Monday, October 8, 2018

First aid or प्राथमिक चिकित्सा और वर्कशॉप में आग लगने के कारण

First aid or प्राथमिक चिकित्सा

कार्यशाला में काम करते समय कारीगर को लापरवाही से किसी भी प्रकार की कोई दुर्घटना हो जाए और उसे चोट  पहुंचे तो डॉक्टर के आने से पहले जो रोगी को उपचार दिया जाता है या चिकित्सा दी जाती है उस चिकित्सा को प्राथमिक चिकित्सा कहा जाता है।

प्राथमिक चिकित्सा के निर्देश

1 प्राथमिक चिकित्सा करते समय घायल घायल व्यक्ति को देखकर घबराना नहीं चाहिए
2 प्राथमिक चिकित्सा करते समय दुर्घटना के कारण की जानकारी करने के बाद मशीन गैस या बिजली के main switch को बंद करना चाहिए।
3. जहां तक संभव हो तो घायल व्यक्ति घायल व्यक्ति को दुर्घटना स्थल से से हटा देना चाहिए।
4. घायल व्यक्ति के चारों ओर भीड नहीं लगानी चाहिए ।
5. घायल व्यक्ति की शारीरिक लक्षणों के अनुसार ही प्राथमिक चिकित्सा कर लेनी चाहिए।
6. घायल व्यक्ति को यदि रक्तपात हो तो उसे तुरंत रोकने का प्रयास करना चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा के कर्तव्य

1 प्राथमिक चिकित्सा का सबसे पहला कर्तव्य है कि घटनास्थल पर शीघ्र ही डॉक्टर बुलाने की चेष्टा करनी चाहिए।
2 डॉक्टर के आने पर जहां तक संभव हो सके रोग या चोट  के कष्ट को दूर करने की कोशिश करें यदि चोट से खून बह रहा हो तो उसे तुरंत रोकने की कोशिश करनी चाहिए।
3 रोगी या घायल को आराम से लेटा देना चाहिए ताकि वह अच्छी तरह से सांस ले सकें यदि रोगी को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो कृत्रिम श्वास द्वारा श्वास देना चाहिए।
4 पानी का  प्रबंध करना चाहिए और रोगी को थोड़ा सा पिलाकर यदि वह पीने की अवस्था मैं नहीं है तो उसके मुंह  में पानी के छींटे मारने चाहिए।
5 घायल व्यक्ति को गर्म दूध कॉफी आदि देकर उसके शरीर को गर्मी पहुंच आनी चाहिए और साथ में उसके हाथ पांव मसलने चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा का सामान

टीचर आयोडीन , टिंचर बैंजो रन, सप्रींट, पोटेशियम परमेगनेट, डीरोल, सोडा बाइ चुरण,सुघने कानमक,


बरनोल ,दवाई युक्त प्लास्टर,गोल पटटी,रुई, कैंची, चाकू, सेफ्टी पीन, दवाई पिलाने वाला गीलास,बांस की तिलिंया इत्यादि।

वर्कशॉप में आग लगने के कारण

आग लगने के कारण

1 बिजली की तारों के ढीले कनेक्शन।
2 तेज चलने वाले पार्ट के बीच में लुब्रिकेंट का ना होना।
3 तेल के गीले चिथडे जगह-जगह बिखरे होना।
4 कारखाने या वर्कशॉप में धूम्रपान करने से।
5 बिजली के तारों पर ओवरलोड होना।
6 बिजली के शार्ट सर्किट से आग लग सकती है।
7 विस्फोटक पदार्थों को ध्यान से ना रखने पर आग लग सकती है।

आग के प्रकार

खासतौर पर आग चार प्रकार से लग सकती है जो निम्नलिखित है:-

1 बिजली द्वारा आग:- 

         यह आग बिजली से लगती है और इसमें स्टोन कार्बन टेट्रा क्लोराइड का प्रयोग किया जाता है।

2 तेल की आग:-

          तेलिया पदार्थों से लगने वाली आग को क्या कहते हैं यह आग खतरनाक होती है इसे बुझाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इसे फोम फायर एकसटीगयूशर का प्रयोग किया जाता है।

                        Fire extinguisher

3 कार्बोनेशियम  आग:- 

         जो आग लकड़ी के कोयले के या कोयले से जलाई जाती है उसे कार्बोनेशन आग कहते हैं इसे बुझाने के लिए पानी,रेत या मिट्टी का प्रयोग किया जाता है इसके अतिरिक्त इसे बुझाने के लिए soda acid एकसटीगयूशर का प्रयोग किया जाता है।
4 गैस की आग:- 

           गैस द्वारा चलाई गई आग को गैस फायर कहते हैं इसे बुझाने के लिए पानी का प्रयोग किया जाता है।


आग बुझाने के यंत्र

पानी की भरी बाल्टी
रेत की भरी बाल्टी
अगनिशमक 

आग लगने पर कौन सी सावधानियां अपनाएं

1 आग लगने पर आग आगा आग करके पुकारे।
2 वर्कशॉप में कार्य करते समय धूम्रपान ना करें।
3 आग लगने पर अग्निशामक व कारखाने के उच्च अधिकारियों को सूचित करें।
4 मशीन को कॉटन वेश के द्वारा साफ करने के बाद उसे कूड़ेदान में डाल कर ढक्कन से बंद करना चाहिए।
5 मेन स्विच को बंद करके बिजली के प्रभाव को रोक दें।
6 तेल से लगी आग पर पानी ना डालें उसे रेत या गैस से बुझाने का प्रयास करें।
Fire in forest land
8 यदि आग से घिर जाए तो खड़े नहीं रहना चाहिए फर्श पर लेटकर रेंगना चाहिए।
7 बिजली बंद ना हो तो बिजली की तारों पर पानी ना फेंके अगर ऐसा करेंगे तो बिजली का धक्का लगेगा।
9 आग बुझाने के साधनों का उचित प्रबंध करना चाहिए।


No comments:

Post a Comment

Thanks for your advice and valuable time

Vice,first aid,