Tuesday, October 30, 2018

Chisels

छेनियां  क्या है? What is chisels?

      छेणीयों का प्रयोग धातुओं को छीलने एवं काटने के लिए किया जाता है इन्हें उच्च कार्बन इस्पात से फोर्ज (forge) करके बनाया जाता है तथा इनकी देह के अनूप्रस्त परीछेद के अष्टफलक की या षष्टकोणीय रखा जाता है इसके प्रहारी शीर्ष 40 डिग्री से 70 डिग्री के कोण पर रखा जाता है छेणी की फोर्जिंग द्वारा बनाने के बाद इसके निचले सिरे को घीसकर करतनधार (तेज धार वाला अलग सीरा नोंक) बना दी जाती है पर्याप्त चिमडपन एवं कठोरता प्रदान करने के लिए छैणी की करतन धार का कठोर एवं टैंपर कर  लिया जाता है कर्तन धार एवं देह के मध्य वाले भाग को टेपर रखा जाता है।छैणी के चार भाग होते है:-
1. प्रभारी शिर्ष  ( striking head)
2 देह (  body)
3 टेंपर भाग ( tapper part)
4 कटींग सीरा करतनधार ( cutting edge)

chisels
छैनीया

        छैणी का ऊपर वाला भाग शीर्ष होता है जिसे चैंफर कर दिया जाता है बार बार चोट लगाने से यह फैल जाता है जिसे मशरुम शिर्श कहते हैं। ऐसे सिरे कोोोो ग्राइंड करके ठीक होने के बाद ही प्रयोग में लााान चाहिए। छेनी के खो की देह को कठोर एवं टैंपर नहीं किया जाता। करतनधाार के कोण को 35 डिग्री से 70 डिग्री तक बनाया जाता है और या र्न््न्न्न     कोण उस धातु के अनुसार रखा जाता है जिसको की काााााााटना होता है ।साा‌‌ सामान्य धातुओं के लिए यह तो निम्नलिखित प्रकार के रखे जाते हैं:-
1 एलुमिनियम शीशा और जस्त           35 डिग्री
2 तांबा और पीतल                            40 डिग्री
3 पिटवा लोहा                                   50 डिग्री
4 ढलवा लोहा तथा अन्य सामान्य कार्यों के लिए 60 डिग्री
5 ढलवा इस्पात ।                                70 डिग्री


          धातु को ठंडी अवस्था में काटने वाली छैणी को आपात छैणी कहते हैं तथा fitting  कार्य में इन्हीं का प्रयोग किया जाता है। छैणी के साइज को इसकी लंबाई तथा कर्तन धार की चौड़ाई से निर्दिष्ट किया जाता है जैसे 200*25 mm मृदु धातु को काटने के लिए पतली और कठोर धातु के लिए अधिक चौडी करतनधार वाले छैनियों की आवश्यकता होती है यह निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

chisels
तप्त और अपात छैणी

1 तप्त छैणी
2 अपात छैणी

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Measuring and hiting tools

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चिपींग आॅपरेशन what is chipping opration?

चीपींग वह विधि है जिसमें जॉब कि सतह  से धातु की मोटी परत को चिप्स के रूप में काटा जाता है इस विधि में छेनी को हाथ से पकड़ा जाता है और 40 डिग्री के कोण में रखा जाता है साधारण कार्य के लिए छेनी का कटिंग कोण  60 डिग्री का होता है जिससे उसका आधा 30 डिग्री का होगा इस प्रकार जब जैनी को स्तह पर 40 डिग्री के कोण में रखेंगे तो करतन धार को 10 डिग्री का क्लीयरेंस मिल जाएगा और 20 डिग्री के हर एक कोण पर कटिंग होगी जिसमें कार्य आसानी से व ठीक से हो जाएगा।

चिपींग विधी chipping Mathad

1 जॉब को वॉइस के बीच में एक कठोर लकड़ी के टुकड़े का सहारा देकर अच्छी तरह से पकड़ लेना चाहिए।
2 जॉब के सामने वाले किनारे को फाईल से थोड़ा सा चैम्फर कर देना चाहिए जिससे छेनी की धार कटिंग करते समय आसानी से जगह लेती है।
3 वॉइस को बिल्कुल सामने चिपिंग गारड लगा देना चाहिए।
4 छैनी को एक हाथ में पकड़ कर दूसरे हाथ से पकड़ दूसरे हाथ से हत्थे के सिरे के पास पकड़कर चिपिंग शुरू करनी चाहिए।
5 चिपींग करते समय एक साथ अधिक धातु नहीं काटने चाहिए और छैणी की धार पर तेल लगाते रहना चाहिए इसे छैणी का टेंपर  बना रहेगा इसे कटिंग भी अच्छी होगी।
6 कटिंग करते समय छेनी के दूसरे सिरे पर पहुंचने पर भारी चोट नहीं लगानी चाहिए।

छैनी को ग्राईंड करना Grinding of chisels

बार बार प्रयोग करने पर छैनि की धार खराब हो जाती है उसका शीर्ष भी फैल जाता है इसलिए इसे ग्राइंड किया जाता है ग्राइंड करने के लिए निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए:-
1 यदि छेनी का शीर्ष फैल गया हो तो  उसे सही आकार में ग्राइंड करना चाहिए।
2 यदि छेनी की धार खराब हो गई हो तो उसे कटी जाने वाली धातु को अनुसार ही ग्राइंड करना चाहिए।
3 छैणी को अच्छी तरह से पकड़ कर टूल रेस्ट का सहारा देकर ग्राइंड करना चाहिए।
4 छैणी की धार को सीधा ग्राइंड नहीं करना चाहिए।
5 कर्तनधार को ग्राइड करते समय अधिक ताकत लगाकर छैणी को  नहीं दबाना चाहिए और बार-बार पानी के टैंक में छेनी को डूबोडूबो  कर ठंडा करते रहना चाहिए जिससे उस पर  टेंपर बना रहेगा ।

Verniercaliper

छैणी का प्रयोग करते समय प्रयोग में लाई जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 छेनी से कटिंग करते समय तथा  ग्राइंड करते समय चश्मा पहनना चाहिए।
2 यदि छेनी का शीर्ष फैल गया हो तो उसे ग्राइंड कर के प्रयोग में लाना चाहिए।
हथोड़े का प्रयोग
-hammers-

3 छैणी की करतनधार को धातु की कठोरता के अनुसार ग्राइंड करना चाहिए।
4 चीपींग करते इसमें चीपींग गार्ड का प्रयोग करना चाहिए।
5 हथोड़े का हत्था ढीला नहीं होना चाहिए अन्यथा चोट लग सकती है।
6 चीपींग करते समय छेनी की कर्तनधार पर देखना चाहिए ना कि शीर्ष पर।
7 चिपिंग सदैव चल जबड़े की तरफ से स्थिर जबड़े की ओर करनी चाहिए।
8 चीपींग करते समय जॉब को वॉइस का सहारा देकर पकड़ना चाहिए जिससे चीपींग करते समय जॉब नीचे ना खिसक सके।
9 छैनी का शीर्ष या  हथोड़े के मुख पर कोई चिकना पदार्थ नहीं लगा होना चाहिए वरना हथोड़ा फिसलकर हाथ को चोट पहुंचा सकता है।




Saturday, October 27, 2018

Combination set and Vernier Bevel Protractor

कम्बीनेशन सेट (Combination set)

पिछले ब्लॉग में है हम पढ़ चुके हैं की दो भुजाओं के बीच बने कोणों की जांच करने   के लिए Try square या बेबल स्कवेयर का प्रयोग करते हैं ।
परंतु इन औजारों की ब्लेड 100 एवं 150mm तक की होती है और यदि अधिक लंबे ब्लेड वाले औजार प्रयोग में लाए जाते हैं तो ये परिशुद्धप माप नहीं दे सकते इसलिए लंबे कार्य खंडो के कोण नापने के लिए इन पर मार्किंग करने एवं गोलाकार जॉब का केंद्र ज्ञात करने के लिए combination set का प्रयोग किया जाता है ।

