Monday, October 22, 2018

Marking tools

मारकींग औजार Marking tools

किसी भी वस्तु को सही साइज में बनाने के लिए मार्क करना बहुत ही महत्वपूर्ण है मार्किंग अलग अलग तरह से की जाती है वह वस्तु के माप ड्राइंग व साइज के अनुसार जॉब या किसी वस्तु के ऊपर की जाती है मार्किंग को जॉब की सतह पर रेखाएं खींचते  समय वह बिल्कुल साफ दिखाई देती है साधारण ब्लेक बोर्ड चौक तथा नीले फॉर थे के घोल को मार्किंग मीडिया के रूप में इस्तेमाल किया जाता  अच्छी और सही मार्किंग करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है:-
Blue vitriol

1 मार्किंग प्रारंभ करने से पहले ब्लू प्रिंट या ड्राइंग को अच्छी तरह से पकड़कर समझ लेना चाहिए।
2 जॉब और मापक औजार को यथार्थता के अनुसार उपयुक्त मार्किंग टूल का चुनाव करना चाहिए।
3 ड्राइंग के प्रत्येक विस्तार को बहुत सावधानी से पढ़ लेना चाहिए और उसके अनुसार मार्किंग टूल को सही तरीके से सेट करना चाहिए।
4 बिंदु या डॉट पंच से पक्का निशान लगाते समय पहले एक बार फिर माप को जांच लेना चाहिए।
5 मार्किंग करते समय बिंदु पंच्च से इस तरह मार्कींग करनी चाहिए की कटिंग करते समय वह बिंदु दिखाई नहीं देने चाहिए।

मार्किंग के उद्देश्य या Main Future of marking

1 जॉब बनाते समय मार्किंग रेखाएं कारीगर के लिए गाइडलाइन का कार्य करती है जिससे कि वह जॉब शीघ्र सही साइज का बना सके ।
2 मार्किंग से समय की बचत होती है क्योंकि कारीगर को यह ज्ञान होता है की कटिंग फाइलिंग या मशीनिंग द्वारा धातु को कितनी मात्रा में काटना है।
3 मार्किंग करने के बाद ऑपरेशन के समय में जॉब को बार बार मापने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
4 मार्किंग करने से कारीगर को यह ज्ञान हो जाता है कि जॉब को बनाने के लिए उसे पहले कौन सी क्रिया करनी होगी।

मार्किंग मीडिया के प्रकार types of marking media

मार्किंग करने से पहले जॉब की सतह पर निम्नलिखित  पदार्थ   मार्कींग मीडिया  के रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं:- 
1 साधारण ब्लैक बोर्ड चौक chouk
2 तुतिया नीला थोथा blue vitriol
3 अवीन्याश layout die
4 श्वेत लैप white coating

मार्किंग की विधियां  Method of marking

जॉब पर मार्किंग करने की कई विधियां हैं जिनमें ट्राया निम्नलिखित विद्या प्रयोग में लाई जाती है:- 
1 केंद्र रेखा विधि Centre line method
2 निर्देश रेखा विधि datum line method
3 टेंप्लेट द्वारा मार्किंग करना

मार्किंग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां precaution to be used for marking

1 मार्किंग मीडिया का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जॉब की सतह पर मार्किंग मीडिया की अधिक मोटी तह ना जमने पाए।
2 जॉब की सतह  पर मार्किंग मीडिया का एक समान लेप होना चाहिए।
3 तुतिया blueviriol का प्रयोग करते समय हाथ से नहीं छूना चाहिए ।
4 मार्किंग मीडिया के सूख जाने के बाद मार्कींग करनी चाहिए।

जॉब के ऊपर रेखाएं खींचने वाला औजार स्क्राइवर scriber

जिस प्रकार पेंसिल द्वारा कागज पर रेखाएं खींचते हैं उसी प्रकार धातुओं पर रेखाएं खींचने के लिए स्क्राइबर का प्रयोग किया जाता है ।

यह एक प्रकार का मार्किंग टूल है यह प्राय हाई कार्बन स्टील से बनाए जाते हैं  जिसकी नोंक कठोर एवं टेंपर की होती है इसके प्वाइंट के 12 डिग्री से 15 डिग्री के कोण पर घीसकर  नुकीला  बनाया जाता है इसकी लंबाई 125 से 200 मिली मीटर तक तथा मोटाई  3 से 5 मिलीमीटर रखी जाती है ।आवश्यकता पड़ने पर इनके बीन्दुओं की  शान पत्थर (oil stone) पर घिसकर नूकिला बना लिया जाता है।

स्क्राइबर के प्रकार

1 मुड़ा हुआ स्क्राइबर bent scriber
2 समायोजक स्क्राइवर adustable scriber
3  सीधा स्क्राइबर straight scriber
4 ऑफ सेट स्क्राइवर off set scriber

Scribers


 स्क्राईवर का  प्रयोग करते समय बरती जाने बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 सही मार्किंग करने के लिए स्क्राइबर की नौक की धार तेज रखनी चाहिए।
2 इसकी नोक को कठोर सतह पर ठोकना नहीं चाहिए।
3 उपयोग में ना लाते समय इसके प्वाइंट  पर कार्क लगा देना चाहिए।
4 स्क्राइबर का इस्तेमाल कठोर  सतह पर नहीं करना चाहिए।

अन्य मार्किंग टूल other marking tool

पंच्च ( Punch)

             किसी जॉब को बनाने से पहले दी हुई ड्राइंग के अनुसार उस पर प्राय  स्क्राइबर की सहायता से मार्किंग की जाती है जाब  बनाने के लिए की जाने वाली क्रियाओं के समय उसे बार-बार छुने के कारण मार्किगं मीट सकती है और इसी कारण से इस प्रकार से की गई इस मार्किंग को अस्थाई मार्किंग कहते हैं मिट जाने के डर से कारण इस अस्थाई मार्किंग को स्थाई बनाने की आवश्यकता पड़ती है और इसके लिए एक मार्किंग टूल प्रयोग में लाया जाता है जिसे पंच कहते हैं।
Punch

      पंच के द्वारा हैमर की सहायता से मार्क की गई लाइन पर बिंदु लगा दिया जाता है जिससे की हुई  मार्किंग जॉब बनाने के अंतिम समय दिखाई देती रहती है और इसी कारण इसे स्थाई मार्किंग कहते हैं पंच की देह अष्टभुकार होती है। या उसको बेलनाकार बनाकर नरलिंग किया जाता है हेड और देह तथा प्वाइंट्स के मुख्य भाग होते हैं पंच प्राय  हाई कार्बन स्टील के बनाए जाते हैं और इसके पॉइंट हेड को कठोर तथा टैंपर कर लिया जाता है पंच का साइज़ उसकी पूरी लंबाई एवं  व्यास से प्रकट किया जाता है कार्य के अनुसार पंच निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-

1 Centre punch
2  dot punch
3 prick punch
4 pin punch
5 drift punc
Punchs

6 bell punch
7 holo punch
8 automatically punch
9 solid punch


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