Tuesday, October 30, 2018

Chisels

छेनियां  क्या है? What is chisels?

      छेणीयों का प्रयोग धातुओं को छीलने एवं काटने के लिए किया जाता है इन्हें उच्च कार्बन इस्पात से फोर्ज (forge) करके बनाया जाता है तथा इनकी देह के अनूप्रस्त परीछेद के अष्टफलक की या षष्टकोणीय रखा जाता है इसके प्रहारी शीर्ष 40 डिग्री से 70 डिग्री के कोण पर रखा जाता है छेणी की फोर्जिंग द्वारा बनाने के बाद इसके निचले सिरे को घीसकर करतनधार (तेज धार वाला अलग सीरा नोंक) बना दी जाती है पर्याप्त चिमडपन एवं कठोरता प्रदान करने के लिए छैणी की करतन धार का कठोर एवं टैंपर कर  लिया जाता है कर्तन धार एवं देह के मध्य वाले भाग को टेपर रखा जाता है।छैणी के चार भाग होते है:-
1. प्रभारी शिर्ष  ( striking head)
2 देह (  body)
3 टेंपर भाग ( tapper part)
4 कटींग सीरा करतनधार ( cutting edge)

chisels
छैनीया

        छैणी का ऊपर वाला भाग शीर्ष होता है जिसे चैंफर कर दिया जाता है बार बार चोट लगाने से यह फैल जाता है जिसे मशरुम शिर्श कहते हैं। ऐसे सिरे कोोोो ग्राइंड करके ठीक होने के बाद ही प्रयोग में लााान चाहिए। छेनी के खो की देह को कठोर एवं टैंपर नहीं किया जाता। करतनधाार के कोण को 35 डिग्री से 70 डिग्री तक बनाया जाता है और या र्न््न्न्न     कोण उस धातु के अनुसार रखा जाता है जिसको की काााााााटना होता है ।साा‌‌ सामान्य धातुओं के लिए यह तो निम्नलिखित प्रकार के रखे जाते हैं:-
1 एलुमिनियम शीशा और जस्त           35 डिग्री
2 तांबा और पीतल                            40 डिग्री
3 पिटवा लोहा                                   50 डिग्री
4 ढलवा लोहा तथा अन्य सामान्य कार्यों के लिए 60 डिग्री
5 ढलवा इस्पात ।                                70 डिग्री


          धातु को ठंडी अवस्था में काटने वाली छैणी को आपात छैणी कहते हैं तथा fitting  कार्य में इन्हीं का प्रयोग किया जाता है। छैणी के साइज को इसकी लंबाई तथा कर्तन धार की चौड़ाई से निर्दिष्ट किया जाता है जैसे 200*25 mm मृदु धातु को काटने के लिए पतली और कठोर धातु के लिए अधिक चौडी करतनधार वाले छैनियों की आवश्यकता होती है यह निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

chisels
तप्त और अपात छैणी

1 तप्त छैणी
2 अपात छैणी

Follow our another blog
Measuring and hiting tools

https://www.bloggeryash.co.in/p/iti-students.html




चिपींग आॅपरेशन what is chipping opration?

चीपींग वह विधि है जिसमें जॉब कि सतह  से धातु की मोटी परत को चिप्स के रूप में काटा जाता है इस विधि में छेनी को हाथ से पकड़ा जाता है और 40 डिग्री के कोण में रखा जाता है साधारण कार्य के लिए छेनी का कटिंग कोण  60 डिग्री का होता है जिससे उसका आधा 30 डिग्री का होगा इस प्रकार जब जैनी को स्तह पर 40 डिग्री के कोण में रखेंगे तो करतन धार को 10 डिग्री का क्लीयरेंस मिल जाएगा और 20 डिग्री के हर एक कोण पर कटिंग होगी जिसमें कार्य आसानी से व ठीक से हो जाएगा।

चिपींग विधी chipping Mathad

1 जॉब को वॉइस के बीच में एक कठोर लकड़ी के टुकड़े का सहारा देकर अच्छी तरह से पकड़ लेना चाहिए।
2 जॉब के सामने वाले किनारे को फाईल से थोड़ा सा चैम्फर कर देना चाहिए जिससे छेनी की धार कटिंग करते समय आसानी से जगह लेती है।
3 वॉइस को बिल्कुल सामने चिपिंग गारड लगा देना चाहिए।
4 छैनी को एक हाथ में पकड़ कर दूसरे हाथ से पकड़ दूसरे हाथ से हत्थे के सिरे के पास पकड़कर चिपिंग शुरू करनी चाहिए।
5 चिपींग करते समय एक साथ अधिक धातु नहीं काटने चाहिए और छैणी की धार पर तेल लगाते रहना चाहिए इसे छैणी का टेंपर  बना रहेगा इसे कटिंग भी अच्छी होगी।
6 कटिंग करते समय छेनी के दूसरे सिरे पर पहुंचने पर भारी चोट नहीं लगानी चाहिए।

छैनी को ग्राईंड करना Grinding of chisels

बार बार प्रयोग करने पर छैनि की धार खराब हो जाती है उसका शीर्ष भी फैल जाता है इसलिए इसे ग्राइंड किया जाता है ग्राइंड करने के लिए निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए:-
1 यदि छेनी का शीर्ष फैल गया हो तो  उसे सही आकार में ग्राइंड करना चाहिए।
2 यदि छेनी की धार खराब हो गई हो तो उसे कटी जाने वाली धातु को अनुसार ही ग्राइंड करना चाहिए।
3 छैणी को अच्छी तरह से पकड़ कर टूल रेस्ट का सहारा देकर ग्राइंड करना चाहिए।
4 छैणी की धार को सीधा ग्राइंड नहीं करना चाहिए।
5 कर्तनधार को ग्राइड करते समय अधिक ताकत लगाकर छैणी को  नहीं दबाना चाहिए और बार-बार पानी के टैंक में छेनी को डूबोडूबो  कर ठंडा करते रहना चाहिए जिससे उस पर  टेंपर बना रहेगा ।

Verniercaliper

छैणी का प्रयोग करते समय प्रयोग में लाई जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 छेनी से कटिंग करते समय तथा  ग्राइंड करते समय चश्मा पहनना चाहिए।
2 यदि छेनी का शीर्ष फैल गया हो तो उसे ग्राइंड कर के प्रयोग में लाना चाहिए।
हथोड़े का प्रयोग
-hammers-

3 छैणी की करतनधार को धातु की कठोरता के अनुसार ग्राइंड करना चाहिए।
4 चीपींग करते इसमें चीपींग गार्ड का प्रयोग करना चाहिए।
5 हथोड़े का हत्था ढीला नहीं होना चाहिए अन्यथा चोट लग सकती है।
6 चीपींग करते समय छेनी की कर्तनधार पर देखना चाहिए ना कि शीर्ष पर।
7 चिपिंग सदैव चल जबड़े की तरफ से स्थिर जबड़े की ओर करनी चाहिए।
8 चीपींग करते समय जॉब को वॉइस का सहारा देकर पकड़ना चाहिए जिससे चीपींग करते समय जॉब नीचे ना खिसक सके।
9 छैनी का शीर्ष या  हथोड़े के मुख पर कोई चिकना पदार्थ नहीं लगा होना चाहिए वरना हथोड़ा फिसलकर हाथ को चोट पहुंचा सकता है।




No comments:

Post a Comment

Thanks for your advice and valuable time

Vice,first aid,