Combination set


यह फिटिंग एवं मशीन शेप के लिए एक अत्यंत उपयोगी औजार है इस अकेले टूल्स में स्केयर हैंड, प्रोटेक्टर हैंड, सेंटर हेड की व्यवस्था रहती है इन तीनों शिर्षों को स्टील रूल पर वांछित    स्थित में स्थिर करके अलग-अलग कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है इसमें स्टील का बना एक रुल होता है जिसके एक सिरे पर इंच तथा दूसरे सिरे पर सेंटीमीटर व मिलीमीटर के निशान अंकित किए हुए हैं मीट्रिक प्रणाली के लिए उपयोगी रुल के एक सिरे पर सेंटीमीटर तथा दूसरे सिरे पर मिली मीटर के निशान अंकित रहते हैं। यह रूल 20 सेंटीमीटर से 60 सेंटीमीटर तक की विभिन्न लम्बाइयों में मिलते हैं स्टील रूल की चौड़ाई के मध्य में  इसकी संपूर्ण लंबाई के एक आयताकार आकार का खांचा  बना होता है जिसमें लाॅक  स्क्रु और पीन की सहायता से तीनों शीर्षों को पकड़ा जाता है इसका प्रयोग स्टील रूल की तरह  ही मार्किंग करने व मापने के लिए किया जाता है यह प्रायः 12 या 30 मिली मीटर लंबाई वाला रूल प्रयोग में लाया जाता है कॉन्बिनेशन सेट का साइज भी इसके रूल या ब्लेड की लंबाई के अनुसार प्रकट किया जाता है जैसे कंबीनेशन 300 मिली मीटर इत्यादि।

combination set का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 combination set या इसके किसी विभाग को चोट लगने से व गिरने से बचाना चाहिए अन्यथा इसकी परिषद का में अंतर आ जाता है।
2 प्रयोग करने से पहले इसे अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए।
3 इसका प्रयोग किसी भी खुरदरी सतह पर नहीं करना चाहिए।
4 कंबीनेशन सेट को कटिंग टूल के साथ नहीं रखना चाहिए।
5 ब्लेड को सेट के किसी भाग पर सेट करके ना तो अधिक कसे और ना ही ढीला छोड़े।
6 कार्य में प्रयोग करते समय इसका केवल एक ही हैड इस्तेमाल करना चाहिए और शेष शिर्षों को संभाल कर अलग रख देना चाहिए।
7 कार्य खत्म हो जाने के बाद इसे अच्छी तरह से साफ करके उचित स्थान पर रखना चाहिए।

वर्नियर बेवल प्रोट्रैक्टर (Vernier Bevel Protractor)

यह कोण मापने का एक बारीक औजार है इसमें एक वर्नियर स्केल लगा होता है जिसकी जिसकी सहायता से इसके द्वारा किसी कोण की माप 1/2 इंच (1 to 12) अर्थात 5 मीनट की परिशुद्धता में ले सकते है
वर्नियर बेवल प्रोट्रैक्टर के 6 प्रधान अंग होते हैं:-
1 Base or stock
2 Disc or Main Scale
3 Dail clamping nut
4 Dail
5 Blade
6 Blade clamping screw

Vernier Bevel Protractor


वर्नियर बेवल प्रोट्रैक्टर का अल्पतमांक (list count Vernier Bevel Protractor)

वर्नियर बेवल प्रोट्रैक्टर का अल्पतमांक 1/2 डिग्री = 5 मीनट होता है।

अलपअल्पत =   main scale के 1 भाग का मान    
                       वर्नियर स्केल के एक खाने की संख्या

   =  1/2 डिग्री = 5 मीनट।

वर्नियर बेवल प्रोट्रैक्टर को प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 vernier bevel protractor एक सूक्ष्म मापी उपकरण है इसलिए इसे कटिंग टूल के साथ नहीं रखना चाहिए।
2 इसका प्रयोग रफ़ सरफेस पर नहीं करना चाहिए।
3 आवश्यक हो तो रीडिंग लेते समय  मैग्नीफाइंग गिलास का प्रयोग करना चाहिए।
4 करने के बाद उसे अच्छी तरह साफ करके रखना चाहिए।


Thursday, October 25, 2018

Measuring tools Calipers

केलिपर Calipers

 Caliper एक अप्रत्यक्ष मापक औजार है जिसका प्रयोग स्टील रूल की सहायता से किसी जॉब या कार्य की लंबाई चौड़ाई मोटाई और व्यास आदि का माप लेने के लिए किया जाता है कलीपर प्राय: हाई कार्बन स्टील या मृदु इस्पात के बनाए जाते हैं इसके की माप लेने वाले सीरों को कठोर एवं पायन किया जाता है। हाई कार्बन स्टील वाले कैलिपर एवं पृष्ठ कठोरी कृत मृदु इस्पात वाले कैलिपर्स को कठोरी क्रीत कर दिया जाता है !

Measuring tools Calipers


कैलिपर का साइज उनकी कीलक पिन या रीीीीबेट के केंद्र से माप लेने वाली सिरे त्तक की दूसरी दूरी से प्रकट किया जाता है कैलिपर विभिन्न विभिन्न वस्तुओं की रीीीी भितरी  एवं बाहरी मापी को नापने तथा स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।



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कैलिपर के प्रकार types of caliper

कैलिपर्स को प्राय: रूल के ऊपर लगे निशानों से इंच या एम एम  माप कर कैलीपर को जितना चाहे उतना माप ले सकते हैं
Try square and ruler

Inside and outside calipers


1 बाहरी कैलीपर outside caliper
2 भीतरी कैलीपर  inside caliper
3 जेनी कैलीपर Jenny caliper

1 बाहरी कैलीपर:- 

 बाहरी केलिपर गोल वस्तु के बाहरी व्यास एवं लंबाई तथा चौड़ाई नापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है यह 100 से 150 ,200 और 300 एम एम साइज के मिलते हैं कैलिपर की क्षमता वह अधिकतम माप है जो उसे ली जा सकती है और साइड कैलिपर दो प्रकार के होते हैं साधारण कैलीपर स्प्रिंग कैलिपर।

2 भीतरी कैलीपर:- 

भितरी मापों  के लिए उपयोगी कैलिपर को इन साइड कैलिपर कहते हैं। तथा इनका का मुख्य उपयोग भीतरी ता विस तारों को सेट करने उनका कार्य वस्तु पर स्थानांतरित करने या मानकों के साथ जांच लेने के लिए किया जाता है यह कैलिपर्स भी 75 100 150 200 और 300 एम एम साइज में मिलते हैं यह कैलिपर्स भी दो प्रकार के होते हैं दृृड  संधि भीतरी कैलिपर्स , भीतरी  सप्रीींंग कैलिपर्स।

Micrometers

3 जेनी कैलीपर:-

इन्हें विष्मपाद coddlag या हर्माफ्रोडाइट  (harmaphorodite ) कैलिपर्स भी कहते हैं यह  मृदु इस्पात mild steel का बना होता है तथा घीसने से बचाने के लिए इसके पवांइट  का पृष्ठ कठोरन किया हुआ रहता है।
Jenny odd leg and adj.jenny calipers

इसकी एक टांग को विभाजक की तरह सीधी एवं नुकीली होती है परंतु दूसरी टांग का  प्वाइंट    3 से 6 सेंटीमीटर के करीब अंदर की ओर मुड़ा रहता है दोनों टांगों के ऊपर की ओर चौड़ी  तथा पॉइंट की तरफ पतली होती जाती है दोनों टांगें एक दूसरे के साथ रिबेट और वाशर द्वारा कसी रहती है रिवेट ऐसा होता है कि हल्के दाब के द्वारा दोनों टांगों को समायोजित किया जा सकता है सीधे पॉइंट की बनावट के अनुसार जैनी कैलिपर निम्न प्रकार के होते हैं:-
1 ठोस नोक जैनी कैलीपर: किि इसकी  की कार्य कारी  नोंक सीधी टांग से ही बनी होती है।
2 समायोजित नोक जैनी कैलिपर : इनकी कार्यकारि नोंक समायोजित करने योग्य होती है यह समायोजित करने योग्य नोंक सीधी टांग में लगे स्क्रु  के छेद में खीसकती  है जिससे नट को कसकर टांग के साथ आवश्यक स्थिति में कसा जा सकता है इसे मध्य नोंक जैनी कैलिपर भी कहा जाता है।





Monday, October 22, 2018

Marking tools

मारकींग औजार Marking tools

किसी भी वस्तु को सही साइज में बनाने के लिए मार्क करना बहुत ही महत्वपूर्ण है मार्किंग अलग अलग तरह से की जाती है वह वस्तु के माप ड्राइंग व साइज के अनुसार जॉब या किसी वस्तु के ऊपर की जाती है मार्किंग को जॉब की सतह पर रेखाएं खींचते  समय वह बिल्कुल साफ दिखाई देती है साधारण ब्लेक बोर्ड चौक तथा नीले फॉर थे के घोल को मार्किंग मीडिया के रूप में इस्तेमाल किया जाता  अच्छी और सही मार्किंग करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है:-
Blue vitriol

