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

  1. गैज को जंग से बचाने के लिए गैज ब्लॉक पर ग्रीस लगाइ  जाती है अतः गैज ब्लॉक का इस्तेमाल करने से पहले उसे सावधानीपूर्वक टिशू पेपर या चेमोस लेदर से अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।
  2. गैज ब्लॉक का इस्तेमाल आवश्यकता से अधिक नहीं करना चाहिए तथा कभी भी उसे हाथ से रगडना नहीं चाहिए हाथ की  नमी से उसकी सतह की परिशुद्धता खराब हो सकती है ।
  3. गैज का इस्तेमाल करते समय हमेशा उसे बगल से पकड़कर उठाना चाहिए।
  4. hard metal पर गैज ब्लॉक  का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उसे खरोच ना पड़े।
  5. अधिक शुद्ध माप लेने के लिए दबाव और तापमान का भी ध्यान रखना चाहिए।
  6. लंबे समय तक गैज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  7. गैजों को गिरने से बचाना चाहिए गेंजो का प्रयोग करने के बाद इनको साफ करके सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए।
  8. यदि गैज का प्रयोग बहुत सारे जॉब के ऊपर किया हुआ हो  तो गैज  के साइज को चेक कर लेना चाहिए।

टेम्पलेट क्या है?what is template?

वर्कशॉप में कई प्रकार के पार्ट्स का उत्पादन किया जाता है कुछ ऐसे होते हैं जिनको स्टेंन्डर ( stander) साइज में बनाया जाता है और उन्हें स्नैप गेज यह रिंग गेज आदि से चेक कर सकते हैं इनके अतिरिक्त कई ऐसे पार्ट होते हैं जिनको टेढ़े मेढ़े आकार में बनाना पड़ता है और ऐसे पार्ट को मार्किंग और चेकिंग करने की आवश्यकता पड़ती है जिनके लिए स्टैंडर्ड साइज की गैज प्रयोग में नहीं  लाई जा सकती है। इसलिए इस कमी को दूर करने के लिए एक उपकरण को बनाया गया है जिसको टेंम्पलेट कहते हैं।

टेंप्लेट को प्राय 2 या 3  मिली मीटर मोटी माइल्ड स्टील की एक प्लेट से जॉब के आकार अनुसार बना दिया जाता है टेंप्लेट को बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसकी धातु अधिक महंगी ना हो इसकी मांपे  सही और इसका डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि कारिगर उसको आसानी से प्रयोग में ला सके।

टेम्पलेट के लाभ Advantage of template

  1. टेम्पलेट के द्वारा अधिक संख्या में पार्ट्स का उत्पादन करते समय  इससे मार्किंग और चिपिंग आसानी से और कम समय में  कि जा सकता है।
  2. इससे कम समय में अधिक पार्ट्स तैयार किए जा सकते हैं।
  3. इसका प्रयोग करने से लेबर का खर्चा कम पड़ता है।
  4. यदि किसी कारणवश टेंप्लेट का डिजाइन जॉब अनुकूल ना हो तो इसे कम लागत में बदला भी जा सकता है।

टेम्पलेट को कैसे प्रयोग किया जाता है use of template

  1. टेम्पलेट का प्रयोग किसी जॉब की निश्चित आकृति को चेक करने के लिए किया जाता है।
  2. एक ही आकृति के जब कई जाॅब बनाए जा रहे हो तो उनको मारकिंग करने के लिए टेंप्लेट का प्रयोग किया जा सकता है और जॉब को बनाने के लिए टेंप्लेट से चेक किया जाता हैं।  

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Vice,first aid,