1 मार्किंग प्रारंभ करने से पहले ब्लू प्रिंट या ड्राइंग को अच्छी तरह से पकड़कर समझ लेना चाहिए।
2 जॉब और मापक औजार को यथार्थता के अनुसार उपयुक्त मार्किंग टूल का चुनाव करना चाहिए।
3 ड्राइंग के प्रत्येक विस्तार को बहुत सावधानी से पढ़ लेना चाहिए और उसके अनुसार मार्किंग टूल को सही तरीके से सेट करना चाहिए।
4 बिंदु या डॉट पंच से पक्का निशान लगाते समय पहले एक बार फिर माप को जांच लेना चाहिए।
5 मार्किंग करते समय बिंदु पंच्च से इस तरह मार्कींग करनी चाहिए की कटिंग करते समय वह बिंदु दिखाई नहीं देने चाहिए।

मार्किंग के उद्देश्य या Main Future of marking

1 जॉब बनाते समय मार्किंग रेखाएं कारीगर के लिए गाइडलाइन का कार्य करती है जिससे कि वह जॉब शीघ्र सही साइज का बना सके ।
2 मार्किंग से समय की बचत होती है क्योंकि कारीगर को यह ज्ञान होता है की कटिंग फाइलिंग या मशीनिंग द्वारा धातु को कितनी मात्रा में काटना है।
3 मार्किंग करने के बाद ऑपरेशन के समय में जॉब को बार बार मापने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
4 मार्किंग करने से कारीगर को यह ज्ञान हो जाता है कि जॉब को बनाने के लिए उसे पहले कौन सी क्रिया करनी होगी।

मार्किंग मीडिया के प्रकार types of marking media

मार्किंग करने से पहले जॉब की सतह पर निम्नलिखित  पदार्थ   मार्कींग मीडिया  के रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं:- 
1 साधारण ब्लैक बोर्ड चौक chouk
2 तुतिया नीला थोथा blue vitriol
3 अवीन्याश layout die
4 श्वेत लैप white coating

मार्किंग की विधियां  Method of marking

जॉब पर मार्किंग करने की कई विधियां हैं जिनमें ट्राया निम्नलिखित विद्या प्रयोग में लाई जाती है:- 
1 केंद्र रेखा विधि Centre line method
2 निर्देश रेखा विधि datum line method
3 टेंप्लेट द्वारा मार्किंग करना

मार्किंग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां precaution to be used for marking

1 मार्किंग मीडिया का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जॉब की सतह पर मार्किंग मीडिया की अधिक मोटी तह ना जमने पाए।
2 जॉब की सतह  पर मार्किंग मीडिया का एक समान लेप होना चाहिए।
3 तुतिया blueviriol का प्रयोग करते समय हाथ से नहीं छूना चाहिए ।
4 मार्किंग मीडिया के सूख जाने के बाद मार्कींग करनी चाहिए।

जॉब के ऊपर रेखाएं खींचने वाला औजार स्क्राइवर scriber

जिस प्रकार पेंसिल द्वारा कागज पर रेखाएं खींचते हैं उसी प्रकार धातुओं पर रेखाएं खींचने के लिए स्क्राइबर का प्रयोग किया जाता है ।

यह एक प्रकार का मार्किंग टूल है यह प्राय हाई कार्बन स्टील से बनाए जाते हैं  जिसकी नोंक कठोर एवं टेंपर की होती है इसके प्वाइंट के 12 डिग्री से 15 डिग्री के कोण पर घीसकर  नुकीला  बनाया जाता है इसकी लंबाई 125 से 200 मिली मीटर तक तथा मोटाई  3 से 5 मिलीमीटर रखी जाती है ।आवश्यकता पड़ने पर इनके बीन्दुओं की  शान पत्थर (oil stone) पर घिसकर नूकिला बना लिया जाता है।

स्क्राइबर के प्रकार

1 मुड़ा हुआ स्क्राइबर bent scriber
2 समायोजक स्क्राइवर adustable scriber
3  सीधा स्क्राइबर straight scriber
4 ऑफ सेट स्क्राइवर off set scriber

Scribers


 स्क्राईवर का  प्रयोग करते समय बरती जाने बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 सही मार्किंग करने के लिए स्क्राइबर की नौक की धार तेज रखनी चाहिए।
2 इसकी नोक को कठोर सतह पर ठोकना नहीं चाहिए।
3 उपयोग में ना लाते समय इसके प्वाइंट  पर कार्क लगा देना चाहिए।
4 स्क्राइबर का इस्तेमाल कठोर  सतह पर नहीं करना चाहिए।

अन्य मार्किंग टूल other marking tool

पंच्च ( Punch)

             किसी जॉब को बनाने से पहले दी हुई ड्राइंग के अनुसार उस पर प्राय  स्क्राइबर की सहायता से मार्किंग की जाती है जाब  बनाने के लिए की जाने वाली क्रियाओं के समय उसे बार-बार छुने के कारण मार्किगं मीट सकती है और इसी कारण से इस प्रकार से की गई इस मार्किंग को अस्थाई मार्किंग कहते हैं मिट जाने के डर से कारण इस अस्थाई मार्किंग को स्थाई बनाने की आवश्यकता पड़ती है और इसके लिए एक मार्किंग टूल प्रयोग में लाया जाता है जिसे पंच कहते हैं।
Punch

      पंच के द्वारा हैमर की सहायता से मार्क की गई लाइन पर बिंदु लगा दिया जाता है जिससे की हुई  मार्किंग जॉब बनाने के अंतिम समय दिखाई देती रहती है और इसी कारण इसे स्थाई मार्किंग कहते हैं पंच की देह अष्टभुकार होती है। या उसको बेलनाकार बनाकर नरलिंग किया जाता है हेड और देह तथा प्वाइंट्स के मुख्य भाग होते हैं पंच प्राय  हाई कार्बन स्टील के बनाए जाते हैं और इसके पॉइंट हेड को कठोर तथा टैंपर कर लिया जाता है पंच का साइज़ उसकी पूरी लंबाई एवं  व्यास से प्रकट किया जाता है कार्य के अनुसार पंच निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-

1 Centre punch
2  dot punch
3 prick punch
4 pin punch
5 drift punc
Punchs

6 bell punch
7 holo punch
8 automatically punch
9 solid punch


Saturday, October 20, 2018

सर्फेस प्लेट (Surface plate)

किसी भी जॉब के ऊपर मार्किंग या सही माप लेने के लिए प्रयोग होने वाली सर्फेस प्लेट (Surface Plate)

सरफेस प्लेट का प्रयोग किसी भी जॉब की मार्किंग करने के लिए जॉब को सरफेस प्लेट के ऊपर रखकर की जाती है सरफेस प्लेट प्राय: वर्गाकार या आयताकार  होती है।
आयताकार सरफेस प्लेट


अन्य कार्य भी जाब  को सरफेस प्लेट के ऊपर रखकर के किए के किए जाते हैं । जैसे marking, checking, आम कार्य जैसे माप लेना या जॉब को अलग-अलग भागों में बांटना और सरफेस गेज को इसके ऊपर रख कर के भी मार्कींग की जाती है सरफेस प्लेट अलग अलग धातु और अलग-अलग पदार्थों की बनी होती है प्राय 50 * 50 सेंटीमीटर और मोटाई 2. 5 सेंटीमीटर से 5 सेंटीमीटर और 100*100 सेंटीमीटर और मोटाई 5 से 7.5 सेंटीमीटर वाली सर्फेस प्लेट बनाई जाती है और प्रयोग में लाई जाती है
लकड़ी की सरफेस प्लेट

पदार्थ के अनुसार  सरफेस प्लेट निम्नलिखित प्रकार की होती है:-
1 ढलवा लोहे की सरफेस प्लेट cast iron surface plate
2   संगमरमर की सरफेस प्लेट granite surface plate
3 सीसे की सरफेस प्लेट glass surface plate
सीसे की सर्फेस प्लेट

सरफेस प्लेट का उपयोग Use of surface plate

1 सरफेस प्लेट पर जॉब को रखकर वर्नियर ऊंचाई गेज तथा मार्किंग ब्लॉक की सहायता से जॉब को सही और सीधे किनारे के समानांतर रेखाएं खींचने और एक जोड़ा वॉइस ब्लॉक रखकर तथा क्लेम्प की सहायता से गोल जॉब को पकड़कर इसका केंद्र ज्ञात किया जाता है।

2 सरफेस प्लेट की सहायता से किसी जॉब की  स्पाटता flatness की जांच की जाती है।
3 सरफेस प्लेट पर जॉब को रखकर बर्नियर ऊंचाई गेज की सहायता से इस का माप लिया जा सकता है।
4 सरफेस प्लेट पर जॉब को रख कर वर्नियर ऊंचाई गेज  डायल इंडिकेटर तथा सरफेस गेज की सहायता से  जॉब की विपरीत दिशा में या स्तहो में एक आपस में समानांतर होने की जांच तथा मार्कींग की जाती है।
5 जॉब के कोणों की सतह का सही माप लेने या इनके सही होने की जांच करने के लिए प्लेट पर साइन बार को सेट किया जाता है।
Hacksaw frame

सर्फेस प्लेट का प्रयोग करते समय प्रयोग होने वाली सुरक्षा सावधानियां 

1 सरफेस प्लेट के ऊपर कटिंग टूल को नहीं रखना चाहिए वरना उसकी परिशुद्धता समाप्त हो जाएगी।
2 कार्य प्रारंभ करने से पहले प्लेट को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए।
3 सरफेस प्लेट को उपयोग में ना लाते समय प्लेट की सतह को अच्छी तरह से साफ करके इस पर तेल या ग्रीस की पतली परत लगाकर लकड़ी के ढक्कन से ढककर सुरक्षित रखना चाहिए।
4 सरफेस प्लेट के ऊपर जॉब को रख कर उस पर पंच से स्थाई मार्कींग नहीं करनी चाहिए।
5 रेत तथा गर्म लोहे आदि को सरफेस प्लेट के ऊपर नहीं रखना चाहिए।

किसी भी गोल जॉब को पकड़ने के लिए प्रयोग होने वाला औजार बी ब्लॉक। (V Block)

गोल आकार के कार्य वस्तुओं की मार्किंग marking तथा फीनिशिंग  ऑपरेशन finishing operations जैसे ड्रीलिंग drilling सर्फेस ग्राइंडिंग surface grainding मीलिंग व फेसिंग milling and facing आदि  करते समय उन्हें सहारा देकर पकड़ने की जरूरत होती है तथा इन कार्यों के लिए बी ब्लॉक V Block बहुत उपयोगी है ।
वी ब्लॉक

गोल जॉब के इसके V खांचे में रखकर क्लैंम्प द्वारा कसकर मार्किंग एवं फीनिशिंग आसानी से की जा सकती है वह प्राय  ढलवा लोहे के बनाए जाते हैं या मृदु इस्पात से बना कर इसका पृष्ठ कठोरन कर लिया जाता है या आयताकार का एक ब्लॉक होता है जिसकी प्रत्येक स्तह  दूसरी के साथ सामान अंतर और ठीक से मशीन एवं ग्राइंड की हुई होती है। साधारण ब्लॉकों की केवल एक ही स्तर पर खांचा कटा होता है वी ब्लॉक V Block ड्रीमिंग व ग्राइंडिंग Driming and grainding मशीन क्रियाओं तथा मार्किंग करने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण यंत्र है।

वी ब्लौक (V Block) का प्रयोग कैसे करते हैं?

 1  बी ब्लॉक का प्रयोग मार्किंग करते समय गोलाकार के जॉब को सहारा देकर पकड़ने के लिए किया जाता है।
2 किसी गोल आकार के जॉब पर ड्रिलिंग सर्फेस ग्राइंडिंग मीलिंग व फेसिंग आदि मशीनिंग संक्रियाए करते समय उसे सहारा देने और पकडने के लिए वी ब्लॉक का प्रयोग किया जाता है।
V block

3 वी ब्लॉक का प्रयोग साइज़ के अनुसार लंबाई चौड़ाई और ऊंचाई से प्रकट किया जाता है।

बी ब्लॉक की परी शुद्धता कैसे करते हैं?

एक परिशुद्ध प्लेट को अच्छी तरह से साफ करके इसके ऊपर एक ही साइज की दो वी ब्लॉकों को एक ही सीध में रखकर इनके ऊपर एक बेलनाकार परीक्षण छड़ जिसे परी शुद्धता से टर्निंग करके बनाया गया हो के ऊपर रख कर उसके दोनों सिरों की dial test indicator से चेक करना चाहिए यदि दोनों सिरों की रीडिंग एक समान ही प्राप्त होती है तो ब्लॉक की परिशुद्धता  को सही या Accurate समझना चाहिए
Vernier caliper

वी ब्लॉक के साथ कार्य करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां(V Block)

1 कार्य करने से पहले और बाद में वी ब्लॉक को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।
2 बी ब्लॉक को गिरने से बचाना चाहिए।
3  वी ब्लॉक की सतह पर खरोच पड़ने से बचाना चाहिए।
4 प्रयोग ना करते समय इन पर तेल या ग्रीस लगाकर इसके निजी स्थान या सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
5 लंबे कार्य को सहारा देने के लिए एक ही साइज के दो बी ब्लॉकों का प्रयोग करना चाहिए।

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Thursday, October 18, 2018

Try square गुनिया

ट्राई स्कवेयर या इंजीनियर स्कवेयर try square

ट्राई स्कवेयर को इंजीनियर स्कवेयर भी कहा जाता है। यह एक मापक औजार है जिसका प्रयोग जॉब के समकोण को चेक करने के लिए व जॉब की ऊपरी स्तर की समतलता को चेक करने के लिए तथा किसी भी जॉब को मापने के लिए ट्राई स्क्वायर का प्रयोग किया जाता है। इसमें कार्बन इस्पात ( हाई कार्बन स्टील) की एक पत्ती होती है जिसे ब्लेड कहते हैं मृदु इस्पात या (माइलस्टोन ) ढलवा लोहे के स्टॉक के एक सिरे पर 90 डिग्री का कोण बनाते हुए जुड़ी रहती है बलेड 10 सेंटीमीटर से 30 सेंटीमीटर लंबा तक होता है और इसकी स्तर पर सैंटीमीटर एवं मिलीमीटर या इंच के चिन्ह  अंकित होते हैं बलेड प्लेन भी होती है 15 सेंटीमीटर लंबे ब्लेड को 10 सेंटीमीटर लंबे स्टॉक से लगाया जाता है।


Try square


ब्लेड के दोनों किनारों को पूरी लंबाई में सीधा रखा जाता है यह औजार वर्कशॉप कि प्रत्येक शॉप में प्रयोग किया जाता है इसका प्रयोग समानांतर रेखाएं खींचने व उनकी जांच करने के आपस में लंब रेखाएं खींचने तथा किसी प्रकार की पहली खींची हुई रेखाओं की वास्तविक जांच करने के लिए भी किया जाता है ।

 ब्लेड
बीम
Try square

कार्य के अनुसार प्रायर निम्नलिखित प्रकार के ट्राई स्क्वायर प्रयोग किए जाते हैं:-
1 स्थिर ट्राई स्कवेयर fixed try square
2 समायोजक ट्राई स्कवेयर adj.try square
3 डाई मेकर स्केवर dai maker square
4 एवं स्कवेयर  L square

ट्राई स्कवेयर के भाग (Parts of Try square)

 ट्राई स्क्वायर के 2 भाग होते हैं नंबर 1 स्टोर या बीम दूसरा ब्लेड

Try square को प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 ट्राई स्क्वायर को कटिंग टूल के साथ मिलाकर नहीं रखना चाहिए ।
2 कार्य करने से पहले वह बाद में इसे अच्छी तरह से साफ करना चाहिए ।
3 ईसे गिरने से बचाना चाहिए ।
4  इसे कभी भी हथोड़ा की तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए ।
5 इसके ब्लेड को पेशकश की तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए  6 ट्राई स्क्वायर का प्रयोग करते समय इसके ब्लेड को जॉब कि सतह पर रखना नहीं चाहिए बल्कि उठा उठा कर धीरे से रखकर जांच करनी चाहिए।
7 जब ट्राई स्क्वेयर को इस्तेमाल ना करना हो तो इस पर हल्के ग्रेड का तेल लगाकर इसके निजी स्थान पर रख देना चाहिए।

वर्कशॉप में कार्य करते समय हथोड़े 🔨 hammer का प्रयोग भी किया जाता है

      कार्यशाला या वर्कशॉप में कार्य करते समय कारीगर को विभिन्न प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं और प्राय ऐसे कार्य जिनमें किसी वस्तु या धातु को ठोकना पीटना पड़ता है जिसके लिए एक चोट लगाने वाले औजार जिसे हैमर या हथौड़ा कहते हैं की आवश्यकता पड़ती है।  हथोड़ा वर्कशॉप तथा दैनिक जीवन में कहीं ना कहीं प्रयोग किया जाता है यह वर्कशॉप का बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक औजार है इसके फोरजिंग ,चिपिंग, रिवेटिंग ,मार्किंग, कील ठोकने के लिए एवं निकालने के लिए व टेढ़े मेढ़े जॉब को सीधा करने के लिए प्रयोग किया जाता।
Hammer

हैमर हथौडे का प्रयोग कार्य के अनुसार इसके इसके भार आकार के अनुसार अलग-अलग जगह पर इसका प्रयोग किया जाता है।

हथौड़े के प्रकार types of 🔨 hammer

1 Ball peen hammer 
2 cross peen hammer 
3 straight peen hammer सिधा हत्था
4 double pen hammer दोहरा मुख हत्था
5 claw 🔨 hamnha जंबूरी हत्था
6 soft hammer मृदु हत्था इत्यादि।

हथौडे hammer  को फिट करने की विधि

हथौड़े के हत्थे को नेत्र छीदृ eye hole में ठीक किया जाता है तथा प्राय मजबूत लकड़ी का बना होता है जिसके एक सिरे को रास्प कट rasp cut फाइल को रगड़ कर टेपर  कर लिया जाता है और wedge अनुसार लंबा चौड़ा खांचा काट लिया जाता है ।
खांचे का eye hole नेत्र छीदृ अंडा आकार का बना होता है इसकी आकृति का लाभ है कि चोट लगाते  समय  हत्था ✋ हाथ  में न घुमें हत्थे के हेंडल  की औसत लंबाई 25 से मी से  32 सेंटीमीटर तक रखनी चाहिए और  स्लेज हैमर के हत्थे  की लंबाई किराया 60 से 90 सेंटीमीटर तक रखी जाती है।

 🔨 Hammer या हत्थे का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 कार्य प्रारंभ करने से पहले यह चेक कर लेना चाहिए कि हैमर या हथौड़ा के मुख्य हत्थे पर तेल या ग्रीस नहीं लगी होनी चाहिए 
2 हत्थे का हैंडल ढीला नहीं होना चाहिए ऐसा होने पर वेज wedge को ठीक कर फिट करना चाहिए।
3  बिना wedge  के हैमर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
4 काम करते समय यदि हैमर का फेस फेल जाए तो उसे मशरूम से ग्राइंड या रगड लेना चाहिए।
 5 टूटे हत्थे  या फैले मुख वाले हैमर का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

6 पूरी चोट  देने के लिए हत्थे को आखिर सिरे पर पकड़ना चाहिए ।
7 कार्य करते समय हैमर को उसके हत्थे के सिरे से लगभग 15 से 25 मिलीमीटर छोड़ कर पकड़ना चाहिए ।
8 हत्थे से चोट लगाते समय चोट पढ़ने वाले स्थान को देखना चाहिए ना कि हेमर की ओर देखना चाहिए ।कार्य करते समय हत्थे वाले wedge को समय-समय पर जांच लेना चाहिए कि वह ठीक है या नहीं।
9 हैमर का हत्था गांठ वाला व फटा हुआ नहीं होना चाहिए ।
10 कार्य की प्रवृत्ति के अनुसार हैमर का चयन करना चाहिए।





Tuesday, October 16, 2018

वर्कशॉप या कार्य करते समय प्रयोग होने वाले औजार वर्नियर कैलिपर (Vernier Caliper)

वर्कशॉप या कार्य करते समय प्रयोग होने वाले औजार वर्नियर कैलिपर Vernier Caliper

       

                            यह एक प्रकार का सूक्ष्म मापी यंत्र है जिस का अविष्कार फ्रांस में रहने वाले एक व्यक्ति  वेरी वर्नियर  नामक व्यक्ति ने 1630 में किया था ।


Vernier caliper

                       Vernier caliper की सहायता से किसी जॉब के बाहरी भीतरी 0.02 एम एम गहराई के एम एम mmमें मापा जाता है ब्रिटिश प्रणाली 0.001 इंच के परी शुद्धता में एक साथ मापा जाता है क्योंकि यह पराया मीट्रिक तथा ब्रिटिश दोनों ही प्रणाली में अंकित होते हैं यह निकल स्टील के बने होते हैं तथा मीट्रिक प्रणाली में 150 एमएम 300 एमएम एवं ब्रिटिश प्रणाली में 6 इंच 12 इंच तक की साइज में पाए जाते हैं।


वर्नियर कैलिपर के दो अनुरूप फाइलों के अल्पतमांक के lest count के अंतर के आधार पर बनाया गया है जिसमें एक मेन फाइल और दूसरा वर्नियर स्केल होता है मेंन स्केल के एक खाने का मान और 1वर्नियर के एक खाने का मान लेकर अल्पआत्मांक निकाला जाता है।

वर्नियर कैलीपर के भाग

1 बीम main scale
 2 स्थिर जाॅ fixed jaw
3 चल जाॅ  movable jaw
4 vernier scale 

5 loking screw 
6 line adjusting screw
7 inner maseuring etc.
8 file adjusting unit
9 depth strip

वर्नियर कैलिपर के साथ कार्य करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 वर्नियर कैलीपर एक सूक्ष्म और सही मापने वाला यंत्र है इसलिए इसे बहुत ध्यानपूर्वक प्रयोग में लाना चाहिए।
2 वर्नियर कैलीपर को कटिंग टूल के साथ नहीं रखना चाहिए।
3 इस पर चोट आदि नहीं लगानी चाहिए क्योंकि ऐसा करने पर यह जल्दी खराब हो सकता है।
4 कोई भी माप लेने से पहले वर्नियर कैलिपर को सही तरीके से चेक कर लेना चाहिए।
5 वर्नियर कैलीपर जॉब को साइज के अनुसार चुनना चाहिए।
6 sliding जाॅ आदि मेन बीम पर  ढीले नहीं होनी चाहिए यदि ऐसा हो तो बोरिंग पती को ठीक कर ले।
8 रीडिंग लेते समय जॉब पर ना तो अधिक दवाब देना चाहिए और ना ही लिंकिंग स्क्रू को टाइट करना चाहिए।
9 कार्य पूरा होने के बाद इसको साफ करके  हल्का सा तेल लगा देना चाहिए।
10 माप लेते समय वर्नियर कैलीपर की परिशुद्धता  देख लेनी चाहिए।
11 वर्नियर कैलीपर को चलती मशीन के  ऊपर कभी भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कार्यशाला या वर्कशॉप में कार्य करते समय प्रयोग होने वाले मापक औजार

           कारखाने या वर्कशॉप में उत्पादन माप पर आधारित रहता है जब किसी वस्तु पर कार्य किया जाता है व उसको एक ही साइज में बनाया जाता है एक ही साइज को बनाने के लिए माप की जरूरत होती है। और माप लेने के लिए मापक औजारों का प्रयोग किया जाता है परंतु वह बारीक माप नहीं देते हैं ऐसे औजारों को साधारण मापक औजार कहते हैं और कुछ औजार सूक्ष्म माफी औजार होते हैं जिन्हें की सूक्ष्म मापी औजार भी कहते हैं

Vernier caliper

 इन औजारों से छोटे से छोटा माप लिया जाता है वर्नियर कैलिपर ,उंचाई गेज, माइक्रोमीटर तथा वर्नियर बेवल ,चांदा इस वर्ग में आते हैं सभी प्रकार के साधारण तथा सूक्ष्म मापी औजार कोतीन भागों में विभाजित कर सकते हैं:-

1 लंबाई ,चौड़ाई ,मोटाई ,गहराई ,ऊंचाई मापने वाले औजार जैसे रूल कैलिपर्स, वर्नियर कैलिपर्स ,माइक्रोमीटर ,वर्नियर गहराई व ऊंचाई गेज आदि।
2  कोण मापने वाले औजार जैसे कोण चांदा, वर्नियर बेवल चांदा तथा साइन वार आदि।
3 सत्तह  की जांच करने वाले औजार जैसे गुनिया try square, surface plate, surface guige, Dail indicator, आदि।

साधारण मापक औजार simple measuring tools

Rule :-
                यह लकड़ी तथा धातु का बना एक मापक औजार है यह जिस पदार्थ का बना होता है उसी पदार्थ के नाम से इसका नाम पड़ता है जैसे इस्पात का रूल ,लकड़ी का रूल ,पीतल का रूल इत्यादि प्रत्येक रूल पर निशान भी एक प्रकार के नहीं होते प्रत्येक कंपनी का अपना-अपना मानक संयोजन होता है जिसके अनुसार कंपनियां रूल पर इंच ,सेंटीमीटर अथवा मिलीमीटर के भागों के चिन्ह करती है।

रूल के प्रकार types of rule

rule
 steel rule,
मानक स्टील रूल 
लचीला Steel rule
संकीर्ण narrow steel rule

हुक रूल 
चाबी पीठ रूल
छोटा रूल
 स्टील टेप रूल
 स्टील टैप
फोल्डिंग स्टील रूल 
संकुचन रूल
 स्केल रूल आदि।

लंबाई के मापक

मिलीमीटर, सेंटीमीटर ,इंच, फुट ,मीटर, किलोमीटर
1 mm= .03937 " (inch)
1 cm= 10 mm
1 inch (")=25.4 mm
1 inch   =  2.54 cm
1 feet =12 "
1 miter =3.28 feet
1 miter =100 cm
1 miter= 1000mm
1 kilometre =1000 mters

कार्य करते समय बरती जाने वाली सावधानियां

1 स्टील रूल को कभी भी कटिंग टूल के साथ मिलाकर नहीं रखना चाहिए।
2 स्टील रूल को कभी भी पेशकश की तरह प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3 स्टील रूल को हमेशा साफ रखना चाहिए ताकि माप लेते समय उसके निशान साफ दिखाई दे सके।
4 रूल को समय-समय पर हल्का तेल लगाते रहना चाहिए।
        

Sunday, October 14, 2018

File

तीसरा औजार फाईल (Files)

किसी भी धातु या किसी अन्य कठोर वस्तु की सतह पर से रगड़ कर पदार्थ को थोड़ी थोड़ी मात्रा में हटाने की प्रक्रिया को रेत ना कहते हैं।
         किसी मशीन के दो पूरजो को आपस में सही स्तर पर बनाने के लिए फाइल का प्रयोग किया जाता है जिस धातु के द्वारा उन सतहों को काटा जाता है उस रेतने वाले औजार को उपयोग में लाया जाता है उसे रेती file कहा जाता है। रेती एक प्रकार का कटिंग हैंड टूल है इसके द्वारा पारट या जाब को अलग अलग तरह से रेता जाता है सीधे आकार आयताकार आकार गोलाकार अर्ध गोलाकार त्रिभुजाकार में धातु को काटने के लिए किया जाता है ताकि भाग को सही साइज का बना सके।
Files

        रेती files मृदु इस्पात की बनी होती है रेती को कठोरी करण एवं पायनीकरण नामक उष्मा उपचार किए जाते हैं।

रेती के भाग (Types of file)

Face,pont ,edge, hill, tang, solder,length

रेतियों का वर्गीकरण Classification of File

रेडियो का वर्गीकरण एवं नामकरण निम्नलिखित गुणकों के आधार पर किया जाता है:-

size , आकरीती, दांतो का कट, दंत संख्या।

फाइलों के प्रकार Type s of File:-

1 चपटी फाइल (फ्लैट file)
 2 बाइंडिंग फाइल (winding file)
3  हस्ती रेती ( hand file) 
4  पिलर file
Flat file

5  वर्गाकार रेती (square file)
6 त्रिभुजाकार रेती (triangular file)
7  गोल रेती (round file)
8 अरधगोल  रेती  (half round file)
9 क्षुरधार रेती (knife edge file)
10  सुई रेती (needle file)

रेती की पीनीगं Pining of File

      रेती द्वारा किसी कार्य को रेतते समय   कभी-कभी इसके द्वारा कटे छोटे-छोटे  कुछ कण  इसके दांतो के बीच में फंस जाते हैं इसे रेती की पींनिंग कहते हैं।


           यदि इन फंसे हुए कणों के साथ रेती द्वारा रेतने का कार्य जारी रखा जाए तो तेज धार वाले एक फसे हुए कण कार्य की सतह पर खरोच के निशान बना देते हैं जिससे वह ना तो अच्छी दिखाई देती है और ना ही ठीक बन पाती है इसको दूर करने के लिए फाइल कार्ड द्वारा फंसे हुए कणों को दांतो के बीच से निकाल देना चाहिए तथा रेती के फेस पर सूखा चौक लगा देना चाहिए मुलायम धातु से रेतते समय  तथा चिकनी रेती को अधिक दबाव देकर चलाते समय पींनीग प्राया जल्दी हो जाती है।

फाइल कार्ड क्या होता है ?what is file card?

यह एक प्रकार का ब्रश होता है जो पतले परंतु कठोर तारों का बनाया जाता है इसे लकड़ी के एक ऐसी टुकड़े में लगाया जाता है



जिसके दूसरे सिरे पर एक हत्था handle बना होता है इसका मान रहता है तथा शेष एक तिहाई 1/3 लंबाई वाला नोक की ओर वाला भाग पेपर होता है बिना पेपर वाली गोल
रेतिया भी मिलती है फाइल कार्ड तो प्रयोग करते समय इसे उसी दिशा में चलना चाहिए जिसमें रेती के दांते कटे हो।

रेतना क्या है 

धातु को रेती द्वारा काटने की विधि फाइलिंग कहते हैं फाइलिंग की निम्नलिखित विधियां हैं:-
1 सीधा रेतना
Single cut

2 क्रॉस रेतना
3 Draw filing
4 वक्र रेतना (curve filing )

रेतने की विधियां फाइलिंग ऑपरेशन(Filing Operations)


रेतते समय जिस क्रिया से धातु के फालतू पदार्थ को फाइल द्वारा रगड़ रगड़ कर हटाया जाता है उसे फाइलिंग कहते हैं फाइलिंग करते समय निम्नलिखित क्रम को ध्यान में रखना चाहिए:-
1 सबसे पहले कार्य के अनुसार फाइल का चयन करना चाहिए ।
2 जॉब को वॉइस के बीच में ठीक तरह से पकड़ लेना चाहिए जॉब को वॉइस के जबड़ों से तीन उचाई कारीगर की कोहनी की ऊंचाई के बराबर होनी चाहिए।
3 फाइल के हत्थे को हथेली का सहारा देकर पकड़ना चाहिए 4 वाइस के सामने खड़े होकर कार्य आरंभ करना चाहिए खड़े होते समय दोनों पैरों के बीच 20 से 30 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।
5 सतह को एक जैसी समतल का बनाने के लिए फाइल को जॉब के एक सिरे पर रखकर क्रिया आरंभ करके फाइल को चलाते समय दूसरे सिरे तक ले जाना चाहिए।
6 फाइल पर दाब एवं ताकत आगे के स्ट्रोक में हीं लगानी चाहिए और लगभग 40 से 60 स्ट्रोक प्रति मिनट लगने चाहिए।
7 सतह के बन जाने के बाद उसकी समतलता की जांच गुनिये try square से करनी चाहिए।
8 जहां तक संभव हो फाइल करते समय फाइल की पूरी लंबाई को प्रयोग में लाना चाहिए।
9 फाईलिंग  करने के बाद जॉब व फाइल को अच्छी तरह से साफ करके उनको उपयुक्त स्थान पर रखना चाहिए।


Friday, October 12, 2018

वाइस

दूसरा औजार वाइस Vices 

वाइस किसी भी धातु की आयताकार वस्तु को पकड़ने के लिए किया जाता है वॉइस का प्रयोग किसी भी *कार्य का टुकड़ा* जॉब को सही स्थिति में मजबूती से पकड़ने के लिए किया जाता है हाथ से जॉब को पकड़ने की सही स्थिति नहीं आएगी और ना ही सही पकड़ आएगी इसके कारण दुर्घटना होने की संभावना रहती है वॉइस एक प्रकार का जॉब पकने वाला साधन है जिससे जॉब को सही स्थिति में मजबूती से पकड़ कर उस पर फाइलिंग, मशीनींग , स्क्रेपिंग,  ड्रीलिंग , रिमींग,थरेडिंग आदि संक्रियाए की जाती है।

वॉइस के प्रकार


        वॉइस कई प्रकार के होते हैं मुख्य था इसमें बेंच वाइस तथा पाइप वाइस इसका प्रयोग ज्यादातर किया जाता है।

1 बैंच वाइस

             बेंच वाइस या समानांतर झगड़ा ढलवा लोहे का या (cast iron) मृदु इस्पात की बनी होती है और इसमें सस्थिर जबड़ा डला होता है इसमें एक लंबा भाग एक वर्गाकार चूड़ीदार पेच द्वारा आगे पीछे चलता है जिसके एक ओर एक जबड़ा होता है जिसे की स्लाइडिंग jaw जो या चल जबड़ा कहते हैं यह भी ढलवा लोहे का बना होता है। चल जबड़े के नीचे वाले भाग में से होकर पेच बाहर निकाले हुए आदमी (cast iron)मृदु इस्पात का एक हत्था(handle) लगा होता है।
Bench vice
जिसकी सहायता से पेच या स्पीडल को घुमाया जाता है अंदर की ओर लगा होता है जिससे यह ना तो जबड़े से बाहर निकल सके और ना ही अकेला जबड़े के अंदर जा सके बल्कि जबड़े को भी अपने साथ आगे पीछे गति कराता रहे। जबड़े के लंबे खोखले भागो अंदर एक fixed nut  लगी होती है जिसके अंदर पेच या spindleचलती रहे। दोनों जगहों के आमने-सामने की सतह पर ढलवा लोहे का स्टील बाहरी सतह पर दातेंदार दो आयताकार टुकड़ों को जीन्हे  जबड़ा प्लेट कहते हैं। पेचों द्वारा कस दिया जाता है जिससे कि वस्तु को दृढ़ता पूर्वक पकड़ा जा सके प्लेटो को हार्ड टेंपर hard tempre कर लिया जाता है जिन पर प्राय फाईलिंग, स्केलिंग,स्क्रेपींग  चीपींग आदि क्रिया करने के लिए आवश्यक होती है।

बैंच वाइस के प्रकार 

1 साधारणसाधारण बेंच वाइस (simple bench Vice)
2 सिविल बेंच वाइस(swil bench vice)
3 quick release bench vice
4 combination bench vice

2 पाइप वाइस (Pipe vice)

           पाइप वॉइस का प्रयोग पाइप या गोल छठ इत्यादि को पकड़ने के लिए किया जाता है इनके स्पिंडल और चल जबड़ा लंब रूप में होते हैं गोल चीजों को मजबूती के साथ पकडने के लिए इनके जबड़ों में वी (v) grove ग्रुव होते हैं। V का कोण मुख्यतः 90 डिग्री का होता है।
Pipe vice
 जॉब को मजबूती से पकड़ने के लिए v  जबड़े में  दांत भी कटे रहते हैं इनकी देह ढलवा लोहेकी होती है और स्पिंडल एवं हत्था मृदु इस्पात का बना होता है। इसका जबड़ा स्टील का बना होता है लेकिन किसी किसी पाइप का जबड़ा भी ढलवा लोहे का ही होता है।

वॉइस के प्रकार types of vice


 bench vice,pipe vice,machine vice
 ,Leg voice , हैंड वाइस , drill vice,
C clamp vice, carpenter vice etc.

vice clamp  वाइस क्लेम्प

वॉइस क्लैंप का प्रयोग वॉइस के जबड़ों के ऊपर किया जाता है वाइस क्लैंप धातु की पतली चादर का टुकड़ा, शीट,
गत्ता इत्यादि होते हैं वॉइस क्लैंप का प्रयोग फीनिश जाब की   सतह  खराब ना हो जाए इसलिए वॉइस के जबडों के बीच में लगाया जाता है।

वॉइस का प्रयोग करते समय बरती जाने वाले सुरक्षा सावधानियां

1 कार्य प्रारंभ करने से पहले वॉइस को ब्रश से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए और कार्य करने के बाद भी अच्छी तरह साफ कर देना चाहिए।
2 वॉइस के स्पिंडल व बॉक्स नेट पर तेल या ग्रीस लगाते रहना चाहिए।
3 job को जबडों के मध्य में बांधना चाहिए।
4 जॉब को कसते समय हत्थे को हाथ से ही घुमाना चाहिए हथौड़े की चोट कभी नहीं देनी चाहिए।
5 वॉइस में जॉब को ना तो आवश्यकता से अधिक कसना चाहिए और ना ही ढीला छोड़ना चाहिए।
6 फिनिश किए हुए जॉब को बांधते समय नरम धातु के vice clamp प्रयोग करने चाहिए।
7 कार्य करते समय वॉइस हीलनी नहीं चाहिए।
8 जॉब को जबड़ों से इतना ऊंचा बांधना चाहिए कि कार्य करते समय टूल वॉइस से टकराने ना पाए जॉब को अधिक ऊंचा बांधने पर कार्य करते समय यह किट किट की आवाज करेगा।



Wednesday, October 10, 2018

Hack saw frame

industrial training में उपयोग होने वाले औजार

हैक्सॉ फ्रेम(Hacksaw frame)

Hacksaw frame

                       फिटिंग कार्य में धातु की छडों , नालीयों, पट्टियों,चादरों तथा किसी भी प्रकार की अनेक वस्तुओं को काटने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। औ Huर इस कार्य के लिए हैक्स। ही  सामान्य रूप से प्रयोग किया जाने वाला हस्त औजार है। हैक्जा को हम आरी के रूप में जानते हैं। जिसमें एक और लकड़ी का हैंडल लगा होता है तथा दूसरी ओर slidingsliding screw लगा होता है स्लाइडिंग स्क्रु के दूसरे सीरे मैं पीन अभी होती है इन दोनों पीनो ब्लेड को फिट किया जाता है स्लाइडिंग स्क्रू के दूसरे सिरे पर चूड़ियां कटी होती है जिन परपंख  डिवरी (wing nut)चढ़ी होती है जिसको बाइंग नेट कहा जाता है जिसके द्वारा blade को कसा वह ढीला किया जाता है ।हैक्ज फ्रेम mild steel का बना हुआ होता है। hacksaw frame का आकार अंग्रेजी के c आकार जैसा होता है ।

हेक्सा फ्रेम के प्रकार

1 flexible hacksaw

2 adjustable hacksaw

             hacksaw blade को प्राय हाई कार्बन स्टील और टंगस्टन  से बनाकर कठोर एवं टैंपर किया जाता है हेक्सा ब्लेड एक प्रकार की इस्पात की पत्ती होती है जिसके दोनों सिरों पर एक-एक छेद होता है इसके एक या दोनों किनारों पर वी आकार के दांत बने होते हैं प्राय ऐसी ब्लैडों  को प्रयोग किया जाता है जिसके दांतो का झुकाव आगे की ओर होता है।

हेक्सा का प्रयोग करते समय अपनाई जाने वाली सुरक्षा सावधानियां

1 जॉब के अनुसार सही ग्रेड का ब्लेड चयन करना चाहिए।
2 जॉब को वाईस (vice) में बांधते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जॉब वाइस के जबड़े से अधिक बाहर ना निकले।
3 हेक्सा ब्लेड को सावधानी से ठीक तनाव देकर फ्रेम में कसना चाहिए अर्थात ब्लेड ना तो अधिक कसा हुआ हो और ना ही ढीला होना चाहिए।
4 हेक्सा को एक समान गति से चलाना चाहिए झटके देकर नहीं।
5 हेक्सा ब्लेड का प्रयोग करते समय एक हेक्सा ब्लेड को 1 मिनट में 40 से 50 स्ट्रोक होने चाहिए।
Sefty precautions

6 कटिंग करते समय शीतलक (coolent)or water and oil  etc. का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
7 कटिंग करते समय बलेड  के टूट जाने पर नए ब्लेड का प्रयोग नहीं करना चाहिए बल्कि दूसरा पुराना बलेड  को लेकर कटिंग को पूरा करना चाहिए नए ब्लेड  का प्रयोग पुराने ब्लेड के कट में करने से वह फंसकर टूट जाएगी।
8 कटिंग करते समय केवल आगे के स्ट्रोक में ही दवाब देना चाहिए व पीछे के स्ट्रोक के दबाव को कम कर देना चाहिए।
9  हेक्सा चलाते समय इसे सीधा चलाएं और बलेड  को  टूटने से बचाए।
10  पतली चादर को लकड़ी की दोनों तरफ पैकिंग के बीच में रखकर वॉइस में कसकर काटना चाहिए।
11  कार्य करने के बाद हेक्सा को साफ करके उपयुक्त स्थान पर मापक औजारों से दूर रखना चाहिए।

Monday, October 8, 2018

First aid or प्राथमिक चिकित्सा और वर्कशॉप में आग लगने के कारण

First aid or प्राथमिक चिकित्सा

कार्यशाला में काम करते समय कारीगर को लापरवाही से किसी भी प्रकार की कोई दुर्घटना हो जाए और उसे चोट  पहुंचे तो डॉक्टर के आने से पहले जो रोगी को उपचार दिया जाता है या चिकित्सा दी जाती है उस चिकित्सा को प्राथमिक चिकित्सा कहा जाता है।

प्राथमिक चिकित्सा के निर्देश

1 प्राथमिक चिकित्सा करते समय घायल घायल व्यक्ति को देखकर घबराना नहीं चाहिए
2 प्राथमिक चिकित्सा करते समय दुर्घटना के कारण की जानकारी करने के बाद मशीन गैस या बिजली के main switch को बंद करना चाहिए।
3. जहां तक संभव हो तो घायल व्यक्ति घायल व्यक्ति को दुर्घटना स्थल से से हटा देना चाहिए।
4. घायल व्यक्ति के चारों ओर भीड नहीं लगानी चाहिए ।
5. घायल व्यक्ति की शारीरिक लक्षणों के अनुसार ही प्राथमिक चिकित्सा कर लेनी चाहिए।
6. घायल व्यक्ति को यदि रक्तपात हो तो उसे तुरंत रोकने का प्रयास करना चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा के कर्तव्य

1 प्राथमिक चिकित्सा का सबसे पहला कर्तव्य है कि घटनास्थल पर शीघ्र ही डॉक्टर बुलाने की चेष्टा करनी चाहिए।
2 डॉक्टर के आने पर जहां तक संभव हो सके रोग या चोट  के कष्ट को दूर करने की कोशिश करें यदि चोट से खून बह रहा हो तो उसे तुरंत रोकने की कोशिश करनी चाहिए।
3 रोगी या घायल को आराम से लेटा देना चाहिए ताकि वह अच्छी तरह से सांस ले सकें यदि रोगी को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो कृत्रिम श्वास द्वारा श्वास देना चाहिए।
4 पानी का  प्रबंध करना चाहिए और रोगी को थोड़ा सा पिलाकर यदि वह पीने की अवस्था मैं नहीं है तो उसके मुंह  में पानी के छींटे मारने चाहिए।
5 घायल व्यक्ति को गर्म दूध कॉफी आदि देकर उसके शरीर को गर्मी पहुंच आनी चाहिए और साथ में उसके हाथ पांव मसलने चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा का सामान

टीचर आयोडीन , टिंचर बैंजो रन, सप्रींट, पोटेशियम परमेगनेट, डीरोल, सोडा बाइ चुरण,सुघने कानमक,


बरनोल ,दवाई युक्त प्लास्टर,गोल पटटी,रुई, कैंची, चाकू, सेफ्टी पीन, दवाई पिलाने वाला गीलास,बांस की तिलिंया इत्यादि।

वर्कशॉप में आग लगने के कारण

आग लगने के कारण

1 बिजली की तारों के ढीले कनेक्शन।
2 तेज चलने वाले पार्ट के बीच में लुब्रिकेंट का ना होना।
3 तेल के गीले चिथडे जगह-जगह बिखरे होना।
4 कारखाने या वर्कशॉप में धूम्रपान करने से।
5 बिजली के तारों पर ओवरलोड होना।
6 बिजली के शार्ट सर्किट से आग लग सकती है।
7 विस्फोटक पदार्थों को ध्यान से ना रखने पर आग लग सकती है।

आग के प्रकार

खासतौर पर आग चार प्रकार से लग सकती है जो निम्नलिखित है:-

1 बिजली द्वारा आग:- 

         यह आग बिजली से लगती है और इसमें स्टोन कार्बन टेट्रा क्लोराइड का प्रयोग किया जाता है।

2 तेल की आग:-

          तेलिया पदार्थों से लगने वाली आग को क्या कहते हैं यह आग खतरनाक होती है इसे बुझाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इसे फोम फायर एकसटीगयूशर का प्रयोग किया जाता है।

                        Fire extinguisher

3 कार्बोनेशियम  आग:- 

         जो आग लकड़ी के कोयले के या कोयले से जलाई जाती है उसे कार्बोनेशन आग कहते हैं इसे बुझाने के लिए पानी,रेत या मिट्टी का प्रयोग किया जाता है इसके अतिरिक्त इसे बुझाने के लिए soda acid एकसटीगयूशर का प्रयोग किया जाता है।
4 गैस की आग:- 

           गैस द्वारा चलाई गई आग को गैस फायर कहते हैं इसे बुझाने के लिए पानी का प्रयोग किया जाता है।


आग बुझाने के यंत्र

पानी की भरी बाल्टी
रेत की भरी बाल्टी
अगनिशमक 

आग लगने पर कौन सी सावधानियां अपनाएं

1 आग लगने पर आग आगा आग करके पुकारे।
2 वर्कशॉप में कार्य करते समय धूम्रपान ना करें।
3 आग लगने पर अग्निशामक व कारखाने के उच्च अधिकारियों को सूचित करें।
4 मशीन को कॉटन वेश के द्वारा साफ करने के बाद उसे कूड़ेदान में डाल कर ढक्कन से बंद करना चाहिए।
5 मेन स्विच को बंद करके बिजली के प्रभाव को रोक दें।
6 तेल से लगी आग पर पानी ना डालें उसे रेत या गैस से बुझाने का प्रयास करें।
Fire in forest land
8 यदि आग से घिर जाए तो खड़े नहीं रहना चाहिए फर्श पर लेटकर रेंगना चाहिए।
7 बिजली बंद ना हो तो बिजली की तारों पर पानी ना फेंके अगर ऐसा करेंगे तो बिजली का धक्का लगेगा।
9 आग बुझाने के साधनों का उचित प्रबंध करना चाहिए।


Friday, October 5, 2018

इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग में सुरक्षा सावधानियां

industrial training में सुरक्षा से आप क्या समझते हैं‌‌ ‌?

सुरक्षा से आप क्या समझते हैं?

         कार्यशाला में कार्य करते समय दुर्घटनाओं से बचने के लिए स्वयं कार्य को समय-समय पर पूरा  करने के लिए जो जो सावधानियां प्रयोग में लाई जाती लाई जाती है उन्हें सुरक्षा के नाम से जाना जाता है।

सुरक्षा के नियम

       कार्यशाला में है कार्य करते समय अपनी सुरक्षा के लिए प्राय निम्नलिखित नियम अपनाने चाहिए
1.  अपने कार्यस्थल को साफ सूथरा रखना चाहिए।
2.  कार्य करते समय प्रत्येक कार्यकर्ता को वर्कशॉप में चुस्त फिटिंग वाली पोशाक पहननी चाहिए ।
3.  कार्य करते समय किसी भी कारीगर की पोशाक ज्यादा लंबी नहीं होनी चाहिए और ना ही सिर के बाल ज्यादा लंबे नहीं होने चाहिए यदि ऐसा है तो उसे टोपी इत्यादि पहन लेनी चाहिए।
4.  वर्कशॉप में कार्य करते समय कारीगर को अंगूठी घड़ी मफलर टाई आदि नहीं कहनी चाहिए।
5.  वर्कशॉप में कार्य करते समय आंखों के ऊपर चश्मा लगाना चाहिए।
6.  बिना जानकारी के किसी भी सामान को छूना नहीं चाहिए
7.  वर्कशॉप के अंदर कार्य करते समय किसी भी प्रकार का मजाक आपस में नहीं करना चाहिए।
8.  कार्यशाला के फर्श के ऊपर किसी भी प्रकार का ग्रीस तेल आदि नहीं डालना चाहिए यदि ऐसा ता है तो उसे तुरंत साफ कर देना चाहिए।
9.  शिर्डी का प्रयोग करते समय धरातल पर अच्छी तरह से रुकावट बना लेनी चाहिए।

सुरक्षा के प्रकार

1. अपनी सुरक्षा
2. साधारण सुरक्षा
3. मशीनों की सुरक्षा

1. अपनी सुरक्षा

   workshop मैं कभी भी ढीले कपड़े पहन कर नहीं आना चाहिए।
2 वर्कशॉप में कभी भी नंगे पांव या चप्पल पहन कर नहीं आना चाहिए।
3 वर्कशॉप में कार्य करते समय जिस भी मशीन का ज्ञान ना हो उसे छूना नहीं चाहिए।
4  grinding करते समय आंखों पर चश्मा पहनना चाहिए।
5.  चोट लगने पर तुरंत प्राथमिक चिकित्सा लेनी चाहिए।

2  साधारण सुरक्षा

1 मशीनों को जलाने से पहले अच्छी तरह से देख लेना चाहिए
2  चलती मशीनों को कभी भी रिपेयर नहीं करना चाहिए।
3 कार्यशाला के अंदर तेल इत्यादि नहीं गिरने देना चाहिए
4 मापने वाले हजारों को हमेशा काटने वाले ओजारों से अलग अलग रखना चाहिए।
5 बिजली की नंगी तारों को नहीं छूना चाहिए।
6 कार्य करते समय सुरक्षा संबंधी साधनों का प्रयोग करना चाहिए।

3   मशीनों की सुरक्षा

1 जिस मशीन पर कार्य कर रहे हो उसे अच्छी तरह चलाने का ज्ञान होना चाहिए।
2 मशीनों को चलाने से पहले उसका तेल ग्रीस और  पेच देख लेना चाहिए।
3 बिजली चले जाने पर सभी बटन बंद कर देने चाहिए।
4  मशीनों के पास उसके संबंधित औजार नहीं रखने चाहिए।
5  कार्यशाला में काम करने के स्थान पर उचित रोशनी का प्रबंध होना चाहिए।


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